मुहम्मद यूनुस की अगुवाई में इस्लामिक कट्टरपंथ की आग में झुलस रहे बांग्लादेश हालत इन दिनों काफी बुरी है। यही हाल कपड़ा उद्योग का है, जो इन दिनों मुश्किल हाल में है। यह उद्योग देश की कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा है, लेकिन अब स्पिनिंग मिलों (धागा बनाने वाली फैक्ट्रियां) में गंभीर संकट छाया हुआ है। स्थानीय मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्दी उनकी मांगे नहीं मानी तो 1 फरवरी 2026 से सभी स्पिनिंग मिलें बंद हो सकती हैं। इससे करीब 10 लाख लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
समस्या कैसे शुरू हुई
पिछले कुछ महीनों से बांग्लादेश में गैस की आपूर्ति ठीक नहीं चल रही है। कई बार गैस नहीं मिलती या बहुत कम मिलती है, जिससे मिलों में मशीनें चलाना मुश्किल हो गया है। उत्पादन 50 फीसदी तक कम हो गया है। पिछले 3-4 महीनों में इस गैस संकट से उद्योग को लगभग 2 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है। सरकार ने न तो गैस की पूरी सप्लाई की और न ही कोई खास मदद दी।
इसके साथ ही सस्ता आयातित धागा (यार्न) बाजार में भर गया है। खासकर भारत से आने वाला कॉटन यार्न बहुत सस्ता और अच्छी क्वालिटी का है। चीन से भी पॉलिएस्टर यार्न आता है। गारमेंट फैक्ट्रियां इसी सस्ते धागे का इस्तेमाल करती हैं क्योंकि लोकल धागा महंगा और कभी-कभी कम क्वालिटी वाला पड़ता है।
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ड्यूटी-फ्री यार्न का विवाद
बांग्लादेश में गारमेंट निर्यातक बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत यार्न ड्यूटी-फ्री (बिना टैक्स) आयात करते हैं। इससे उन्हें लागत कम रहती है और विदेश में कपड़े सस्ते बेच पाते हैं। लेकिन स्थानीय स्पिनिंग मिल मालिकों (बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन – BTMA) का कहना है कि इसी वजह से उनका धागा नहीं बिक रहा। उनके पास 12,000 करोड़ टका से ज्यादा का स्टॉक पड़ा है, जो बिक नहीं रहा। अब तक 50 से ज्यादा मिलें बंद हो चुकी हैं और हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।
वाणिज्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (NBR) को सिफारिश की है कि इस ड्यूटी-फ्री सुविधा को रोक दिया जाए, ताकि घरेलू मिलों को बचाया जा सके। 2025 में बांग्लादेश ने करीब 70 करोड़ किलोग्राम यार्न आयात किया, जिसमें 78 फीसदी भारत से आया और इस पर 2 अरब डॉलर खर्च हुए।
BTMA की मांगें
- 10-30 काउंट कॉटन यार्न पर ड्यूटी-फ्री आयात रोक दिया जाए।
- गैस पर सब्सिडी और बिना रुकावट सप्लाई मिले।
- VAT में कुछ समय के लिए छूट।
- बैंक लोन पर कम ब्याज।
- सरकार से खुलकर बातचीत हो।
गारमेंट निर्यातकों का पक्ष
दूसरी तरफ गारमेंट मालिक (BGMEA) कहते हैं कि अगर ड्यूटी-फ्री आयात बंद हुआ तो उनका उत्पादन महंगा हो जाएगा। वैश्विक बाजार में कपड़े की कीमत बढ़ेगी और ऑर्डर कम हो सकते हैं। इससे पूरा निर्यात उद्योग प्रभावित होगा। एक भारतीय यार्न निर्यातक ने भी कहा कि इस फैसले से बांग्लादेश के गारमेंट निर्यात पर बुरा असर पड़ेगा। अभी दोनों तरफ से तनाव है और सरकार पर दबाव है कि जल्दी कोई रास्ता निकाले, वरना 1 फरवरी से मिलें बंद होने की नौबत आ सकती है।











