कनाडा में सरकार द्वारा समर्थित इच्छा मृत्यु को लेकर अब नई तरह से बहस शुरू हो रही है। जहां आँकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि वहाँ पर चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है तो वहीं एक 26 वर्षीय युवक की मृत्यु ने इस बहस को तेज कर दिया है कि आखिर किस उम्र के लोगों को इस प्रकार की इच्छा मृत्यु मिलनी चाहिए।
इच्छा मृत्यु के नाम पर हत्या
कनाडा में हजारों नागरिकों को कथित इच्छा मृत्यु के नाम पर मौत की नींद सुलाया जा रहा है। इसे मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग अर्थात मृत्यु में चिकित्सा सहायता कहते हैं। 26 वर्षीय कियानों को 30 दिसंबर 2025 को वैंकोवर में डॉ इलेन विएबे के अनुमोदन के बाद इच्छा मृत्यु दे दी गई। standingforfreedom नामक पोर्टल के अनुसार इस फिज़िशन के अनुमोदन पर अब तक 400 जीवन लिए जा चुके हैं।
जी हाँ, एक डॉक्टर चार सौ लोगों को इच्छा मृत्यु के नाम पर लोगों को मौत की नींद सुला चुका है। अब बात करते हैं कियानों की। कियानों को डाइअबीटीज़ थी और उसकी बाईं आँख की रोशनी चली गई थी, वह डिप्रेशन से भी लड़ रहा था और साथ ही वह इससे पहले वर्ष 2022 में चिकित्सा सहायता वाली इच्छा मृत्यु चाह रहा था। जिसे उसकी माँ मारग्रेट मारसिला ने सफलतापूर्वक रोक दिया था।
परंतु एक माँ का यह प्रयास इस बार सफल नहीं हुआ और इस बार सफल हो गया चिकित्सा सेवा का वह कथित षड्यन्त्र, और उसका बेटा चला गया। कनाडा की मेड योजना को लेकर तमाम आलोचनाएं हो रही हैं और हालांकि इसमें मानसिक बीमारी पर मृत्यु का प्रावधान नहीं है। फिर भी लोग इसमें कमी खोजकर यह काम कर रहे हैं।
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कई अमेरिकी राज्यों में कानूनी मृत्यु सहायता हो रही
यह और भी स्तब्ध करने वाली बात है कि केवल कनाडा में ही नहीं बल्कि 12 अमेरिकी राज्यों में इस प्रकार की मृत्यु के लिए कानूनी सहायता दी जा रही है। कैलिफ़ोर्निया, कोलोराडो, डेलावेयर, हवाई, मेन, मोंटाना, न्यू जर्सी, न्यू मैक्सिको, ओरेगन, वर्मोंट, वाशिंगटन और डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कोलंबिया जैसे राज्यों में इच्छा मृत्यु दी जा रही है। इसके साथ ही कई और राज्य भी हैं, जो अब ऐसे कानून लेकर आ रहे हैं। जैसे Illinois ने अभी एंड टू लाइफ ऑप्शन एक्ट को पारित किया है और अब उसे सीनेट से मंजूरी का इंतजार है। ऐसे ही मैरीलैंड, डेलावेयर और न्यू हैम्पशायर भी ऐसे बिलों को आगे लेकर आ रहे हैं।
इस पोर्टल के अनुसार ऑरेगन जहां पर 1997 से ही चिकित्सीय सहायता के साथ इच्छा मृत्यु का कानून है, वह अब यह निर्धारित करने पर कार्य कर रहा है कि आखिर ये जानलेने वाली दवाइयाँ कौन लिख सकता है। सिर्फ़ डॉक्टरों से लेकर नर्स प्रैक्टिशनर और फ़िज़िशियन असिस्टेंट को भी इसमें शामिल किया जाएगा। वर्मोंट और वाशिंगटन भी इसी तरह के विस्तार पर काम कर रहे हैं।
क्या संवेदना की आड़ में कुछ और ही खेल है
जिस प्रकार से तमाम कथित विकसित देश इस प्रकार के कानून ला रहे हैं या युवाओं को भी इच्छा मृत्यु में सहायता कर रहे हैं, तो ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या आखिर इनका उद्देश्य क्या है? क्या यह संवेदना की आड़ में कुछ और ही धंधा है? क्या यह उन लोगों से पीछा छुड़ाना है, जो बेचारे महंगी दवाइयों का बोझ नहीं उठा सकते हैं? मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार लोगों को यह कहकर दबाव बनाया जाता है कि वे स्वास्थ्य सेवा पर बोझ हैं, इसलिए उन्हें मर जाना चाहिए।
2016 से अब तक 90,000 लोगों को जबरन इच्छा मृत्यु
ऐसे एक नहीं कई मामले हैं और कई वीडियोज़ भी सोशल मीडिया पर हैं, कि कैसे बीमार लोगों पर मरने के लिए दबाव डाला जाता है। अब और एक प्रश्न उठता है कि क्या ऐसे देशों को सभ्य कहा जा सकता है, जहां पर अभी भी गरीबों को जीवन के स्थान पर मौत का विकल्प दिया जाता है? कनाडा में ही वर्ष 2016 से लगभग 90,000 लोगों को इस प्रकार की इच्छा मृत्यु दी जा चुकी है।
Canada has euthanized around 90,000 people since Prime Minister Justin Trudeau’s Liberal government legalized so-called “Medical Assistance in Dying” (MAID) in 2016, a watchdog has revealed.
The death toll was exposed in shocking new data published by the Euthanasia Prevention… pic.twitter.com/WUvedTqBjJ
— “Sudden And Unexpected” (@toobaffled) October 18, 2025
ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या ये सभी इतने बीमार होंगे कि ठीक ही न हो सकें या फिर सरकार की ही इच्छा शक्ति ही इतनी नहीं है कि वह अपने लोगों को ठीक कर सके? या फिर वह ऐसा करना ही नहीं चाहती है? लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि कनाडा में रेगुलर डॉक्टर नहीं हैं, उन्हें समय पर जांच नहीं मिलती हैं और इस कारण वे मर रहे हैं। हालांकि इस 26 वर्षीय युवक की सरकारी सहायता से इच्छा मृत्यु ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है और अब लोग उन तमाम मामलों को सामने ला रहे हैं, जिन्हें काफी समय से लोगों ने बताया नहीं था। नवंबर 2025 में ही एक रिपोर्ट आई थी कि कनाडा में उन लोगों को भी इच्छा मृत्यु दी जा रही है, जो ठीक हो सकते हैं।
















