एक कहावत है कि ‘किसी को इतना मत डराओ कि वो डर ही भूल जाए’, ये बात वेनेजुएला पर सही से फिट बैठ रही है। वेनेजुएलन तेल पर कब्जा करने के इरादे से डोनाल्ड ट्रंप ने हमला करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण करवा लिया। उनकी जगह अंतरिम राष्ट्रपति बनीं डेल्सी रोड्रिगेज। लेकिन अब उन्होंने भी अमेरिका से मिल रहे दबाव पर साफ-साफ नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन से अब काफी हो चुका है। अब अमेरिकी दखल बंद होना चाहिए।
क्या है पूरा मामला
3 जनवरी को अमेरिकी सेना ने काराकास पर हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके साथ उनकी पत्नी के साथ जबरन पकड़ लिया। यह एक सैन्य ऑपरेशन था, जिसमें विदेशी ताकत ने दक्षिण अमेरिकी देश की राजधानी पर हमला किया। रोड्रिगेज ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि किसी दक्षिण अमेरिकी राजधानी पर कोई विदेशी ताकत ऐसा हमला कर सकती है। मादुरो को अमेरिका ले जाया गया, जहां उन पर ड्रग्स और हथियारों से जुड़े आरोप हैं। यह घटना तीन हफ्ते पहले की है।
रोड्रिगेज का मुख्य बयान
पूर्वी राज्य अंजोआतेगी में तेलकर्मियों को संबोधित करते हुए रोड्रिगेज ने कहा, “वेनेजुएला के नेताओं पर वाशिंगटन से अब काफी ऑर्डर मिल चुके हैं। हमारे अंतर-संबंध और आंतरिक विवादों को वेनेजुएला की राजनीति ही सुलझाए। विदेशी ताकतों का काफी हो चुका।” उन्होंने एएफपी को दिए बयान में जोर दिया कि अमेरिका का दखल अब बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे अमेरिका के साथ लंबे समय से चले आ रहे विवादों को “बोलिवेरियन डिप्लोमेसी” के जरिए आमने-सामने बात करके सुलझाएंगे।
एकजुटता और बातचीत की अपील
रोड्रिगेज ने लोगों से राष्ट्रीय एकता की मांग की। उन्होंने कहा, “हम डरते नहीं हैं, क्योंकि हमें एकजुट होकर इस देश में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करनी है।” तटीय राज्य ला गुआइरा से राज्य टेलीविजन पर बोलते हुए उन्होंने विपक्ष से बातचीत की अपील की। उन्होंने कहा कि शांति के लिए कोई राजनीतिक या पार्टीगत मतभेद नहीं होना चाहिए।
रोड्रिगेज का सख्त रुख
राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा, “हमारे मतभेदों के बावजूद हमें एक-दूसरे से सम्मान के साथ बात करनी होगी। मतभेदों के बावजूद हमें मिलकर समझौते करने होंगे।” यह अपील मादुरो की गिरफ्तारी के तीन हफ्ते बाद आई, जब उन्होंने शनिवार को विपक्ष से शांति के लिए “समझौते” करने की बात कही। उनका फोकस घरेलू राजनीतिक संवाद पर है, बिना किसी विदेशी दखल के। रोड्रिगेज का यह रुख ट्रंप प्रशासन के दबाव के खिलाफ एक साफ संदेश है। वे चाहती हैं कि वेनेजुएला के मुद्दे वेनेजुएला के लोग ही मिलकर सुलझाएं, न कि बाहर से कोई आदेश दे।

















