भारत-पाकिस्तान के बीच मई 2025 में चला ऑपरेशन सिंदूर अब एक स्विस थिंक टैंक की रिपोर्ट की वजह से फिर चर्चा में है। विट्जरलैंड के सेंटर फॉर मिलिट्री हिस्ट्री एंड पर्सपेक्टिव स्टडीज (CHPM) ने 47 पेज की डिटेल रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि भारतीय वायुसेना (IAF) ने सिर्फ चार दिनों में पाकिस्तान के बड़े इलाकों पर हवाई वर्चस्व कायम कर लिया और इतना दबाव बनाया कि इस्लामाबाद को युद्ध रोकने के लिए सीजफायर मांगना पड़ा।
क्या है पूरा मामला
पाकिस्तान के द्वारा किए गए पहलगाम में आतंकी हमले के बाद 7 मई की रात को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इसका मकसद पाकिस्तान में बसे जैश-ए-मोहम्मद (बहावलपुर) और लश्कर-ए-तैयबा (मुरीदके) के मुख्यालयों पर सटीक हमले करना था। भारतीय वायुसेना ने राफेल और मिराज-2000 फाइटर जेट्स इस्तेमाल किए। एक ग्रुप ने कम ऊंचाई पर पाकिस्तानी एयरस्पेस में घुसकर अचानक हमला किया, ताकि पाकिस्तानी फाइटर जेट्स को बाहर निकालने पर मजबूर किया जा सके।
पाकिस्तान ने तुरंत 30 से ज्यादा फाइटर एयरक्राफ्ट भेजे और PL-15 लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलें चलाईं। राफेल को उनका मुख्य टारगेट बनाया गया।
पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई
पाकिस्तान ने 7 मई से ही बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल अटैक शुरू कर दिए। पहले वेव में 300 से ज्यादा ड्रोन, दूसरे में करीब 600 ड्रोन इस्तेमाल हुए। इसके अलावा आर्टिलरी रॉकेट, बैलिस्टिक मिसाइलें और एयर-लॉन्च्ड हथियार भी शामिल थे। टारगेट थे भारतीय आर्मी के ठिकाने, एयर बेस, लॉजिस्टिक्स हब और एयर-डिफेंस सिस्टम। उनका प्लान था कि भारतीय रडार ऑन हों तो उन्हें लोकेट करके नष्ट कर दें।
लेकिन भारत की लेयर्ड एयर-डिफेंस ने ज्यादातर हमलों को रोक लिया। आधे से ज्यादा ड्रोन सिर्फ एंटी-एयरक्राफ्ट गन्स से गिराए गए। IAF का इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और आर्मी का अकाशतीर नेटवर्क मिलकर काम किया। रडार सिर्फ थोड़ी देर के लिए ऑन होते थे, जिससे पाकिस्तान को सही लोकेशन नहीं मिल पाई।
भारत ने किया था करारा पलटवार
9-10 मई की रात को पाकिस्तान ने सबसे बड़ा हमला किया। फोकस था अदमपुर, श्रीनगर और कच्छ के एयर बेस और S-400 बैटरी पर। ड्रोन, जेमिंग और फाइटर जेट्स सब इस्तेमाल किए, लेकिन भारतीय डिफेंस नहीं टूटा। S-400 को नुकसान का पाकिस्तानी दावा बिना सबूत के रहा। फिर भारत ने 10 मई सुबह 2 से 5 बजे के बीच लंबी दूरी की मिसाइलों से जवाब दिया। ये हमले भारतीय एयरस्पेस से ही किए गए। टारगेट थे पाकिस्तानी एयर बेस, रडार और सरफेस-टू-एयर मिसाइल साइट्स। सुबह 10 बजे दूसरी लहर में ग्राउंड पर खड़े फाइटर एयरक्राफ्ट भी निशाने पर आए। कई पाकिस्तानी एयर बेस बंद हो गए, रनवे में गड्ढे पड़ गए, हैंगर तबाह हुए।
इसके बाद IAF को ब्रह्मोस और SCALP-EG जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों से बिना रोक-टोक स्ट्राइक करने की आजादी मिल गई। पाकिस्तान के फॉरवर्ड सर्विलांस रडार खत्म हो गए और S-400 से उनके AWACS एयरक्राफ्ट को खतरा था।
नुकसान का आकलन
IAF के मुताबिक हमलों से पाकिस्तान के 4-5 फाइटर, एक AWACS, एक ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, कई ड्रोन, रडार, कमांड सेंटर और एक SAM बैटरी नष्ट हुई। पाकिस्तान ने एक एयर बेस पर नुकसान माना लेकिन ज्यादा डिटेल नहीं दी। भारतीय नुकसान पर रिपोर्ट कहती है कि सिर्फ एक राफेल, एक मिराज-2000 और एक और फाइटर (MiG-29 या Su-30MKI) का नुकसान सबूतों से साबित होता है। पाकिस्तान के छह भारतीय एयरक्राफ्ट गिराने के दावे खारिज किए गए। कई PL-15 मिसाइल के हिस्से भारतीय इलाके में मिले, मतलब हमारे पायलट्स ने उन्हें चकमा दिया। 10 मई दोपहर तक पाकिस्तानी मिलिट्री ने सीजफायर की गुहार लगाई, भारत ने मान लिया। कुल मिलाकर 88 घंटे में ही ये हवाई टकराव खत्म हो गया।

















