भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं में इजाफा कर रहा है। इसका असर ये हो रहा है कि भारतीय वायुसेना ने दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर वायुसेना बनी हुई है। ये रैंकिंग वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट (WDMMA) की इस साल की रैंकिग हैं। इसमें रैंकिंग में अमेरिका और रूस की वायुसेनाएं पहले और दूसरे नंबर पर हैं। भारत ने चीन को पांचवीं बार पीछे छोड़ा है।
WDMMA क्या है?
WDMMA हर साल दुनिया की 103 देशों की 129 वायुसेनाओं का मूल्यांकन करता है। इसमें 48,000 से ज्यादा सैन्य विमानों का विश्लेषण किया जाता है। रैंकिंग सिर्फ विमानों की संख्या पर नहीं टिकी है। इसमें बेड़े की संरचना, तकनीकी क्षमता, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, आधुनिकीकरण और कुल ऑपरेशनल ताकत को देखा जाता है।
ट्रू वैल्यू रेटिंग (TVR) के आधार पर रैंकिंग
रैंकिंग TVR स्कोर पर आधारित है। टॉप 10 इस प्रकार हैं:
- अमेरिका – 242.9
- रूस – 114.2
- भारत – 69.4
- चीन – 63.8
- जापान – 58.1
- इजरायल – 56.3
- फ्रांस – 55.3
- ब्रिटेन – 55.3
- दक्षिण कोरिया – 53.4
- इटली – 51.9
भारतीय वायुसेना ने 2022 के बाद से चीन को पांच बार पीछे छोड़ा है। कुल मिलाकर अब तक छह बार तीसरे स्थान पर रही है।
भारतीय वायुसेना का बेड़ा
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना के पास कुल 1,716 विमान हैं। इनमें 542 लड़ाकू विमान शामिल हैं। इसमें सितंबर 2025 में सेवा से हटाए गए मिग-21 भी गिने गए हैं। वायुसेना के पास 498 हेलीकॉप्टर हैं। इनमें 222 Mi-17 और स्वदेशी HAL ध्रुव व रुद्र के 111 प्लेटफॉर्म शामिल हैं। 282 परिवहन विमान और 374 प्रशिक्षण विमान हैं, जिनमें से 325 सिर्फ ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होते हैं।20 विशेष मिशन वाले विमान भी हैं। इनमें एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम (AEW&C), खुफिया जानकारी जुटाने वाले प्लेटफॉर्म और हवा में ईंधन भरने वाले विमान शामिल हैं। ये लंबी दूरी की ऑपरेशंस और निगरानी में मदद करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू, परिवहन, हेलीकॉप्टर, प्रशिक्षण और विशेष मिशन विमानों का अच्छा संतुलन है।
अमेरिकी वायुसेना की ताकत
दुनिया की सबसे मजबूत वायुसेना अमेरिकी है। इसके बेड़े में 32 प्रतिशत लड़ाकू विमान हैं। अगर बमवर्षक और क्लोज एयर सपोर्ट विमान भी जोड़ दें तो यह आंकड़ा 41 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। हेलीकॉप्टर करीब 4 प्रतिशत, परिवहन विमान 14 प्रतिशत और विशेष मिशन वाले विमान भी 14 प्रतिशत हैं।
क्यों मायने रखती है यह रैंकिंग
रैंकिंग में सिर्फ मौजूदा बेड़े को नहीं देखा जाता। भविष्य की खरीद योजनाओं और स्वदेशी एयरोस्पेस इंडस्ट्री की क्षमता को भी महत्व दिया जाता है। हवाई ईंधन भरने वाले विमान, अर्ली वार्निंग सिस्टम, परिवहन और क्लोज एयर सपोर्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स रैंकिंग में अहम भूमिका निभाते हैं।
















