अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘वन मैन शो’ के नाम से विवादों में घिरे उनके ‘बोर्ड ऑफ पीस’ चार्टर पर हस्ताक्षर करने के बाद जिन्ना के देश के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। पाकिस्तान की सीनेट में विपक्ष के नेता ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के सरकार के फैसले का एकतरफा बताते हुए कड़े शब्दों में शरीफ के इस कदम की निंदा की है। इसे “नैतिक रूप से गलत और अस्वीकार्य” बताया है।
गत 22 जनवरी को स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक के दौरान प्रधानमंत्री शरीफ और शांति बोर्ड के कर्ता—धर्ता कहे जा रहे ट्रंप में बात हुई थी। इसके बाद इस बोर्ड के चार्टर पर हस्ताक्षर करते हुए जिन्ना के देश के प्रधानमंत्री मियां मोहम्मद शाहबाज शरीफ ने इसकी खूब तारीफें की थीं। सोशल मीडिया पर ट्रंप से उनकी बातचीत का मजाक उड़ाते खूब मीम भी चलाए जा रहे हैं।
शाहबाज जानते थे कि इस बोर्ड को लेकर विपक्षी दलों में आलोचना के स्वर गूंज रहे थे। इसके बावजूद, शाहबाज शरीफ ने 22 जनवरी को राष्ट्रपति ट्रंप की अध्यक्षता में गाजा के लिए गठित ‘शांति बोर्ड’ के चार्टर पर हस्ताक्षर करने के लिए विश्व के अनेक नेताओं के गुट में शामिल हुए। ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में वार्षिक विश्व आर्थिक मंच के दौरान इस समारोह की मेजबानी की।
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान को ट्रंप की ओर से इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण मिला था, जिसे स्वीकार कर लिया गया। प्रधानमंत्री शाहबाज ने दावोस जाकर अन्य कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ बोर्ड के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। हालांकि अनेक विशेषज्ञ इसे जिन्ना के देश के प्रधानमंत्री की मजबूरी बता रहे हैं क्योंकि शरीफ का इतना कद नहीं है कि वे ट्रंप को नाराज करने का खतरा मोल ले सकें। कारण, कंगाल देश के प्रधानमंत्री को जहां से पैसा मिलता हो या मिलने की उम्मीद हो, वहां वह झुके झुके रहकर भीख का अदृश्य कटोरा आगे सरका देते हैं।

जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व वाली पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने शरीफ के इस कदम पर कहा है कि ‘पाकिस्तान सरकार का ‘शांति बोर्ड’ में शामिल होने का निर्णय अस्वीकार्य है।’
पार्टी ने एक बयान जारी करके कहा कि अंतरराष्ट्रीय महत्व के ऐसे निर्णय हमेशा पूरी पारदर्शिता और सभी प्रमुख राजनीतिक पक्षों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद ही लिए जाने चाहिए। कहा कि किसी भी ‘अंतरराष्ट्रीय शांति पहल’ में पाकिस्तान की भागीदारी संयुक्त राष्ट्र की बहुपक्षीय प्रणाली की पूरक और उसे मजबूत करने के लिए होनी चाहिए, न कि समानांतर ढांचा बनाने के लिए।
इमरान की पार्टी पीटीआई का कहना है कि जब तक पूरी परामर्श प्रक्रिया संपन्न नहीं हो जाती, तब तक प्रधानमंत्री शाहबाज ‘शांति बोर्ड’ में अपनी औपचारिक भागीदारी वापस ले लें। पीटीआई की मांग है कि परामर्श प्रक्रिया संसदीय जांच और बहस के अधीन होनी चाहिए, जिसमें सभी प्रमुख राजनीतिक नेताओं, विशेष रूप से इमरान खान को शामिल किया जाना चाहिए।
फिलिस्तीन की जनता के प्रति अपना समर्थन जताते हुए पीटीआई ने वादा किया है कि ‘फिलिस्तीन के लोगों की इच्छा के खिलाफ किसी भी योजना को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उधर, मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन (एमडब्ल्यूएम) के अध्यक्ष और सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने भी ट्रंप के शांति बोर्ड में शामिल होने के सरकार के फैसले की निंदा की है और इसे ‘नैतिक रूप से गलत’ बताया है। विपक्षी दलों का मानना है कि गाजा शांति बोर्ड का मकसद हमास से हाथों से हथियार छुड़वाना है। यह आखिरकार इस्राएल के हक में जाएगा, तो क्या कल को शरीफ इस्राएल की गोद में बैठने को तैयार हो जाएंगे या उसके पाले में चले जाएंगे।

राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा पट्टी में इस्राएल और हमास के बीच संघर्ष विराम समझौते के दूसरे चरण के हिस्से के तौर पर इस बोर्ड का गठन किया है। गत अक्तूबर में, इस्राएल और आतंकवादी संगठन हमास ने ट्रंप की ‘शांति योजना’ पर सहमति जताई थी। व्हाइट आउस के अनुसार, वॉशिंगटन इस ‘बोर्ड को गाजा और उसके बाहर शांति और स्थिरता लाने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय के रूप देख रहा है।’
उल्लेखनीय है कि कई देशों ने ट्रंप की अगुआई वाले इस शांति बोर्ड में शामिल होने का न्योता स्वीकार किया है। इनमें प्रमुख हैं, अर्जेंटीना, अल्बानिया, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, बुल्गारिया, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, मोरक्को, मंगोलिया, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और विएतनाम।
हालांकि इस्राएल जिन्ना के देश के गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने को लेकर खुश नहीं है। उसका कहना है कि वह पाकिस्तान या किसी भी ऐसे देश को इस बोर्ड में कोई भूमिका नहीं निभाने देगा, जिसने अतीत में आतंकवाद का समर्थन किया है। इस्राएल के अर्थमंत्री नीर बरकत की यह टिप्पणी तब आई जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने दावोस 20 अन्य देशों के साथ ‘बोर्ड ऑफ पीस’ चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे। बरकत ने साफ कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन करने वाला देश है। उसका इस बोर्ड में स्वागत नहीं है।
इस्राएल के मंत्री ने कतर और तुर्की का भी उल्लेख किया और कहा, ‘हम कतरियों, तुर्कों को स्वीकार नहीं करेंगे…और इसमें पाकिस्तान भी शामिल है…ये गाजा में जिहादी संगठन हमास के नजदीकी समर्थक रहे हैं।’

















