भुवनेश्वर: भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नागरिकों से आह्वान किया कि वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन और आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र की सेवा साहस, समर्पण और निस्वार्थ भाव से करें। वे ओडिशा के कटक स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस जन्मस्थली संग्रहालय में आयोजित पराक्रम दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर किया गया। सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने नेताजी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें “भारत माता का महान सपूत” बताया, जिनकी विरासत आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है।
उन्होंने कहा कि नेताजी के जन्मस्थल का भ्रमण उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायी और समृद्ध अनुभव रहा। उपराष्ट्रपति ने स्मरण कराया कि नेताजी न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक निर्भीक और क्रांतिकारी नेता थे, बल्कि स्वतंत्रता के बाद भारत के शासन और राष्ट्र निर्माण को लेकर भी उनके पास एक स्पष्ट और दूरदर्शी दृष्टि थी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि नेताजी एक ऐसे भारत का स्वप्न देखते थे जो शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और गरीबी से मुक्त हो, जहां राष्ट्रीय एकता, अनुशासन और आत्मसम्मान सर्वोपरि हों। उन्होंने कहा कि नेताजी की सोच केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं थी, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण की व्यापक परिकल्पना से जुड़ी हुई थी। भारतीय राष्ट्रीय सेना के प्रेरणादायी मार्चिंग गीत “कदम कदम बढ़ाए जा” का उल्लेख करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि नेताजी का साहस, त्याग और बलिदान का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता संग्राम के दौर में था।
उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे नेताजी के शौर्य, एकता और मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च समर्पण के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का संकल्प लें। ओडिशा की विशिष्ट सभ्यतागत विरासत पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह राज्य भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक यात्रा में एक विशेष स्थान रखता है, जहां इतिहास, आध्यात्मिकता और परंपराएं सहज रूप से एक-दूसरे में गुंथी हुई हैं। उन्होंने जनजातीय विकास, आदिवासी समुदायों के जीवन स्तर में सुधार और निरंतर आधारभूत संरचना विकास के लिए ओडिशा सरकार के प्रयासों की सराहना की। राज्य के भविष्य पर विश्वास व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सुशासन और समावेशी विकास की निरंतरता के साथ ओडिशा शीघ्र ही देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।
ओडिशा की प्राचीन काल से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक की प्रतिरोध की परंपरा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यही विरासत नेताजी के क्रांतिकारी मार्ग में भी स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित होती है। उन्होंने कहा कि जिस भूमि ने बार-बार आक्रमणों का सामना करते हुए भी अपनी पहचान को सुरक्षित रखा, वही भूमि नेताजी के इस संदेश को भली-भांति समझती है कि स्वतंत्रता समर्पण से नहीं, बल्कि साहस, एकता और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होती है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का रिकॉर्डेड संदेश भी प्रसारित किया गया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उचित सम्मान प्रदान करते हुए वर्ष 2021 से उनकी जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की।
Grahan 2026: 4 ग्रहण लगेंगे इस साल लेकिन भारत में 1 ही क्यों दिखेगा? जानिये
इसके साथ ही उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह स्थित रॉस द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप किया। श्री राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री का निर्णायक नेतृत्व, निर्भीक दृष्टिकोण और राष्ट्रीय सुरक्षा व आत्मनिर्भरता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता वास्तव में पराक्रम की भावना को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पराक्रम दिवस केवल नेताजी के शौर्य को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक भारतीय के लिए राष्ट्र सेवा में साहसपूर्वक आगे बढ़ने का स्पष्ट आह्वान है। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर एक व्यक्तिगत स्मृति भी साझा की और कहा कि नेताजी की जीवन गाथा ही सबसे पहले उनके हृदय में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करने वाली रही, जिसने उन्हें जीवन भर सार्वजनिक सेवा और राष्ट्रीय कर्तव्य के मार्ग पर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित किया। स्मरणोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत उपराष्ट्रपति ने भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए) डाक टिकट गैलरी, संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर आधारित प्रदर्शनी तथा नेताजी संस्कृति भवन का उद्घाटन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में ओडिशा सरकार और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से नेताजी को सम्मानित करने के प्रयासों की सराहना की।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये संग्रहालय और प्रदर्शनियां युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा झेले गए असाधारण त्याग और कठिनाइयों को समझने में सहायक होंगी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी ने खेद व्यक्त किया कि भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने के बावजूद नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान को देश में लिखी गई कई इतिहास पुस्तकों में अपेक्षित महत्व नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में लगभग 25 वर्षों तक सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताजी के बारे में सैकड़ों पृष्ठों वाली इतिहास पुस्तकों में भी बहुत कम स्थान दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ व्यक्तित्वों को अत्यधिक महिमामंडित करने की प्रक्रिया में समकालीन ऐतिहासिक लेखन ने कई महान क्रांतिकारियों को उनका उचित स्थान नहीं दिया। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि जिन इतिहासकारों ने शहीद भगत सिंह को आतंकवादी तक करार दिया, उनसे निष्पक्षता की अपेक्षा करना व्यर्थ है। हालांकि, मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में उन महान नेताओं, महापुरुषों और अनेक गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिन्हें इतिहास के पन्नों से भुला दिया गया था।
उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस घोषित किया। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि 30 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नेताजी द्वारा तिरंगा फहराने के ऐतिहासिक साहस को सम्मान देते हुए तीन द्वीपों का नामकरण किया—रॉस द्वीप का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप, नील द्वीप का नाम शहीद द्वीप और हैवलॉक द्वीप का नाम स्वराज द्वीप रखा गया। इस समारोह में ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी, ओडिशा के संस्कृति मंत्री श्री सूर्यवंशी सूरज, कटक से सांसद श्री भर्तृहरि महताब सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
















