उरई (हि.स.) । उत्तर प्रदेश जनपद जालौन में 20 जनवरी 2011 को दहेज हत्या के एक जघन्य मामले में गुरुवार को जिला सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य अभियुक्त यूसुफ उर्फ रहीश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत में यह सिद्ध हो गया कि पीड़िता शकीला की हत्या दहेज की मांग पूरी न होने पर कीटनाशक जहर देकर की गई थी।
निकाह का झांसा देकर बेगम की तरह रखा गया
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी रसूल अहमद ने बताया कि अभियुक्त यूसुफ उर्फ रहीश ने निकाह का झांसा देकर उसकी पुत्री शकीला को अपने घर में बेगम की तरह रखा था। जब निकाह की बात आई तो अभियुक्त और उसके परिजनों ने दो लाख रुपये नकद, टीवी, फ्रिज और मोटरसाइकिल की दहेज में मांग की।
दहेज न मिलने पर लगातार उत्पीड़न और धमकियां
जब यह मांग पूरी नहीं हुई, तो शकीला के साथ लगातार मारपीट, उत्पीड़न और जान से मारने की धमकियां दी जाती रहीं। पंचायत के हस्तक्षेप के बावजूद भी आरोपी नहीं माने।
सुनियोजित षड्यंत्र के तहत कीटनाशक जहर दिया गया
26 जनवरी 2011 की शाम को अभियुक्त यूसुफ उर्फ रहीश ने अपने पिता इस्माइल महते, चाचा लल्लू, भाई हनीफ और बहनों नाजिरा व फातिमा के साथ मिलकर एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा। उन्होंने शकीला को धोखे से कीटनाशक जहर खिला दिया।
मृत समझकर बगीचे के गेट पर फेंका गया
जब उसकी हालत गंभीर हो गई, तो उसे मरा हुआ समझकर बगीचे के गेट पर फेंक दिया गया। पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने के बाद 27 जनवरी 2011 को शकीला की मृत्यु हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जहर दिए जाने की पुष्टि
मामले में पोस्टमार्टम के दौरान सुरक्षित विसरा को विधि विज्ञान प्रयोगशाला, आगरा भेजा गया था। रिपोर्ट में विसरा के नमूनों में ऑर्गेनोक्लोरो कीटनाशक विष पाए जाने की पुष्टि हुई।
न्यायालय ने इसे स्पष्ट रूप से दहेज हत्या माना
यह रिपोर्ट निर्णायक साबित हुई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि शकीला की मृत्यु सामान्य परिस्थितियों में नहीं, बल्कि जहरीला पदार्थ खिलाए जाने से हुई थी। न्यायालय ने इसे स्पष्ट रूप से दहेज हत्या माना और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को पूर्णतः विश्वसनीय माना।
अभियोजन की सशक्त पैरवी से आरोप सिद्ध
मामले में अपर शासकीय अधिवक्ता महेंद्र विक्रम द्वारा प्रभावी और सशक्त पैरवी की गई। उनकी कड़ी मेहनत और तथ्यों की पुष्टि के कारण अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल रहा।
आजीवन कारावास, कठोर सजा और मुआवजे का आदेश
न्यायालय ने अपने फैसले में मुख्य अभियुक्त यूसुफ उर्फ रहीश को आजीवन कारावास एवं उसके रिश्तेदारों (पिता व बहन) के द्वारा क्रूरता के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास व अर्थदंड व दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत दो वर्ष का कठोर कारावास और जुर्माना लगाया है।
जुर्माने की आधी राशि पीड़िता के पिता को प्रतिकर
अदालत ने कहा कि अभियुक्तों पर लगाए गए कुल अर्थदंड (जुर्माने) की आधी राशि पीड़िता के पिता रसूल अहमद को प्रतिकर (मुआवजे) के रूप में दी जाए। यह कदम पीड़ित परिवार को आंशिक न्याय दिलाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है।

















