ये कैसा एकीकरण : सैकड़ों विद्यार्थियों के साथ यौन उत्पीड़न से दहला नीदरलैंड्स, क्या है शरणार्थी एकीकरण का सच
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ये कैसा एकीकरण : सैकड़ों विद्यार्थियों के साथ यौन उत्पीड़न से दहला नीदरलैंड्स, क्या है शरणार्थी एकीकरण का सच

नीदरलैंड्स में शरणार्थी-छात्र एकीकरण प्रयोग के भयावह परिणाम सामने आए हैं। यौन उत्पीड़न, बलात्कार और हिंसा के आरोपों ने पूरे मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Jan 21, 2026, 10:00 pm IST
in विश्व
प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

कथित शरणार्थियों के सांस्कृतिक एकीकरण के चलते नीदरलैंड्स में हड़कंप मचा हुआ है। 125 डच विद्यार्थी जिन्हें कथित एकीकरण के लिए प्रयोग टूल बनाया गया, और 125 शरणार्थियों के साथ इसलिए रखा गया था ताकि जो आप्रवासी हैं, वे नीदरलैंड्स के वातावरण को सही से समझ सकें और आसानी से घुलमिल सकें।

मगर इस प्रयोग का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ा है।

डेली मेल के अनुसार एम्स्टर्डम के वाटरग्राफस्मीर जिले में स्थित स्टेक ऊस्ट के विषय में नीदरलैंड को यह कहा गया था कि यह हाउसिंग और रेफ्यूजी संकट के लिए सबसे बड़ा और आदर्श हल है। और कहा गया कि 125 विद्यार्थी और 125 शरणार्थी एक साथ रहेंगे और उन्हें दोस्त होने के लिए कहा जाएगा, जिससे कि बाहर से आए लोग देश के लोगों के साथ सही से घुलमिल सकें।

परंतु अब जब जांच हो रही है तो भयानक तथ्य सामने आ रहे हैं। वहाँ पर लकड़ियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और साथ ही लड़कों के साथ हिंसा। डच जांच डाक्यूमेंट्री प्रोग्राम जेमबला में विद्यार्थियों ने यह बताया कि कैसे उन्हें कई यौन उत्पीड़नों, छेड़छाड़, हिंसा, पीछा करने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा था और यहाँ तक दावा किया कि एक सामूहिक बलात्कार भी हुआ था।

बलात्कार की शिकायत पर पुलिस ने कुछ नहीं किया

यह और भी स्तब्ध करने वाली बात है कि जहां एक तरफ लड़कियों के साथ हिंसा की घटनाएं हो रही थीं, तो वहीं पुलिस भी उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं थी। अमांडा नामक एक लड़की ने बताया कि कैसे उसे एक सीरिया के लड़के ने जाल में फँसाया और फिर उसके साथ बलात्कार किया।

अमान्डा ने बताया कि वह लड़का डच सीखना चाहता था, जिससे कि उसे शिक्षा मिल सके। और वह उसकी मदद करना चाहती थी।

लड़के ने उसे कई बार अपने कमरे पर बुलाया था, और लगातार बुलाने पर वह तैयार हो गई। मगर उसे जल्दी ही असहज लगने लगा और उसने वहाँ से जाने के लिए कहा। मगर फिर उसने उसे रोका और उसके साथ बलात्कार किया। अमान्डा ने पुलिस के पास वर्ष 2019 में रिपोर्ट भी दर्ज कराई, मगर चूंकि कोई सबूत नहीं था, तो पुलिस ने मामले को बंद कर दिया।

डेली मेल में लिखा है कि हालांकि अमान्डा का मामला बंद कर दिया गया, मगर स्टेक ऊस्ट में रहने वाली एक और महिला ने छ महीने बाद ही सीरिया के लोगों के विषय में कहा कि उसे और अन्य महिलाओं को खतरा है। परंतु व्यवस्था में लगे लोगों का कहना था कि वे सीरिया से आए हुए उस आदमी को नहीं हटा सकते हैं।

उसे वर्ष 2022 में अंतत: गिरफ्तार किया गया था, और उसके बाद वह उस स्टूडेंट-रेफ्यूजी परिसर से चला गया था। उसे बाद में अमान्डा और एक और अन्य महिला के साथ बलात्कार का दोषी पाया गया था, मगर उसे केवल और केवल तीन ही साल की सजा मिली थी।

जेमबला के साथ बातचीत में एक पीडिता के वकील ने कहा था कि चूंकि संदिग्ध व्यक्ति लगातार उसे परिसर में रहा था तो कई महिलाओं को अपने घरों में भी सुरक्षित अनुभव नहीं होता था। वहाँ पर काम करने वाली महिलाओं को घर पर भी ऐसा लगता था कि उनके साथ बलात्कार हो जाएगा। इसके साथ ही ड्रग्स का भी धंधा वहाँ होता था।

ऐसे लोगों को हटाना कठिन

इस रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से यह कहा गया है कि ऐसे लोगों का गलत और अस्वीकार्य व्यवहार आप देखते रहते हैं, और लोग डरते रहते हैं, परंतु कानूनी तौर पर उन्हें हटाना कठिन होता है। इस परिसर का संचालन करने वाली संस्था ने यह बताया था कि उसे संदेह है कि एक सामूहिक बलात्कार भी हुआ था। हालांकि पुलिस के अनुसार सामूहिक बलात्कार का कोई मामला उनके सामने नहीं आया था, परंतु यौन उत्पीड़न की सात शिकायतें आई थीं।

बहुधा सबूतों के अभाव में ऐसे मामलों पर कोई कदम नहीं उठाया जाता है।

कई अपराध परंतु परिसर बंद होगा 2028 में

वर्ष 2018 में यह परिसर आरंभ हुआ था। और उसके बाद से ही लगातार यौन उत्पीड़न, बलात्कार, हिंसा की शिकायतें आईं। महिलाओं को लगा कि वे सुरक्षित नहीं है और वर्ष 2022 में डच टीवी स्टेशन एटी5 ने यह रिपोर्ट किया था कि वर्ष 2018-21 के बीच एक शरणार्थी पर छ यौन हमलों के आरोप लगे थे, और वह स्थानीय अधिकारियों के साथ कानूनी कार्यवाही करने से भी पीछे नहीं हटा था, जो उसे उस परिसर से हटाने के लिए लड़ रहे थे।

परंतु इतनी घटनाओं के बाद भी इस परिसर को बंद नहीं किया जा सकता है क्योंकि अभी इसकी अनुबंध की अवधि समाप्त नहीं हुई है। वर्ष 2028 में जब उसके अनुबंध की अवधि समाप्त होगी, तभी यह बंद हो पाएगा। हालांकि इस परिसर में काम करने वाले लोग और विद्यार्थी अब यहाँ रहने और काम करने के कारण थक चुके हैं।

thesun के अनुसार जेमबला के साथ बातचीत में ऊस्ट जिला के चेयर कैरोलिन डे हीर ने कहा कि “फिर ये लोग कहाँ जाएंगे?”

इस घटना के बाद एक बार फिर से यह प्रश्न उभर कर आया है कि ये कैसा एकीकरण है जिसमें स्थानीय लड़कियां ही शिकार हो रही हैं?

Topics: Netherlands Refugee Integration NewsStudent Refugee Housing AbuseEurope Refugee Crisis RealityNetherlands Sexual Assault Caseयौन उत्पीड़ननीदरलैंड्सयूरोप न्यूजशरणार्थी संकटसांस्कृतिक एकीकरणछात्राएं असुरक्षित
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