नीदरलैंड्स में लूसड्रेक्ट ( Loosdrecht) शहर इन दिनों चर्चा में है। लोग सड़कों पर हैं। पुलिस धरपकड़ कर रही है। मगर फिर भी लोग डर नहीं रहे हैं, और लगातार विरोध कर रहे हैं।
क्या है मामला?
लगभग हर यूरोपीय देश की तरह नीदरलैंड्स में भी शरणार्थियों के लिए दरवाजे न केवल खोले गए, बल्कि उन्हें तमाम सुविधाएं भी दी जा रही हैं। उनके द्वारा किए गए अपराधों को भी सांस्कृतिक अंतर कहकर कम किया जा रहा है। अपराध का दंड भी कम है।
ऐसे में स्थानीय लोगों का रवैया इन शरणार्थियों के प्रति बहुत अधिक विनम्र नहीं रह जाता है और वे चाहते हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित रहें। ऐसा ही कुछ नीदरलैंड्स में हो रहा है। दरअसल लूसड्रेक्ट में सरकार ने Central Agency for the Reception of Asylum Seekers से प्राप्त अनुरोध पर विचार करते हुए शरणार्थियों के लिए स्थल बनाने का निर्णय लिया और वहां पर सौ से अधिक केवल शरणार्थी पुरुषों को रखने की योजना बनाई।
मगर इसे लेकर वहां के लोगों में गुस्सा भर गया और उन्होंने इसका विरोध करना आरंभ कर दिया। लोगों का कहना था कि इस शहर में ऐसी कोई भी व्यवस्था करने से पहले सरकार ने आम लोगों से पूछा क्यों नहीं? और सार्वजनिक सुरक्षा के मामलों को नजरअंदाज क्यों किया? लोगों ने इस स्थान पर निर्माण का ही विरोध करना आरंभ कर दिया। स्थानीय नागरिकों ने अप्रैल में ही कई रातों तक प्रदर्शन किया। विरोध करने वालों को यह डर था कि शरणार्थी शेल्टर में आपराधिक तत्व आकर्षित होंगे और इसके कारण पूरे लूसड्रेक्ट का माहौल खराब होगा। मगर उनकी बात नहीं सुनी गई। यह भी मीडिया में रिपोर्ट है कि जो शरणार्थी आएंगे उनकी उम्र 15-18 साल के बीच है और लगातार कई मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी उम्र के शरणार्थी कई अपराधों में लिप्त पाए गए हैं।
हालांकि कुछ रिपोर्ट यह भी हैं कि इस शेल्टर का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारी इस योजना के खिलाफ न्यायालय भी गए थे, मगर उन्हें वहां पर भी राहत नहीं मिली। न्यायालय से भी इस शेल्टर को बनाने के लिए हरी झंडी दे दी गई। आम लोग इस निर्णय के बाद और भी गुस्से में आ गए और उन्होंने अपना विरोध-प्रदर्शन तेज कर दिया। उनके विरोध-प्रदर्शन का कोई भी असर नहीं हुआ। मीडिया के अनुसार 8600 लोगों की आबादी वाले इस शहर में जहां पर यह शेल्टर बनाया जा रहा है, उस इमारत के बगल में लड़कियों का हॉकी क्लब स्थित है। जहां पहले इस जगह पर 110 युवा शरणार्थियों को बसाने की योजना थी, तो वहीं विरोध-प्रदर्शनों के बाद यह संख्या घटकर 70 कर दी गई थी। उनमें से 15 शरणार्थी आ चुके हैं और शेष शीघ्र ही आ जाएंगे। नवंबर 2026 तक इसे पूरा भरने की योजना है।
12 मई को अचानक से आग लगी
हालांकि इसे भरने की योजना बन गई थी और सरकार और न्यायपालिका ने भी इस योजना को मंजूरी दे दी, लेकिन आम लोग अभी भी इसका विरोध कर रहे हैं और इन्हीं विरोध प्रदर्शनों के दौरान म्यूनिसिपल ऑफिस के पास अचानक से ही आग लग गई। इस इमारत में पंद्रह शरणार्थी उसी सुबह से वहीं रुके हुए थे। लोगों का कहना है कि उन शरणार्थियों ने लोगों को भड़काया और गला काटने जैसे संकेत किये थे। देखते ही देखते आग इमारत में फैल गई। पुलिस का कहना है कि आंदोलनकारियों ने यह आग लगाई है। इसे लेकर दो किशोरों सहित एक युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
डेप्युटी प्राइम मिनिस्टर ने स्थानीय प्राधिकरणों से मदद मांगी
अप्रैल में क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक अपील (CDA) के डच डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और असाइलम और माइग्रेशन मिनिस्टर बार्ट वैन डेन ब्रिंक ने आगाह किया था कि देश में माइग्रेंट्स को रखने के लिए लगभग 4,500 जगहों की कमी है। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से मदद करने को कहा। विज्डेमेरेन के मेयर, विरोधी पीपल्स पार्टी फॉर फ़्रीडम एंड डेमोक्रेसी (VVD) के मार्क वेरहेइजेन ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया था।
जब ये विरोध प्रदर्शन आरंभ हुए तो प्रदर्शनकारियों पर वेरहेइजेन ने यह आरोप लगाया कि ये लोग फ्री सोसाइटी का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना था कि जो लोग विरोध कर रहे हैं, उनमें स्थानीय लोग नहीं है बल्कि दक्षिणपंथी लोगों के समर्थक और राष्ट्रवादी लोग हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन से डरकर नहीं बल्कि अपने मन से ही शरणार्थियों की संख्या को कम करने का निर्णय लिया है।
विरोध प्रदर्शन एक नहीं कई जगहों पर
ऐसा नहीं है कि विरोध प्रदर्शन एक ही शहर में हो रहे हैं। शरणार्थियों को लेकर आम लोगों का मन कुछ और है और सरकार का कुछ और। हालांकि सरकार प्रदर्शनकारियों को दक्षिणपंथी कहकर चुप कराना चाहती है। मगर मीडिया के अनुसार 6 मई को प्रदर्शनकारियों ने डेन बॉश के पास एक इंडस्ट्रियल एस्टेट में, युवा शरणार्थियों के लिए प्रस्तावित एक केंद्र की जगह के नजदीक, A59 मोटरवे को आधे घंटे के लिए ब्लॉक कर दिया था। ऐसे अन्य स्थानों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। गेरार्ड जोलिंग नामक डच गायक ने तो ऐसी स्थितियों को देखते हुए यह कहा है कि अगले साल देश में हम गृह युद्ध देखेंगे।

















