पाशविकता ही मानसिकता
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पाशविकता ही मानसिकता

‘काफिरों’ के प्रति कट्टर इस्लामी मानसिकता का जीता-जागता उदाहरण जम्मू-कश्मीर है। 1990 में कश्मीर घाटी में मस्जिदों से लाउडस्पीकरों पर कश्मीरी हिंदुओं को धमकाने के लिए ‘रलीव (इस्लाम कबूलो), सलीव (भाग जाओ), गलीव (मारे जाओ)’, ‘असि गच्ची पाकिस्तान, बतने रोअस ते बतानेव सान’ (हम पाकिस्तान बनाएंगे, हिंदू औरतें ले लेंगे, मर्दों के बिना) जैसे जिहादी नारे लगे।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jan 19, 2026, 09:51 am IST
inविश्व, विश्लेषण

भारत

कश्मीर घाटी में 1990 के दौरान हिंदू-सिख महिलाओं के साथ बलात्कार और बर्बरता की कई भयावह घटनाएं दर्ज हैं। 25 जून, 1990 को कट्टरपंथियों ने 22 वर्षीया गिरजा टिक्कू का अपहरण कर सामूहिक बलात्कार किया और आरा मशीन से चीर दिया। घरों में घुसकर महिलाओं पर हमले, लूटपाट के साथ बलात्कार आम थे। इस अवधि में लगभग 4 लाख कश्मीरी हिंदुओं ने घाटी से पलायन किया।

पाकिस्तान

अल्पसंख्यक हिंदू, सिख व ईसाई लड़कियों के यौन उत्पीड़न, अपहरण और जबरन कन्वर्जन के मामले गंभीर समस्या बने हुए हैं। 2025 की रिपोर्ट के अनुसार हर साल 12-25 वर्ष की 1,000 से 2,000 लड़कियां कट्टरपंथियों की शिकार बनती हैं।

बांग्लादेश

मई 2024 से जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच हिंदू महिलाओं के यौन उत्पीड़न व बलात्कार के मामले तेजी से बढ़े। 2025-26 में 50 से अधिक घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 2020-26 के बीच 100 से 200 महिलाएं कट्टरपंथियों के निशाने पर रहीं, पर वास्तविक संख्या अधिक होने का अनुमान है। जनवरी 2026 में झेनाइदाह जिले में कट्टरपंथियों ने एक हिंदू विधवा से गैंगरेप किया, पेड़ से बांधकर पीटा और बाल काट दिए।

अफगानिस्तान

तालिबान शासन (2021 से अब तक) में हिंदू-सिख महिलाओं के यौन उत्पीड़न व बलात्कार के मामले सीमित रूप से रिपोर्ट होते रहे हैं। 2019-2021 के हमलों में कंधार, जलालाबाद जैसे इलाकों में हिंदू- सिख महिलाओं को निशाना बनाया गया। वहां अल्पसंख्यकों की संख्या 1,350 से कम रह गई है।

दागदार पादरी, चर्च की चुप्पी

चर्चों, विशेष रूप से कैथोलिक चर्च में लड़कियों और बच्चों के यौन शोषण के मामले वैश्विक स्तर पर गंभीर समस्या हैं। चर्च पीड़ितों की बजाय खुद को बचाने को प्राथमिकता देता है। हालांकि, पोप फ्रांसिस ने माफी मांगी थी, लेकिन चर्च की उदासीनता पर सवाल बने हुए हैं।

  • फ्रांस : एक रिपोर्ट के अनुसार कैथोलिक चर्चों में 1950 से 2020 के बीच 10 से 13 वर्ष के लगभग 3.30 लाख बच्चों का यौन शोषण हुआ, जिनमें 20 प्रतिशत लड़कियां थीं। 3,000 आरोपियों में से दो तिहाई पादरी थे।
  • पुर्तगाल : 1950 से फरवरी 2023 तक कैथोलिक चर्च में बाल यौन शोषण के 512 मामले आए, वास्तविक आंकड़ा 4,800 होने का अनुमान था। पीड़ितों में 47 प्रतिशत महिलाएं थीं, जबकि 77 प्रतिशत आरोपी पादरी थे। 77 प्रतिशत पीड़ितों ने दुर्व्यवहार की सूचना नहीं दी।
  • स्पेन : 1940 से 2023 तक रोमन कैथोलिक पादरियों ने 2 लाख से अधिक बच्चों का यौन शोषण किया।
  • इटली : 2025 की रिपोर्ट में 4,625 पीड़ितों का उल्लेख है, जिनमें से 4,451 नाबालिग थे। ज्यादातर 10-14 साल के लड़के थे, लेकिन लड़कियां भी प्रभावित। 1,106 पादरी आरोपी सूची में थे।
  • जर्मनी : एक अध्ययन में 1946 और 2014 के बीच चर्च में याैन दुर्व्यवहार के 3,677 मामले पाए गए।
  • आयरलैंड: कैथोलिक चर्च द्वारा संचालित किशोर सुविधाओं में याैन के शिकार लोगों के लिए सरकारी योजना के तहत 14,500 से अधिक लोगों को मुआवजा मिला।
  • ऑस्ट्रेलिया : 1950 से 2010 के दौरान 7 प्रतिशत कैथोलिक पादरियों पर बच्चों का यौन शोषण करने के आरोप लगे।
  • भारत : केरल स्थित मलंकारा ऑर्थोडॉक्स चर्च से यौन शोषण के सर्वाधिक मामले आए हैं। 2018 में एक महिला कब्राल ने 4 पादरियों पर कन्फेशन के दौरान उसके 16 वर्ष की उम्र से शोषण करने का आरोप लगाया था। केरल की सिस्टर लूसिया ने पादरी फ्रैंको मुलक्कल पर बलात्कार का आरोप लगाया। गत वर्ष झारखंड के चर्च अनाथालय में 15 नाबालिग लड़कियों से बलात्कार हुआ।
Topics: धर्म परिवर्तनपाञ्चजन्य विशेषकट्टरपंथपाशविकतापशुवत व्यवहारशारीरिक या मानसिकसंस्थागत शोषणजिहादी नारेकन्वर्जनधार्मिक युद्ध या उग्रवादपलायनधार्मिक कट्टरवादयौन उत्पीड़न
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