जामिया मिलिया इस्लामिया कन्वर्जन, हिंदुओं, वंचितों और जनजातियों के साथ भेदभाव के गंभीर आरोपों के कारण विवादों में रहा है। एक बार फिर विवादों के घेरे में है। यूनिवर्सिटी के पॉलिटेक्निक विभाग में काम करने वाले जनजातीय समुदाय के क्लर्क राम फूल मीणा ने एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रियाजुद्दीन पर मारपीट और जातिसूचक गालियां देने का आरोप लगाया है। मीडिया में खबर आई थी कि कन्वर्जन का भी आरोप है, लेकिन पुलिस ने कन्वर्जन की बात से इंकार किया है।
राम फूल मीणा का आरोप है कि एक छात्रा से बदसलूकी का वीडियो वायरल होने के बाद प्रोफेसर ने उसे निशाना बनाया। प्रोफेसर ने उसको लात-घूंसों से पीटा और उसके लिए काफिर, ह.., जंगली, सा.. जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। इससे भी जब उसका मन नहीं भरा तो उसने मां-बहन की गालियां दीं। सोशल मीडिया पर प्रोफेसर डॉ रियाजुद्दीन का मारपीट वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं, पीड़ित कर्मचारी के शिकायत करने के बाद भी प्रशासन ने प्रोफेसर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं, बल्कि उसका ही तबादला कर दिया।
Dr. Riyazuddin, Asst. Professor at Jamia Polytechnic, assaulted tribal man Ram Phool Meena, abusing him as “Meena Kamina, Kaffir” and “Adivasi jangli” for complaining against him.
He thrashed him brutally, breaking his mouth.pic.twitter.com/zejf7gaCAS
— Rishi Bagree (@rishibagree) January 20, 2026
कहां से शुरू हुआ विवाद?
राम फूल मीणा जनजातीय समुदाय से हैं। उनके द्वारा 17 जनवरी, 2026 को एक डिटेल लिखित शिकायत असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP), सरिता विहार-सुखदेव विहार को दी गई। मीणा जामिया मिलिया इस्लामिया के यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक में अपर डिवीजन क्लर्क (UDC) के तौर पर कार्यरत हैं, जो सेंट्रल यूनिवर्सिटी की एक यूनिट के तौर पर काम करता है। शिकायत में आरोपी का नाम डॉ. रियाजुद्दीन है, जो यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर है।
मीणा ने अपनी शिकायत में लिखा कि हमला अकेले में नहीं हुआ था और न ही वह फैकल्टी मेंबर के खिलाफ शिकायत करने वाला था। क्लर्क मीणा के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर डॉ. रियाज़ुद्दीन के खिलाफ रजिस्ट्रार के ऑफिस में शिकायत दर्ज कराई गई। मीणा का कहना है कि इसमें उसका सीधा हाथ नहीं था। हालांकि, जब इस मामले से जुड़ा एक वीडियो वायरल हुआ, तो शक के आधार पर उन्हें निशाना बनाया गया।
‘मुस्लिमों के संस्थान में रहकर शिकायत करने की हिम्मत कैसे हुई’
शिकायत के अनुसार, पहली घटना 13 जनवरी, 2026 को दोपहर लगभग 3:00 बजे हुई थी। मीणा ने बताया, “वह यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक ऑफिस में अपनी डेस्क पर काम कर रहा था, तभी डॉ रियाजुद्दीन (एसोसिएट प्रोफेसर सिविल इंजीनियरिंग विभाग, यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक) मेरे केबिन में आए और बिना किसी कारण, अचानक मुझे जाति सूचक भद्दे कमेंट्स किए। वह मुझे, ‘अरे ओ मीणा कमीना’ कहकर बुलाने लगे। इस पर जब मैंने ऐतराज जताया और तमीज से बात करने को बोला, तब उन्होंने गुस्से में मां-बहन की गालियां देना शुरू कर दिया।
पीड़ित ने आगे कहा कि मैंने इस घटना की लिखित शिकायत जामिया के कुलसचिव को त्वरित उसी दिन कर दी। लेकिन दुख की बात यह है कि दो दिनों तक मेरी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और इस शिकायत की जानकारी डॉ रियाजुद्दीन को रजिस्ट्रार ऑफिस के किसी सूत्र से मिल गई।” उन्होंने आगे बताया, “इसके बाद 16 जनवरी 2026 की शाम को लगभग 5 बजे रियाजुद्दीन मेरे ऑफिस में आकर फिर से मुझे भद्दी-भद्दी जाति सूचक गालियां देते हुए कहता है, “अरे हरामी मीणा तुम्हारी औकात कैसे हुई कि तुमने मेरे खिलाफ शिकायत किया? साले, आदिवासी, जंगली होकर के मुसलमानों के संस्थान में रहकर मेरे खिलाफ कंप्लेन करने की जुर्रत कैसे की?”
बार-बार काफिर कहकर अपमानित किया
प्रोफेसर ने मीणा को कई लात-घूंसे मारे, जिससे उनके चेहरे पर सूजन आ गई और होंठ से खून निकलने लगा। मीणा ने यह भी आरोप लगाया कि उन पर लंबे समय से कन्वर्जन का दबाव बनाया जा रहा था और उन्हें बार-बार ‘काफिर’ कहकर अपमानित किया जाता था।
प्रोफेसर पर कार्रवाई के बदले मिला ट्रांसफर
इस मामले में जामिया प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। दरअसल, मारपीट के बाद जब मीणा अपने प्रिंसिपल के साथ रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंचे, तो उन्हें भरोसा दिया गया कि आरोपी पर कार्रवाई होगी, लेकिन उसी शाम उनका तबादला कर दिया गया। क्लर्क मीणा ने इसे सजा के तौर पर किया गया तबादला बताया है। अब उन्होंने दिल्ली पुलिस से एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
















