आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने तकनीक के इस्तेमाल को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में युवा उद्यमियों से बातचीत करते हुए कहा कि तकनीक से बचा नहीं जा सकता और अपने आप में यह बुरी नहीं है, लेकिन इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि उस पर हमारी निर्भरता इतनी न बढ़ जाए कि वही हमें कंट्रोल करने लगे।
तकनीक समाज के भले के लिए हो
भागवत ने साफ कहा कि प्रौद्योगिकी का उपयोग समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए, लोगों को इसका गुलाम नहीं बनना चाहिए। उनका कहना था कि आज के समय में टेक्नोलॉजी हर जगह है, लेकिन इसे सही दिशा में लगाना जरूरी है। अगर हम टेक्नोलॉजी के पीछे-पीछे चलने लगें और वो हमें कंट्रोल करने लगे, तो ये ठीक नहीं। बल्कि इंसान को टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके समाज की भलाई करनी चाहिए।
स्वदेशी का मतलब टेक्नोलॉजी से दूर भागना नहीं
उन्होंने युवा उद्यमियों को समझाया कि स्वदेशी अपनाने का मतलब ये नहीं कि हम नई तकनीक को ठुकरा दें। स्वदेशी का असली मतलब है अपनी जड़ों से जुड़े रहना और साथ ही अच्छी टेक्नोलॉजी को अपनाना, लेकिन उसे समाज के हित में इस्तेमाल करना। भागवत ने कहा कि बिजनेस सिर्फ कमाई के लिए नहीं होता, बल्कि समाज की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। प्रॉफिट के साथ-साथ सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
युवाओं से अपील और संदेश
यह कार्यक्रम युवा उद्यमियों के साथ संवाद का था, जहां भागवत ने उन्हें प्रेरित किया कि टेक्नोलॉजी से बचा नहीं जा सकता, लेकिन उसका दास भी नहीं बनना है। उन्होंने जोर दिया कि टेक्नोलॉजी इंसान की सेवा में होनी चाहिए, न कि इंसान उसकी सेवा में। उदाहरण के तौर पर वो कहते हैं कि कई बार लोग फोन या सोशल मीडिया के आदी हो जाते हैं, लेकिन असल में ये टूल्स हैं जो हमें मजबूत बनाने के लिए हैं, कमजोर नहीं।
सरसंघचालक जी का पूरा फोकस इस बात पर रहा कि आधुनिक युग में टेक्नोलॉजी को सकारात्मक तरीके से अपनाएं, ताकि समाज आगे बढ़े और इंसानियत बनी रहे। उन्होंने युवाओं से कहा कि अपना बिजनेस या स्टार्टअप शुरू करते वक्त समाज की जरूरतों को प्राथमिकता दें, तभी असली विकास होगा।
















