ED बनाम बंगाल सरकार केस : ममता सरकार पर SC का सख्त रुख, कहा- हम चाहते तो 10 मिनट में ही दे देते आदेश...
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ED बनाम बंगाल सरकार केस : ममता सरकार पर SC का सख्त रुख, कहा- हम चाहते तो 10 मिनट में ही दे देते आदेश…

ED बनाम पश्चिम बंगाल सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, FIR पर रोक, ममता बनर्जी को नोटिस, तुषार मेहता ने लगाए गंभीर आरोप।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jan 18, 2026, 05:14 pm IST
inभारत, दिल्ली, पश्चिम बंगाल
Suprime Court

Suprime Court

प्रवर्तन निदेशालय बनाम पश्चिम बंगाल सरकार से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में माहौल उस वक्त काफी तीखा हो गया, जब न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने साफ शब्दों में कहा कि अदालत चाहती तो “10 मिनट में ही आदेश पारित कर सकती थी”, लेकिन चूंकि मामला गंभीर है और व्यापक बहस हुई है, इसलिए हर बात को रिकॉर्ड पर लाना जरूरी है।

बता दें कि अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई जब वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक न लगाने की दलील दी।

सिंघवी की दलील पर कोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया

सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से आग्रह किया कि या तो FIR पर रोक न लगाई जाए या फिर जांच बिना किसी दबाव के आगे बढ़े। इसी पर न्यायमूर्ति मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यह कोई साधारण मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में हर सुनवाई सार्वजनिक होती है और ऐसे में संवैधानिक संतुलन से जुड़े मामलों में जल्दबाजी ठीक नहीं।

कोर्ट का रुख साफ था कि केंद्रीय एजेंसियों की स्वतंत्रता और संघीय ढांचे से जुड़े हर पहलू को विधिवत दर्ज किया जाना चाहिए।

केंद्रीय एजेंसियों के काम में हस्तक्षेप पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि यह गंभीर विषय है कि राज्य पुलिस किसी वैधानिक केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई में हस्तक्षेप कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान हर संस्था को स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार देता है और राज्य पुलिस को यह छूट नहीं दी जा सकती कि वह ED जैसी एजेंसियों के काम में बाधा डाले।

कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्रीय एजेंसियां किसी राजनीतिक दल के चुनावी कार्यक्रम में हस्तक्षेप नहीं करतीं, लेकिन गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करना उनका वैधानिक अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट के अहम निर्देश और आदेश

सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR पर रोक रहेगी। इसके साथ ही तलाशी के दौरान परिसर के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अंतिम फैसले तक ED अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।

वहीं इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पुलिस कमिश्नर और DGP को नोटिस जारी किया गया है। अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी।

तुषार मेहता के गंभीर आरोप : “यह सरासर चोरी है”

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बंगाल सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला “सरासर चोरी” जैसा है। मेहता का आरोप था कि पुलिस, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर, सबूत हटाने और नष्ट करने आई थी।

उन्होंने दावा किया कि कथित तौर पर फाइलें अपने कब्जे में ली गईं और एक ED अधिकारी का फोन जब्त किया गया। मेहता ने चेतावनी दी कि अगर ऐसे मामलों में कड़ा उदाहरण नहीं बना, तो इससे केंद्रीय एजेंसियों का मनोबल गिरेगा और राज्य सरकारें मनमानी करने लगेंगी।

जस्टिस मिश्रा का सवाल और संवैधानिक संकेत

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मिश्रा ने सवाल किया कि क्या ऐसे मामलों में अधिकारियों को निलंबित कर देना चाहिए। इस पर तुषार मेहता ने जवाब दिया कि सक्षम प्राधिकरण को कार्रवाई का निर्देश दिया जाए और उन्होंने PMLA की धारा 54 का हवाला भी दिया।

कोर्ट ने अंत में यह स्पष्ट कर दिया कि यह मामला केवल एक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि संघीय ढांचा, कानून का शासन और केंद्रीय एजेंसियों की स्वायत्तता से जुड़ा हुआ है।

इसी वजह से अदालत ने जल्दबाजी के बजाय पूरी बहस को रिकॉर्ड पर लाना जरूरी समझा।

Topics: पश्चिम बंगाल सरकारममता बनर्जीप्रवर्तन निदेशालयतुषार मेहताअभिषेक मनु सिंघवीसंघीय ढांचासुप्रीम कोर्ट
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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