Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या का महत्व और लाभ
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Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या का महत्व और लाभ

मौनी अमावस्या 18 जनवरी की रात 12:03 बजे से शुरू होकर 19 जनवरी की रात 1:21 बजे तक रहेगी। यह समय साधना, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए बहुत शुभ माना गया है।

Written byMahak SinghMahak Singh
Jan 16, 2026, 07:20 am IST
inधर्म-संस्कृति
Mauni Amavasya 2026 (इमेज सोर्स: AI-Generated)

Mauni Amavasya 2026 (इमेज सोर्स: AI-Generated)

सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष स्थान माना गया है। यह दिन मौन, संयम और आत्मशुद्धि से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत रखने से व्यक्ति अपने मन, वाणी और कर्म को शुद्ध कर सकता है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी की रात 12:03 बजे से शुरू होकर 19 जनवरी की रात 1:21 बजे तक रहेगी। यह समय साधना, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए बहुत शुभ माना गया है।

मौनी अमावस्या का सबसे बड़ा महत्व मौन व्रत से जुड़ा हुआ है। मौन व्रत का अर्थ केवल बोलना बंद करना नहीं है, बल्कि मन को भी शांत रखना होता है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि वाणी से निकले शब्द बहुत शक्तिशाली होते हैं। गलत या कठोर वाणी से व्यक्ति अपने लिए और दूसरों के लिए भी दुख पैदा कर लेता है। ऐसे में जब साधक मौन धारण करता है, तो वह अनावश्यक बोलने से बचता है और धीरे-धीरे उसका मन भी शांत होने लगता है। अमावस्या तिथि को आत्मचिंतन का समय माना गया है। यह दिन हमें बाहर की दुनिया से हटकर अपने भीतर झांकने का अवसर देता है। मौनी अमावस्या पर मौन रखने से व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार को समझ पाता है। यही कारण है कि ऋषि-मुनि इस दिन मौन साधना को बहुत महत्वपूर्ण मानते थे। उनका मानना था कि मौन से आत्मा की आवाज़ साफ सुनाई देती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान, दान-पुण्य और पितृ तर्पण का भी विशेष महत्व होता है। यदि इन कार्यों के साथ मौन व्रत किया जाए, तो उसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे मन के विकार शांत होते हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है। मौन व्रत साधक को धैर्य और आत्मसंयम सिखाता है। मौन व्रत का एक बड़ा लाभ यह है कि इससे मन की चंचलता कम होती है। हम रोजमर्रा की ज़िंदगी में बहुत अधिक बोलते हैं, सोचते हैं और भागते रहते हैं। इससे मन थक जाता है। मौनी अमावस्या पर जब हम मौन रखते हैं, तो मन को आराम मिलता है। ध्यान और जप में मन अधिक आसानी से लगने लगता है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होती है।

यह भी पढ़ें- Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या कब है, जानिए पूजा विधि और स्नान-दान के नियम

मौनी अमावस्या का मौन व्रत केवल धार्मिक कर्म नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित बनाने का एक सरल उपाय भी है। आज के समय में तनाव, क्रोध और नकारात्मक सोच बहुत आम हो गई है। मौन व्रत हमें इन सबसे दूर रहने की प्रेरणा देता है। जब हम कम बोलते हैं, तो विवाद भी कम होते हैं। इससे पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में भी मधुरता आती है। मौन रखने से व्यक्ति सुनना सीखता है। जब हम दूसरों की बात ध्यान से सुनते हैं, तो हमारे निर्णय अधिक समझदारी भरे होते हैं। मौनी अमावस्या का मौन व्रत हमें धैर्य सिखाता है और जल्दबाजी से बचाता है। इससे जीवन में स्थिरता और संतुलन आता है।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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