Mauni Amavasya 2026: साधु क्यों रखते हैं मौन व्रत? जानें महत्व और नियम
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Mauni Amavasya 2026: साधु क्यों रखते हैं मौन व्रत? जानें महत्व और नियम

मौनी अमावस्या के दिन अधिकतर लोग मौन व्रत रखते हैं। मौन व्रत का अर्थ केवल बोलना बंद करना नहीं है, बल्कि अपने मन और विचारों को भी नियंत्रित करना है।

Written byMahak SinghMahak Singh
Jan 16, 2026, 05:05 pm IST
in धर्म-संस्कृति
मौनी अमावस्या पर साधु मौन क्यों रहते हैं? (Image AI Generated)

मौनी अमावस्या पर साधु मौन क्यों रहते हैं? (Image AI Generated)

वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 फरवरी को मनाई जाएगी। यह दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत खास होता है। इस दिन बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और मौन व्रत का पालन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या की सभी तिथियों में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया स्नान, दान और तप कई गुना फल देता है। खास तौर पर माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन संगम जैसे पवित्र स्थानों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है।

मौन व्रत का महत्व- मौनी अमावस्या के दिन अधिकतर लोग मौन व्रत रखते हैं। मौन व्रत का अर्थ केवल बोलना बंद करना नहीं है, बल्कि अपने मन और विचारों को भी नियंत्रित करना है। जब व्यक्ति बोलता नहीं है, तो उसकी ऊर्जा बाहर जाने के बजाय अंदर की ओर जाती है। इससे मन शांत होता है और आत्मिक शक्ति बढ़ती है। साधु-संत इस दिन मौन व्रत इसलिए रखते हैं ताकि वे गहरी साधना कर सकें। मौन रहने से मन भटकता नहीं है और ध्यान आसानी से लगता है। इससे आत्मा और परमात्मा के बीच संबंध मजबूत होता है। धार्मिक गुरुओं का मानना है कि मौन की अवस्था व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और खुद को समझने का अवसर देती है।

यह भी पढ़ें- Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या कब है, जानिए पूजा विधि और स्नान-दान के नियम

आज के समय में कई लोग मौन को सजा या किसी तरह का त्याग समझते हैं। लेकिन वास्तव में मौन एक संयम है। मौनी अमावस्या का उद्देश्य बोलने से रोकना नहीं, बल्कि चेतना को एकाग्र करना है। जब हम कम बोलते हैं, तो बेकार के विचार भी कम आते हैं। इससे मन हल्का और शांत महसूस करता है। मौन व्रत के दौरान व्यक्ति अपने शब्दों के साथ-साथ अपने विचारों पर भी नियंत्रण करता है। यही कारण है कि यह व्रत मानसिक शांति के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है।

चंद्रमा और मन का संबंध- हिंदू वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है। अमावस्या के दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता, जिससे मन अस्थिर और अशांत हो सकता है। ऐसे समय में मौन व्रत रखने से मन पर नियंत्रण बना रहता है। मौन से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार कम होते हैं। जब मन शांत होता है, तभी ईश्वर का ध्यान सही ढंग से किया जा सकता है। इसलिए मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत और ध्यान को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन किया गया पुण्य कर्म व्यक्ति के जीवन के पापों को कम करता है। मौन व्रत से मन और वाणी दोनों शुद्ध होते हैं, जिससे आत्मा को शांति मिलती है। मौनी अमावस्या के दिन व्रत रखने के लिए कुछ सरल नियम बताए गए हैं-

यह भी पढ़ें- Amavasya 2026 List: 2026 में कब-कब है अमावस्या? देखें पूरी लिस्ट

ब्रह्म मुहूर्त में सुबह उठकर पवित्र नदी या घर पर ही स्नान करें। स्नान के बाद मौन व्रत का संकल्प लें। देवी-देवताओं की विधिवत पूजा और ध्यान करें। पूरे दिन किसी से भी बात न करें और मोबाइल या अन्य साधनों से भी दूरी बनाए रखें। व्रत के दौरान मन में गलत या नकारात्मक विचार न आने दें। अमावस्या तिथि समाप्त होने के बाद ही मौन व्रत खोलें।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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