जयपुर में पहली बार भारतीय सेना दिवस: राष्ट्र गौरव का ऐतिहासिक उत्सव
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होम भारत

जयपुर में पहली बार भारतीय सेना दिवस: राष्ट्र गौरव का ऐतिहासिक उत्सव

भारतीय सेना केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की जीवंत प्रतीक है। देश की सीमाओं की रक्षा से लेकर आपदा प्रबंधन, शांति स्थापना और राष्ट्र निर्माण तक भारतीय सेना की भूमिका बहुआयामी और गौरवपूर्ण रही है।

Written byवासुदेव देवनानीवासुदेव देवनानी — edited by Mahak Singh
Jan 14, 2026, 01:33 pm IST
in भारत

भारतीय सेना के अदम्य साहस, अनुशासन और बलिदान को सम्मान देने के लिए हर वर्ष 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस मनाया जाता है। यह दिवस इस वर्ष राजस्थान की राजधानी जयपुर में पहली बार आयोजित हो हों रहा है। यह भव्य और आकर्षक आयोजन राजस्थान के लिए ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनने वाला है। 15 जनवरी 1949 भारतीय सैन्य इतिहास की एक महत्वपूर्ण तिथि है। इसी दिन लेफ्टिनेंट जनरल के. एम. करियप्पा ने स्वतंत्र भारत के पहले सेनाध्यक्ष (कमांडर-इन-चीफ) के रूप में पदभार संभाला था। इस घटना ने भारतीय सेना को औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्त कर स्वदेशी नेतृत्व और आत्मनिर्भर सैन्य परंपरा की नींव रखी थी । तभी से 15 जनवरी को सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि सैनिकों के त्याग, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम को सम्मान दिया जा सके।

भारतीय सेना केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की जीवंत प्रतीक है। देश की सीमाओं की रक्षा से लेकर आपदा प्रबंधन, शांति स्थापना और राष्ट्र निर्माण तक भारतीय सेना की भूमिका बहुआयामी और गौरवपूर्ण रही है। भारत का इतिहास शौर्य, बलिदान और राष्ट्ररक्षा की अद्वितीय गाथाओं से भरा हुआ है। ऐसे अनेक युद्ध और सैन्य संघर्ष रहे हैं जिन पर प्रत्येक भारतीय को गर्व है।भारत ने अपने इतिहास में हमेशा “वसुदेव कुटुम्बकम”, शांति और अहिंसा की नीति अपनाई और कभी आक्रमण की नीति नहीं अपनाई, लेकिन जब भी देश की संप्रभुता, सम्मान और सुरक्षा पर संकट आया, तब भारतीय सेनाओं ने अदम्य साहस, रणनीति और बलिदान से विजय प्राप्त की।इन युद्धों और सामरिक अभियानों पर प्रत्येक भारतीय को गर्व है। भारत के वे युद्ध जिन पर हमें गौरव है उनमें 1857 का आंदोलन ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारत का पहला संगठित जनविद्रोह था। रानी लक्ष्मी बाई, मंगल पांडे, तात्या टोपे, बहादुर शाह जफर जैसे वीरों ने देश में स्वतंत्रता की लौ जलाई,यद्यपि यह संघर्ष सफल नहीं हुआ, पर इसने भारत की आज़ादी की नींव रखी।

भारत की सैन्य वीरता और साहस की यात्रा

स्वतंत्रता के तुरंत बाद पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला किया।भारतीय सेना ने अद्भुत साहस दिखाते हुए श्रीनगर की रक्षा की और कश्मीर का बड़ा हिस्सा सुरक्षित रखा।यहीं से भारतीय सेना की पेशेवर क्षमता का विश्व को परिचय मिला।1962 में परिस्थितियाँ कठिन थीं, संसाधन सीमित थे, फिर भी भारतीय सैनिकों ने चीन के विरुद्ध हिमालय की ऊँचाइयों पर अदम्य साहस दिखाया।रेजांग ला जैसी लड़ाइयाँ आज भी बलिदान की मिसाल हैं।1965 में भारत–पाक के मध्य हुए युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के आक्रमण को पूरी ताकत से रोका।लाहौर मोर्चा, असल उत्तर और फिल्लौरा की लड़ाइयों में भारतीय सेना ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। 1971 का भारत-पाक (बांग्लादेश मुक्ति युद्ध)*युद्ध को भारत की सबसे बड़ी सैन्य विजय मानी जाती है। केवल 13 दिनों में पाकिस्तान की सेना ने आत्मसमर्पण किया और एक नए देश के रूप में बांग्लादेश का जन्म हुआ।भारतीय सेना के समक्ष 90,000 से अधिक पाक सैनिकों का समर्पण विश्व इतिहास में अद्वितीय है।

इसी प्रकार 1999 का कारगिल युद्ध पाकिस्तानी घुसपैठियों को हिमालय की चौटियों और ऊँचाई वाले इलाकों से खदेड़ना अत्यंत कठिन था।कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज पांडे, ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव जैसे वीरों ने सर्वोच्च बलिदान दिया तथा भारत ने कारगिल की सभी चोटियों पर पुनः तिरंगा फहराया।कश्मीर में हुए उरी हमले के बाद भारतीय सेना ने सीमा पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक (2016) कर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया।यह भारत की नई सुरक्षा नीति और साहसिक निर्णय क्षमता का प्रतीक बना। इसके अलावा पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने बालाकोट एयर स्ट्राइक (2019) कर पाकिस्तान के अंदर घुसकर आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों को ध्वस्त किया।इस कार्रवाई ने दुनिया को भारत की सैन्य और रणनीतिक क्षमता का स्पष्ट संदेश दिया।

भारत की सैन्य परंपरा केवल वीर सैनिकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि हमारे कई महान सेनाध्यक्षों ने देश की सेनाओं का नेतृत्व किया जिनकी रणनीति, साहस और राष्ट्रनिष्ठा पर भारत को गर्व है। भारत के प्रमुख थल सेनाध्यक्ष में *जनरल के. एम. करियप्पा*भारत के पहले सेनाध्यक्ष (1949)आज भी सेना के आदर्श है। इनके साथ ही जनरल के. सुंदरजी,फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ *,*जनरल वी. एन. शर्मा,जनरल दीपक कपूर,जनरल बिपिन रावत आदि के नाम प्रमुख है। इनके अलावा भारतीय वायुसेना के गौरवशाली प्रमुख एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह*तथा *भारतीय नौसेना के गौरव*एडमिरल आर. डी. कटारी*आदि के नाम भी विशेष उल्लेखनीय रहे है ।भारत के इन यशस्वी सेनाध्यक्षों ने केवल युद्ध नहीं लड़े, बल्कि भारतीय सेना को दिशा नई दी,राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया और भारत के आत्मसम्मान को विश्व मंच पर ऊँचा किया। इनका कुशल नेतृत्व, त्याग और दूरदृष्टि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर रक्षा प्रयास

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक परिवर्तन देखा है। “आत्मनिर्भर भारत” की परिकल्पना के तहत उनके नेतृत्व में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना को स्वदेशी, आधुनिक और सक्षम बनाने के लिए अनेक उल्लेखनीय और दूरगामी प्रयास किए गए हैं। श्री नरेन्द्र मोदी के 2014 में प्रधानमन्त्री बनने के बाद रक्षा उत्पादन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया। भारत सरकार ने स्पष्ट लक्ष्य रखा कि हमें हथियार आयातक के स्थान पर हथियार निर्माता बनना है। उनके इसी विजन ने भारत के रक्षा क्षेत्र को “मेक इन इंडिया” का अहम स्तंभ बनाया है ।देश में पहली बार 5 से अधिक निगेटिव इम्पोर्ट लिस्ट जारी की गईं। सैकड़ों हथियार, प्लेटफॉर्म और पुर्ज़ों के आयात पर रोक लगाई गई एवं सेना को स्वदेशी विकल्प अपनाने की बाध्यता रखी गई तथा घरेलू उद्योग को रक्षा क्षेत्र में बड़े अवसर दिए गए।रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा भारतीय कंपनियों से खरीद के लिए आरक्षित किया गया। 75 प्रतिशत तक पूंजीगत खरीद भारतीय स्रोतों से करने के साथ ही स्टार्टअप्स को रक्षा उत्पादन में प्रवेश को प्रोत्साहन दिया गया ।डीआरडीओ को पहले से अधिक स्वतंत्रता, वित्त और लक्ष्य दिए गए।देश में तेजस लड़ाकू विमान आकाश, ब्रह्मोस, नाग मिसाइल और अत्याधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियाँ विकसित करने के साथ ही डीपीएसयू का कॉर्पोरेटाइजेशन कर उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाया गया।पहली बार बड़े पैमाने पर निजी कंपनियों को रक्षा उत्पादन में शामिल किया गया।टाटा, लार्सन एंड टुब्रो, भारत फोर्ज जैसी कंपनियाँ इसमें शामिल हुई । आईडेक्स योजना के तहत स्टार्टअप्स को रक्षा नवाचार का अवसर देने से युवाओं की तकनीक सेना तक पहुँची।

वर्ष 2014 से पहले भारत का रक्षा निर्यात नगण्य था।अब भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता है।देश ने 50,000 करोड़ रू से अधिक निर्यात लक्ष्य रखा है।ब्रह्मोस, हेलीकॉप्टर, गश्ती नौकाएँ, गोला-बारूद आदि का भी निर्यात किया गया है ।

सीडीएस की स्थापना

भारत सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) का पद सृजित कर तीनों सेनाओं का एकीकृत संचालन करने की नीति बनाई है जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हों रहा है साथ ही यह क्रान्तिकारी कदम आत्मनिर्भरता के साथ रणनीतिक सुधार भी माना गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों की सड़कों के सुधार और विकास के साथ सुरंगों, हवाई पट्टियों आदि का निर्माण भी किया जा रहा है। लद्दाख और अरुणाचल में तेज़ सैन्य तैनाती और आपूर्ति में विदेशी निर्भरता कम करने आदि कदम भी उठाए गए है ।स्वदेशी सैनिक उपकरण और वर्दी बनने से सैनिकों के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट,आधुनिक हेलमेट,असॉल्ट राइफल्स, स्वदेशी युद्धक वर्दी आदि की उपलब्धता बढ़ी है । साथ ही सैनिकों की सुरक्षा और आत्मविश्वास दोनों भी कई गुना बढ़े है। मोदी सरकार की सुदृढ़ नीतियों से सर्जिकल स्ट्राइक,एयर स्ट्राइक आदि संभव हुआ है और भारत की आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति से पूरे विश्व में यह संदेश गया कि भारत अब अपने निर्णय स्वयं लेने में न केवल सक्षम है बल्कि आत्मनिर्भर भी है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भरता भारत का केवल नारा नहीं, बल्कि नीति,बजट और ज़मीनी सच्चाई बनी है।आज भारतीय सेना न केवल सशक्त है, बल्कि स्वदेशी,आधुनिक और वैश्विक स्तर पर सम्मानित बन रही है।आत्मनिर्भर सेना और सुरक्षित भारत का नारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश को समर्पित सबसे बड़े रणनीतिक योगदानों में से एक है।

पहली बार जयपुर में भव्य आयोजन

राजस्थान की भूमि वीरता, स्वाभिमान और बलिदान की प्रतीक रही है। राजपूतों की शौर्यगाथाएँ, सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों की उल्लेखनीय भागीदारी और हर गांव से सेना में सेवा करने की परंपरा इस प्रदेश को विशिष्ट बनाती है। वीरों के इस प्रदेश की राजधानी जयपुर में सेना दिवस का आयोजन करने का निर्णय इस ऐतिहासिक प्रदेश को सम्मान देने के साथ-साथ सेना और आमजन के बीच संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आमतौर पर सेना दिवस के प्रमुख कार्यक्रम दिल्ली या सैन्य छावनियों में आयोजित होते रहे हैं, लेकिन जयपुर में पहली बार इसका आयोजन सेना की उस नई सोच को दर्शाता है, जिसके तहत भारतीय सेना देश के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक शहरों से जुड़कर अपने जनसंपर्क को भी मजबूत कर रही है।जयपुर में आयोजित समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि सेना केवल सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग से गहराई से जुड़ी हुई गौरवमयी संस्था है।गुलाबी नगर जयपुर में सेना दिवस के अवसर पर पहली बार आयोजित हो रही इस परेड समारोह का भव्य आयोजन आम जन के लिए मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहेगा । इस समारोह में थल सेना की विभिन्न टुकड़ियों द्वारा अनुशासन, समर्पण और एकरूपता का उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ जवानों की सधी हुई कदमताल, सैन्य सलामी और परंपरागत सैन्य परेड दर्शकों में गर्व की भावना भरेगा ।इसके साथ ही आधुनिक हथियार प्रणालियों, बख्तरबंद वाहनों और संचार उपकरणों आदि की प्रदर्शनी यह दर्शायेगी कि हमारी भारतीय सेना तकनीकी दृष्टि से भी लगातार सशक्त हो रही है और भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है।

सेना दिवस समारोह का सबसे भावनात्मक पक्ष शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का रहेगा । देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों के सम्मान में पुष्पचक्र अर्पित कर और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें नमन किया जाएगा ।राजस्थान, जिसने देश को अनगिनत वीर सपूत दिए हैं, उस धरती पर यह भव्य आयोजन एवं श्रद्धांजलि और भी अर्थपूर्ण होगी । यह क्षण हर नागरिक को यह याद दिलाने वाला होगा कि देश की आज़ादी और सुरक्षा सैनिकों के त्याग और समर्पण से ही संभव है। सैन्य शक्ति के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं की सुंदर और मनोहारी झलक भी देखने को मिलेगी । सैन्य बैंड की देशभक्ति से भरी धुनों के साथ परेड को राजस्थानी लोक संगीत, नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियां और भी अधिक आकर्षक एवं विशिष्ट बनायेंगी।

भारतीय सेना: एकता, सेवा और राष्ट्रगौरव की सशक्त प्रतीक

यह सैन्य और सांस्कृतिक समन्वय इस बात का प्रतीक बनेगा कि भारतीय सेना देश की विविधता में एकता की भावना को सुदृढ़ करती है। सेना दिवस परेड का यह आयोजन विशेष रूप से युवाओं और छात्रों के लिए प्रेरणादायक रहेगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से वे सेना में करियर के अवसरों, अनुशासन, नेतृत्व और देशसेवा के महत्व को समझ सकेंगे। “अग्निवीर” योजना सहित सेना में भर्ती से जुड़ी जानकारियाँ साझा होगीं, जिससे युवाओं में सेना के प्रति रुचि और सम्मान और बढ़ेगा । जयपुर जैसे ऐतिहासिक,शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र में यह आयोजन आने वाली पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा ।भारतीय सेना और नागरिक समाज के बीच गहरा भावनात्मक संबंध भी बनाएगा। आमजन की उत्साहपूर्ण भागीदारी, तालियों की गूंज और देशभक्ति के नारों से सर्वत्र यह संदेश जाएगा कि भारतीय सेना को देश वासियों का पूर्ण समर्थन और सम्मान प्राप्त है।यह आयोजन सेना को आम नागरिकों के और निकट लाने तथा पारदर्शिता और विश्वास को मजबूत करने का माध्यम भी बनेगा।

भारतीय सेना के तीनो अंग अपने देश की सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ देश के विभिन्न भागों में आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता और आंतरिक सुरक्षा में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में भी भारतीय सेना की भूमिका सराहनीय रही है। जयपुर में हो रहें इस अहम आयोजन से भारतीय सेना की बहुआयामी भूमिका का सन्देश जन-जन तक पहुँचेगा। इस आयोजन से यह संदेश भी मिलेगा कि भारतीय सेना केवल सीमाओं की प्रहरी नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा, एकता और सुरक्षा की सबसे मजबूत आधारशिला है। जयपुर की धरती से उठने वाली यह गूंज हर भारतीय के मन में गर्व, कृतज्ञता और राष्ट्रप्रेम की भावना को और प्रबल करेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है। भारतीय सेना अमर रहे,यह नारा जन-जन के मन मस्तिक में घर करे,भारतीय सेना दिवस का यहीं संदेश होना चाहिए।

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वासुदेव देवनानी
वासुदेव देवनानी
लेखक वासुदेव देवनानी राजस्थान विधानसभा के माननीय अध्यक्ष हैं। [Read more]
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