भगवान जगन्नाथ को क्यों लगता है खिचड़ी का भोग? जानिए महाप्रसाद बनने की अद्भुत कहानी
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भगवान जगन्नाथ को क्यों लगता है खिचड़ी का भोग? जानिए महाप्रसाद बनने की अद्भुत कहानी

मकर संक्रांति के साथ जिस व्यंजन का नाम सबसे पहले जुड़ता है, वह है खिचड़ी। यह सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आत्मा और समानता का प्रतीक है। खिचड़ी को ‘सामाजिक भोजन’ कहा जाता है, क्योंकि यह अमीर और गरीब, राजा और रंक, सभी की थाली में समान रूप से जगह पाती है।

Written byMahak SinghMahak Singh
Jan 14, 2026, 01:17 pm IST
inभारत
भगवान जगन्नाथ

भगवान जगन्नाथ

भारत विविधताओं का देश है, जहां हर त्योहार अपने साथ आस्था, परंपरा और समाज को जोड़ने की एक गहरी सीख लेकर आता है। मकर संक्रांति ऐसा ही एक पावन पर्व है, जिसे आज देशभर में हर्षोल्लास और धूम-धाम से मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि तिल-गुड़ का दान और सेवन, स्नान, पूजा और विशेष भोजन का आयोजन इस दिन किया जाता है।

मकर संक्रांति के साथ जिस व्यंजन का नाम सबसे पहले जुड़ता है, वह है खिचड़ी। यह सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आत्मा और समानता का प्रतीक है। खिचड़ी को ‘सामाजिक भोजन’ कहा जाता है, क्योंकि यह अमीर और गरीब, राजा और रंक, सभी की थाली में समान रूप से जगह पाती है। मकर संक्रांति पर जगह-जगह खिचड़ी भोज का आयोजन इसी भावना के साथ किया जाता है कि हर वर्ग, जाति के लोग एक साथ बैठकर भोजन करें और सामाजिक भेदभाव मिटे।

श्रिया की भक्ति कथा- खिचड़ी के साथ जुड़ी एक बेहद रोचक कथा ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से संबंधित है। लोककथाओं के अनुसार, पुरी में श्रिया नाम की एक महिला रहती थी। वह अत्यंत गरीब थी और समाज की नजरों में वंचित समाज की मानी जाती थी, लेकिन उसकी भक्ति निष्कलुष और सच्ची थी। वह भगवान जगन्नाथ और माता लक्ष्मी की परम भक्त थी। एक बार उसने ‘अष्टलक्ष्मी व्रत’ करने का संकल्प लिया और उसकी विधि जानने के लिए मंदिर के पुजारियों के पास पहुंची। लेकिन जाति के कारण पुजारियों ने उसे अपमानित कर वहां से भगा दिया।

श्रिया की पीड़ा और अपमान देखकर भगवान जगन्नाथ का हृदय द्रवित हो उठा। कहा जाता है कि उनकी आंखों से आंसू बह निकले और राजा को आभास हो गया कि मंदिर में कुछ अनर्थ हुआ है। इसी बीच नारद मुनि ने श्रिया को व्रत की विधि बताई। उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी स्वयं उसके घर पहुंचीं और उसे धन-धान्य से परिपूर्ण कर दिया। जब माता लक्ष्मी श्रिया के घर से वापस मंदिर लौटीं, तो भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई बलभद्र क्रोधित हो गए। उन्होंने कहा कि एक ‘वंचित समाज’ के घर जाकर लक्ष्मी ने मंदिर को अपवित्र कर दिया है। गुस्से में आकर बलभद्र ने माता लक्ष्मी को मंदिर से बाहर निकाल दिया।

श्राप और पश्चाताप- जाते-जाते माता लक्ष्मी ने उन्हें श्राप दिया- “जब तक तुम किसी निम्न कुल के व्यक्ति के हाथ का भोजन नहीं करोगे, तब तक भूखे रहोगे।” इसके बाद मंदिर का वैभव धीरे-धीरे समाप्त होने लगा। अनाज सड़ने लगा, रत्न भंडार खाली हो गया और भगवान जगन्नाथ व बलभद्र दोनों दाने-दाने को मोहताज हो गए। बारह वर्षों तक वे भूखे-प्यासे भटकते रहे, लेकिन कहीं से उन्हें भोजन नहीं मिला। एक दिन भटकते-भटकते वे एक महलनुमा घर पहुंचे, जहां हवन हो रहा था। उस घर की मालकिन वास्तव में माता लक्ष्मी ही थीं, जो रूप बदलकर वहां रह रही थीं। उन्होंने दोनों भाइयों को भोजन का सामान भिजवाया। बलभद्र ने स्वयं खिचड़ी बनाने की कोशिश की, लेकिन आग नहीं जली। तब उन्होंने हार मानते हुए कहा- “जगन, भूख के आगे जात-पात कैसी? जो मिला है, वही खा लेते हैं।”

इस तरह खिचड़ी महाप्रसाद बन गई- जब दोनों ने खिचड़ी खाई, तो उन्हें उसके स्वाद से पहचान हो गई कि यह तो माता लक्ष्मी के हाथों का भोजन है। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने माता लक्ष्मी से क्षमा मांगी। इसके बाद लक्ष्मी जी ससम्मान मंदिर लौटीं और मंदिर में फिर से वैभव लौट आया। कहा जाता है कि उसी दिन से पुरी में ऊंच-नीच और जात-पात का भेदभाव समाप्त हो गया। आज भी जगन्नाथ मंदिर में खिचड़ी का महाप्रसाद बनाया जाता है, जिसे सभी लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ ग्रहण करते हैं। मकर संक्रांति और खिचड़ी की यह परंपरा हमें सिखाती है कि भक्ति, मानवता और समानता के सामने जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव का कोई महत्व नहीं है। खिचड़ी सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला वह सूत्र है, जो हमें एक-दूसरे के साथ बैठकर समानता और भाईचारे का स्वाद चखना सिखाता है।

(पाञ्चजन्य इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है)

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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