भगवान जगन्नाथ को क्यों लगता है खिचड़ी का भोग? जानिए महाप्रसाद बनने की अद्भुत कहानी
September 12, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

भगवान जगन्नाथ को क्यों लगता है खिचड़ी का भोग? जानिए महाप्रसाद बनने की अद्भुत कहानी

मकर संक्रांति के साथ जिस व्यंजन का नाम सबसे पहले जुड़ता है, वह है खिचड़ी। यह सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आत्मा और समानता का प्रतीक है। खिचड़ी को ‘सामाजिक भोजन’ कहा जाता है, क्योंकि यह अमीर और गरीब, राजा और रंक, सभी की थाली में समान रूप से जगह पाती है।

Written byMahak SinghMahak Singh
Jan 14, 2026, 01:17 pm IST
inभारत
भगवान जगन्नाथ

भगवान जगन्नाथ

भारत विविधताओं का देश है, जहां हर त्योहार अपने साथ आस्था, परंपरा और समाज को जोड़ने की एक गहरी सीख लेकर आता है। मकर संक्रांति ऐसा ही एक पावन पर्व है, जिसे आज देशभर में हर्षोल्लास और धूम-धाम से मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि तिल-गुड़ का दान और सेवन, स्नान, पूजा और विशेष भोजन का आयोजन इस दिन किया जाता है।

मकर संक्रांति के साथ जिस व्यंजन का नाम सबसे पहले जुड़ता है, वह है खिचड़ी। यह सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आत्मा और समानता का प्रतीक है। खिचड़ी को ‘सामाजिक भोजन’ कहा जाता है, क्योंकि यह अमीर और गरीब, राजा और रंक, सभी की थाली में समान रूप से जगह पाती है। मकर संक्रांति पर जगह-जगह खिचड़ी भोज का आयोजन इसी भावना के साथ किया जाता है कि हर वर्ग, जाति के लोग एक साथ बैठकर भोजन करें और सामाजिक भेदभाव मिटे।

श्रिया की भक्ति कथा- खिचड़ी के साथ जुड़ी एक बेहद रोचक कथा ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से संबंधित है। लोककथाओं के अनुसार, पुरी में श्रिया नाम की एक महिला रहती थी। वह अत्यंत गरीब थी और समाज की नजरों में वंचित समाज की मानी जाती थी, लेकिन उसकी भक्ति निष्कलुष और सच्ची थी। वह भगवान जगन्नाथ और माता लक्ष्मी की परम भक्त थी। एक बार उसने ‘अष्टलक्ष्मी व्रत’ करने का संकल्प लिया और उसकी विधि जानने के लिए मंदिर के पुजारियों के पास पहुंची। लेकिन जाति के कारण पुजारियों ने उसे अपमानित कर वहां से भगा दिया।

श्रिया की पीड़ा और अपमान देखकर भगवान जगन्नाथ का हृदय द्रवित हो उठा। कहा जाता है कि उनकी आंखों से आंसू बह निकले और राजा को आभास हो गया कि मंदिर में कुछ अनर्थ हुआ है। इसी बीच नारद मुनि ने श्रिया को व्रत की विधि बताई। उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी स्वयं उसके घर पहुंचीं और उसे धन-धान्य से परिपूर्ण कर दिया। जब माता लक्ष्मी श्रिया के घर से वापस मंदिर लौटीं, तो भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई बलभद्र क्रोधित हो गए। उन्होंने कहा कि एक ‘वंचित समाज’ के घर जाकर लक्ष्मी ने मंदिर को अपवित्र कर दिया है। गुस्से में आकर बलभद्र ने माता लक्ष्मी को मंदिर से बाहर निकाल दिया।

श्राप और पश्चाताप- जाते-जाते माता लक्ष्मी ने उन्हें श्राप दिया- “जब तक तुम किसी निम्न कुल के व्यक्ति के हाथ का भोजन नहीं करोगे, तब तक भूखे रहोगे।” इसके बाद मंदिर का वैभव धीरे-धीरे समाप्त होने लगा। अनाज सड़ने लगा, रत्न भंडार खाली हो गया और भगवान जगन्नाथ व बलभद्र दोनों दाने-दाने को मोहताज हो गए। बारह वर्षों तक वे भूखे-प्यासे भटकते रहे, लेकिन कहीं से उन्हें भोजन नहीं मिला। एक दिन भटकते-भटकते वे एक महलनुमा घर पहुंचे, जहां हवन हो रहा था। उस घर की मालकिन वास्तव में माता लक्ष्मी ही थीं, जो रूप बदलकर वहां रह रही थीं। उन्होंने दोनों भाइयों को भोजन का सामान भिजवाया। बलभद्र ने स्वयं खिचड़ी बनाने की कोशिश की, लेकिन आग नहीं जली। तब उन्होंने हार मानते हुए कहा- “जगन, भूख के आगे जात-पात कैसी? जो मिला है, वही खा लेते हैं।”

इस तरह खिचड़ी महाप्रसाद बन गई- जब दोनों ने खिचड़ी खाई, तो उन्हें उसके स्वाद से पहचान हो गई कि यह तो माता लक्ष्मी के हाथों का भोजन है। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने माता लक्ष्मी से क्षमा मांगी। इसके बाद लक्ष्मी जी ससम्मान मंदिर लौटीं और मंदिर में फिर से वैभव लौट आया। कहा जाता है कि उसी दिन से पुरी में ऊंच-नीच और जात-पात का भेदभाव समाप्त हो गया। आज भी जगन्नाथ मंदिर में खिचड़ी का महाप्रसाद बनाया जाता है, जिसे सभी लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ ग्रहण करते हैं। मकर संक्रांति और खिचड़ी की यह परंपरा हमें सिखाती है कि भक्ति, मानवता और समानता के सामने जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव का कोई महत्व नहीं है। खिचड़ी सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला वह सूत्र है, जो हमें एक-दूसरे के साथ बैठकर समानता और भाईचारे का स्वाद चखना सिखाता है।

(पाञ्चजन्य इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है)

Topics: Jagannath Templeभगवान जगन्नाथ खिचड़ी भोगOdishaपुरी जगन्नाथ मंदिर कथाhealthy foodजगन्नाथ मंदिर में खिचड़ी परंपराIndian CuisineMakar Sankranti 2026Mahaprasadspiritual foodMakar Sankrantitraditional foodमकर संक्रांति का महत्वdevotional foodखिचड़ीजगन्नाथ मंदिर महाप्रसादKhichdiखिचड़ी का धार्मिक महत्व
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

5 ओरंगुटान की तस्करी की आशंका पर CM माझी ने दिए विस्तृत जांच के आदेश, बोले- राज्य को नहीं बनने देंगे ट्रांजिट रूट

लिव-इन के बाद नोटरी में शादी, महिला से पैसे-स्कूटी लेकर सादिक खान फरार; इस्लाम में कनवर्जन के लिए डाल रहा है दबाव

सीएम- किसान की पांचवीं किस्त जारी, 41.35 लाख किसानों के खातों में पहुंचे ₹833 करोड़ से अधिक की राशि

ओडिशा: श्रीजगन्नाथ मंदिर की बैंक जमा राशि 1,912 करोड़ रुपये के पार…

ओडिशा: कंधमाल में माओवादी हथियारों का डंप बरामद, राइफल, आईईडी, विस्फोटक और गोला-बारूद जब्त

ओडिशा : रक्षा बंधन से पहले पुरी जगन्नाथ मंदिर में राखी निर्माण की तैयारियां अंतिम चरण में

Load More

ताज़ा समाचार

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पौधरोपण करते ब्रिक्स समूह के सदस्य।

नई दिल्ली घोषणापत्र पर मुहर: ब्रिक्स नेताओं ने खिंचवाई ‘फैमिली फोटो’, फिर एक खास पौधे से दिया दुनिया को बड़ा संदेश

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (बाएं)।

प्रधानमंत्री मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक, सीमा सहित कई मुद्दों पर हुई बात

kisan sangh free uniforms notebooks and bags distributed to 7000 flood affected students

असम: शिवसागर में भारतीय किसान संघ की मानवीय पहल, बाढ़ प्रभावित 7,000 छात्रों को दी जा रही नि:शुल्क सहायता!

dr manmohan vaidya addresses-shikshak and taruni samvad in kashi bhu

विविधता का उत्सव मनाना ही भारतीय संस्कृति है: काशी में बोले मनमोहन वैद्य जी- भारत रूपी बगीचे के हम माली नहीं, पौधे हैं

gorakhpur rss centenary youth conference suryakund-prant pracharak ramesh address

“शाखा गंगा की तरह पवित्र और व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है”: गोरखपुर में RSS शताब्दी वर्ष पर भव्य युवा सम्मेलन

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

BRICS Summit: PM मोदी का वैश्विक सुधारों पर जोर, कहा- विशेषाधिकार के पिरामिड को साझेदारी में बदलना होगा

मोदी जी ने तप-साधना और संघर्ष से बनाई पहचान : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

Lakha Sidhana Amritpal Singh Akali Dal Waris Punjab De Maur Assembly Seat Panchjanya

एक और गैंगस्टर का पंजाब की राजनीति में एंट्री : वारिस पंजाब दे ने लक्खा सिधाना को मोड़ सीट से दिया टिकट, जानिए पूरी खबर!

कल का मौसम: 13 सितंबर को भी देशभर में ‘तूफानी बारिश’, इन राज्यों को रहना होगा सर्तक; IMD का बड़ा अलर्ट

अभिजीत दीपके

‘आ गए लाशों पर राजनीति करने’, बालाघाट में पत्रकारों के सवालों का जवाब दिए बिना गाड़ी लेकर भागे CJP के दीपके

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies