भारत-पाक सीमा पर हटेंगे अवैध धार्मिक ढांचे, राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला
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भारत-पाक सीमा से हटेंगे अवैध धार्मिक ढांचे! राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, कहा- ‘राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि’

राजस्थान उच्च न्यायालय ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से 0-50 किमी के दायरे में बिना अनुमति बने धार्मिक स्थलों और अवैध निर्माणों को हटाने के प्रशासनिक नोटिसों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि माना है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jul 14, 2026, 05:40 pm IST
inभारत, राजस्थान
Rajasthan High Court Order Remove Illegal Religious Structures Indo Pak Border Justice Sameer Jain

चित्र - राजस्थान हाईकोर्ट

जयपुर (राजस्थान)। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (Indo-Pak International Border) से सटे संवेदनशील इलाकों में अवैध निर्माणों को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय सुनाया है. न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जब बात सीमा सुरक्षा की हो, तो वहां राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) सबसे सर्वोपरि है.

जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने सीमा से 0 से 50 किलोमीटर के दायरे में बिना सक्षम अनुमति के बने धार्मिक स्थलों और अन्य ढांचों को हटाने के प्रशासनिक नोटिसों को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को सोमवार को पूरी तरह खारिज कर दिया है.

बिना अनुमति बने धार्मिक ढांचे ‘अवैध निर्माण’ की श्रेणी में: हाईकोर्ट

माननीय न्यायालय ने याचिकाओं पर विधिक सुनवाई करते हुए माना कि सीमावर्ती क्षेत्रों (Border Areas) में बिना किसी वैध और सक्षम प्रशासनिक अनुमति के बनाए गए धार्मिक ढांचे कानून के दायरे में पूरी तरह अवैध निर्माण की श्रेणी में आते हैं.

चूंकि प्रत्येक निर्माण की भौगोलिक स्थिति, परिस्थितियां और प्रकृति अलग-अलग हैं, इसलिए सभी मामलों पर एक जैसा सामान्य निर्णय थोपा नहीं जा सकता. इसी विधिक आधार पर उच्च न्यायालय ने प्रत्येक विवादित संपत्ति की अलग-अलग और गहन जांच कराने के सख्त निर्देश जारी किए हैं.

कलेक्टर, SP और BSF अधिकारियों की विशेष कमेटी करेगी जांच

राजस्थान उच्च न्यायालय ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के संवेदनशील दायरे में आने वाले ऐसे सभी संदिग्ध निर्माणों की बिंदुवार जांच के लिए एक उच्च स्तरीय विशेष कमेटी (Special Committee) गठित करने का आदेश दिया है. इस जांच समिति की रूपरेखा इस प्रकार होगी:

विशेष जांच समिति के सदस्य और अधिकार:

  • समिति के सदस्य: इस विशेष जांच दल में संबंधित सीमावर्ती जिले के जिला कलेक्टर (District Collector), पुलिस अधीक्षक (SP) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के वरिष्ठ अधिकारी अनिवार्य रूप से शामिल होंगे.
  • जांच का दायरा: यह समिति प्रत्येक विवादित ढांचे के मामले की अलग-अलग (केस-टू-केस) जांच करेगी.
  • मुख्य बिंदु: जांच के दौरान सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील पहलुओं, सरकारी/गोचर भूमि पर अवैध कब्जे और निर्माण की वैधता से जुड़े अन्य तकनीकी तथ्यों को परखा जाएगा.
  • दंडात्मक कार्रवाई: यदि जांच में उल्लंघन पाया जाता है, तो समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन जरूरत पड़ने पर संबंधित अवैध निर्माणों को हटाने या उन्हें पूरी तरह ध्वस्त (Demolish) करने की कार्रवाई अमल में ला सकेगा.

सीधे रिट याचिका दायर करने पर कोर्ट ने जताई आपत्ति

जस्टिस समीर जैन की अदालत ने जैसलमेर के रामगढ़ स्थित ‘पीर मोहम्मद शाह जिलानी दरगाह समिति’ सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की अपीलों पर संयुक्त सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया.

न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन मामलों में भूमि के मालिकाना हक (स्वामित्व), कब्जे की प्रकृति, निर्माण की वैधता और देश की सुरक्षा जैसे अत्यंत जटिल प्रश्न जुड़े हों, उनकी प्राथमिक जांच हमेशा सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) द्वारा ही की जानी चाहिए.

“हाईकोर्ट ने पाया कि स्थानीय प्रशासन द्वारा संबंधित पक्षों को पहले ही ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर अपना वैधानिक पक्ष रखने का पूरा और उचित अवसर दिया गया था। ऐसे में प्रशासनिक प्रक्रिया का सामना करने और कानूनन जवाब देने के बजाय सीधे उच्च न्यायालय में रिट याचिका (Writ Petition) दायर करना उचित नहीं है। याचिकाकर्ताओं को निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का ही पालन करना चाहिए था।”

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सर्वे के बाद शुरू हुई थी प्रशासनिक कार्रवाई

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो कुछ समय पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में एक व्यापक सुरक्षा सर्वे करवाया था. इस खुफिया और प्रशासनिक सर्वे के बाद यह गंभीर तथ्य प्रकाश में आया कि सीमा से 50 किलोमीटर के भीतर भारी मात्रा में सरकारी, गोचर (चारागाह) और धार्मिक महत्व की ओरण भूमियों पर बिना किसी वैध प्रशासनिक स्वीकृति के कई बड़े धार्मिक व अन्य निर्माण खड़े कर लिए गए हैं.

देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा एजेंसियों ने इन अनधिकृत ढांचों को रणनीतिक व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील और चिंताजनक माना था. सुरक्षा इनपुट मिलने के बाद ही स्थानीय जिला प्रशासनों ने इन्हें हटाने के लिए विधिक नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू की थी, जिसे विभिन्न प्रबंधन समितियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जो अब पूरी तरह खारिज हो चुकी हैं.

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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