नई दिल्ली। अपने सेवा कार्यों से समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को संबल देने वाला अग्रणी संगठन भारत विकास परिषद अपनी स्थापना के सातवें दशक में प्रवेश कर चुका है. परिषद के नीति-निर्धारकों के अनुसार, यह दशक गत छह दशकों की यात्रा के आत्मावलोकन के साथ-साथ “उभरते भारत” में एक व्यापक और प्रभावी उपस्थिति दर्ज करवाने का है.
आगामी दशक के लिए परिषद ने अपनी सांगठनिक शक्ति को विस्तार देते हुए सदस्यता को दो लाख (2,00,000) परिवारों तक लेकर जाने और देश के प्रत्येक जिला केंद्र तक अपनी सक्रिय शाखा स्थापित करने का एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है.
नि:स्वार्थ सेवाभाव: देश-समाज से आगे बढ़कर प्राणी मात्र की सेवा
भारत विकास परिषद में ‘सेवा’ शब्द की परिभाषा बेहद व्यापक है, जो सामान्य देश सेवा और समाज सेवा की सीमाओं से आगे बढ़कर संपूर्ण मानव सेवा तथा प्राणी मात्र की सेवा तक फैली हुई है. परिषद का यह दृढ़ मत है कि सेवा कार्यों में यदि तनिक भी व्यक्तिगत कामना या स्वार्थ आ जाता है, तो उसमें से उसका पवित्र सेवाभाव पूरी तरह नष्ट हो जाता है.
“परिषद की मूल मान्यता है कि नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा से ही मनुष्य के भीतर अच्छे और स्थायी संस्कारों का जन्म होता है। इसलिए, केवल व्यक्तिगत मोक्ष प्राप्ति की संकीर्ण अपेक्षा न रखते हुए, संपूर्ण जीवन को सेवा और परोपकार के मार्ग पर समर्पित करते हुए जीना ही सर्वश्रेष्ठ और श्रेयस्कर मार्ग है।”
मूल रूप से एक “सेवा संगठन” की प्रकृति होने के नाते, भारत विकास परिषद वर्तमान में देश के कोने-कोने में पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वावलंबन के विविध क्षेत्रों में 4,300 से अधिक सेवा कार्यों का सफलतापूर्वक संचालन कर रहा है.
देश भर में 1680 स्थाई सेवा प्रकल्प, 3 लाख दिव्यांगों को मिली मदद
सामाजिक सरोकारों को धरातल पर उतारने के लिए परिषद द्वारा देश भर में कुल 1,680 स्थाई सेवा प्रकल्पों का कुशल संचालन किया जा रहा है. इसके तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित बड़े चिकित्सा केंद्रों, पैथ लैब, पुनर्वास केंद्रों और सामाजिक आयामों पर निरंतर कार्य हो रहा है-
- दिव्यांग पुनर्वास केंद्र: देश भर में 13 अत्याधुनिक दिव्यांग केंद्रों के माध्यम से अब तक लगभग 3,00,000 से अधिक दिव्यांग भाई-बहनों को कृत्रिम अंग व अन्य आवश्यक सहायता प्रदान की जा चुकी है.
- प्रमुख चिकित्सा संस्थान: भारत विकास परिषद अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (कोटा), मेडिकल सेंटर (चंडीगढ़), दिव्यांग पुनर्वास केंद्र एवं संजय आनंद विकलांग अस्पताल (पटना), दिव्यांग सहायता केंद्र (दिलशाद गार्डन, दिल्ली), विवेकानंद आरोग्य केंद्र (गुरुग्राम), डॉक्टर सूरज प्रकाश आरोग्य केंद्र (फरीदाबाद), श्री सुमतिनाथ सेवा सदन (लखनऊ) में संचालित पैथ लैब, न्यूरोथेरेपी सेंटर, होम्योपैथी चिकित्सा केंद्र और चैरिटेबल फ़िजियोथेरेपी सेंटर (जयपुर) प्रमुख रूप से स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं.
- विविध सामाजिक आयाम: इन स्थाई केंद्रों के अतिरिक्त परिषद द्वारा देशव्यापी स्तर पर समग्र ग्राम विकास योजना, वनवासी सहायता, सामूहिक सरल विवाह, पर्यावरण संरक्षण, निर्धन विद्यार्थियों के लिए शिक्षा सहायता, एनीमिया मुक्त भारत अभियान और महिला स्वावलंबन जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक अनुष्ठान चलाए जा रहे हैं.
शीर्ष राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों की रही है गरिमामयी उपस्थिति
संस्कार आयाम के अंतर्गत परिषद द्वारा समाज में वैचारिक चेतना जगाने के लिए विभिन्न उच्च स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं का नियमित प्रकाशन भी किया जाता है. अपनी इसी प्रभावी सामाजिक उपस्थिति और देशव्यापी प्रभाव के कारण भारत विकास परिषद को समय-समय पर देश के शीर्ष नेतृत्व का सानिध्य प्राप्त हुआ है.
परिषद के विभिन्न राष्ट्रीय व क्षेत्रीय कार्यक्रमों में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा, ज्ञानी जैलसिंह, डॉक्टर वी.वी. गिरी, डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, रामनाथ कोविंद तथा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह स्वयं उपस्थित रह चुके हैं अथवा परिषद को उसके उत्कृष्ट व अनुकरणीय मानवीय कार्यों के लिए सम्मानित व पुरस्कृत कर चुके हैं.
संघ के शताब्दी वर्ष में ‘पंच परिवर्तन’ के सूत्रों को घर-घर पहुंचाएगा संगठन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के गौरवशाली 100 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर भारत विकास परिषद ने इस वर्ष सामाजिक परिवर्तन के ‘पंच सूत्रों’ पर विशेष केंद्रित होकर कार्य करने का निर्णय लिया है. इसके तहत निम्नलिखित पांच प्रमुख विषयों पर बड़े स्तर पर वैचारिक साहित्य का निर्माण, बौद्धिक संगोष्ठियां और विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी:
- 1. पर्यावरण संरक्षण (Environment)
- 2. स्वदेशी आचरण (Swadeshi)
- 3. सामाजिक समरसता (Social Harmony)
- 4. परिवार प्रबोधन (Family Values)
- 5. नागरिक कर्तव्य (Civic Duties)
परिषद अपने आंतरिक संस्कार आयाम के अंतर्गत सबसे पहले अपने स्वयं के सदस्य परिवारों, देश के विद्यार्थियों तथा आम परिवारों के माध्यम से इन पंच परिवर्तन के जीवन-मूल्यों को घर-घर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएगी.
इसके साथ ही, भविष्य की चुनौतियों और समय के अनुकूल बदलावों को स्वीकार करते हुए परिषद अपने कार्यों में आधुनिक तकनीक (Technology) का समावेश करेगी, स्थाई सेवा प्रकल्पों की संख्या का विस्तार करेगी और संगठन की निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं व युवाओं को नेतृत्व विकास के विशेष अवसर प्रदान कर सहभागी बनाएगी, ताकि वैश्विक पटल पर भारत माता को परम वैभव पर ले जाने के परम लक्ष्य को पूर्ण किया जा सके.

















