नई दिल्ली: इस साल एक अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी संयोग बना है। 23 साल बाद मकर संक्रांति और माघ मास के कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी साथ है। आज ही मकर संक्रांति है और आज ही षटतिला एकादशी भी। ज्योतिष शास्त्र में इस संयोग को अक्षय पुण्य योग कहा गया है। ऐसा योग 23 साल बाद बन रहा है इसलिए यह मकर संक्रांति और एकादशी दोनों ही बेहद महत्व की हैं। इससे पहले ऐसा संयोग साल 2023 में देखा गया था।
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षटतिला एकादशी पर तीन शुभ योग साथ
मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी का व्रत रखने और तिल-दान, स्नान और भगवान विष्णु की पूजा करने से घर की दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है। ज्योतिषों के मुताबिक, इस बार षटतिला एकादशी पर वृद्धि योग, लाभ दृष्टि योग और शुक्रादित्य योग का भी दुर्लभ संयोग बन रहा है।वृद्धि योग सुबह 07:57 बजे से15 जनवरी रात 03:03 बजे तक है।
जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग व अमृत सिद्धि योग सुबह 07:15 बजे से अगले दिन 03:03 बजे तक है। इस पावन दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की शुद्धि कर गणेश जी को प्रणाम करें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु का गंगाजल व पंचामृत से अभिषेक करें। पीला चंदन, पीले पुष्प, तुलसी दल अर्पित कर घी का दीपक जलाएं। षटतिला एकादशी की कथा का पाठ करें। भगवान विष्णु का मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” है।
षटतिला एकादशी पर शास्त्रों के अनुसार तिल का छह प्रकार से उपयोग अनिवार्य बताया गया है। तिल, स्नान, तिल उबटन, तिल तर्पण, तिल हवन, तिल भोजन और तिल दान। आज के दिन चावल का सेवन वर्जित बताया गया है। पौराणिक मान्यता है कि षटतिला एकादशी पर श्रद्धा से व्रत और तिल दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

















