जब कोई मुस्लिम देश किसी यूरोपीय देश पर यह आरोप लगाए कि वहां से उसके यहां पर मुस्लिम कट्टरता आ रही है, तो क्या सहज विश्वास होगा? शायद नहीं! यह कोई कल्पना ही नहीं कर सकेगा कि कथित मॉडर्न कहे जाने वाले यूनाइटेड किंगडम (यूके) में इस्लामी कट्टरता हो सकती है? यूएई से यह संदेश जाए कि यूके दरअसल मुस्लिम कट्टरता को फैला रहा है तो यह चौंकाने वाला ही समाचार होगा।
लेकिन हाल ही के दिनों की घटनाओं पर नजर डाली जाए तो यह साफ दिखाई देता है कि जिन बातों को यूएई कट्टर ठहरा रहा है, उन्हें यूके में सामान्य माना जा रहा है। जैसे कि इस्लामोफोबिया की परिभाषा। अभी हाल ही में फाइनेंशियल टाइम्स ने एक स्वतंत्र स्रोत के हवाले से बताया है कि यूएई के अधिकारियों ने उन नागरिकों के लिए सरकार से दिए जाने पैसे पर रोक लगा दी है, जो यूनाइटेड किंगडम में पढ़ने के लिए जाना चाहते हैं। क्योंकि उन्हें यह डर है कि वहाँ पर पढ़ने के द्वारा वे मुस्लिम ब्रदरहुड की कट्टरता का शिकार हो सकते हैं।
इसका अर्थ यह हुआ कि आगामी सत्र से ब्रिटेन में पढ़ने के लिए यूएई से सरकारी सहायता नहीं मिलेगी। ऐसा भी कहा जा रहा है कि इसे आधिकारिक रूप से लागू किया जा चुका है, परंतु इसकी घोषणा अभी की गई है।
यूएई के अधिकारियों ने क्या कहा
फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार यूएई के अधिकारियों ने ब्रिटेन से यह स्पष्ट कर दिया है कि यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि वहां के लोग यह नहीं चाहते कि उनके बच्चे ब्रिटेन के कैंपस में जाकर कट्टरपंथ का शिकार हो जाएं। तो इसका अर्थ यह माना जा सकता है कि यूएई ने यूके की पढ़ाई को अस्वीकार कर दिया है। इसका अर्थ यह भी माना जा सकता है कि यूएई उन संस्थानों से शैक्षणिक योग्यता को मान्यता नहीं देगा, जो उसकी अनुमोदित सूची में नहीं हैं। यह भी कि यूके में जो डिग्री हैं, उनकी महत्ता अन्य से बहुत कम है।
ब्रिटेन में जिहादी तत्व सक्रिय
आंकड़े यह कहते हैं कि यूके के विश्वविद्यालयों में ऐसे वक्ताओं को लगातार बुलाया जा रहा है, जो मुस्लिम कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रहे हैं। ब्रिटेन से यूएई लगातार मुस्लिम ब्रदरहुड को प्रतिबंधित करने के लिए कह रहा है। यूएई यह अनुरोध कर रहा है कि वह मुस्लिम ब्रदरहुड को प्रतिबंधित कर दे, क्योंकि वह इसे आतंकी संगठन मानता है। मगर ब्रिटेन की ओर से अभी कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया है। इस संगठन पर मिस्र, सऊदी अरब और यूएई जैसे मुस्लिम देशों ने इस कारण से प्रतिबंध लगा रखा है क्योंकि वह मजहबी कट्टरता फैलाता है, और समाज के लिए घातक है। लेकिन ब्रिटेन जैसे कथित मॉडर्न देश अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर ऐसे संगठनों को बढ़ावा देते हैं। यही कारण है कि यूएई की तरह से कई बार यह कहा जा चुका है कि ब्रिटेन में जिहादी तत्व अधिक सक्रिय हैं। जो रिपोर्ट्स हैं वे भी यही कहती हैं कि मुस्लिम ब्रदरहुड ने अपना नेटवर्क उन मुस्लिम छात्रों और नागरिकों के माध्यम से इन देशों में फैलाया हुआ है, जो अपने देश से निर्वासित होकर वहां आए हैं।
सोशल मीडिया पर ब्रिटेन की हो रही आलोचना
सोशल मीडिया पर जैसे ही यह खबर वायरल हुई, ब्रिटेन की आलोचना होने लगी। लोग यह कहने लगे कि क्या दिन आ गए हैं कि ब्रिटेन पर कट्टरपंथी देश का तमगा मुस्लिम देश लगा रहे हैं। एक यूजर ने ब्रिटेन की सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि “क्या अब ब्रिटेन की सरकार यूएई को इस्लामोफोबिक कहेगी?”
एक यूजर ने लिखा कि यही एक ऐसा पतन है, जो प्रबंधित प्रतीत होता है। यह ऐसा पतन है, जिसे जानबूझकर किया गया है और यह नैतिक पक्षाघात है। लोग प्रश्न कर रहे हैं कि जो खतरा बाहर के देश देख पा रहे हैं, वह हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं? यूएई काफी समय से यह बात कहता हुआ आ रहा था कि पश्चिम के देश अज्ञानता में मुस्लिम कट्टरता को बढ़ावा दे रहे हैं और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कट्टरपंथी तत्वों को आश्रय दे रहे हैं।
ब्रिटेन की नेता सुएला ब्रेवरमैन ने क्या कहा
इस खबर पर ब्रिटेन की नेता सुएला ब्रेवरमैन ने एक्स पर लिखा कि एक समय में हमारा कुलीन शिक्षा तंत्र अब इस्लामी ताकतों के हाथों में चला गया है। जैसा मुझे पता है कि वे अब फ्री स्पीच बर्दाश्त नहीं करते और अब यहां पर शैक्षणिक संस्थान नफरत और चरमपंथ का अड्डा बन गए हैं। ठीक यही होता है जब हमारे पब्लिक संस्थान – चाहे वे शिक्षा के क्षेत्र में हों या पुलिस में – एक साथ हमारे युवाओं का ब्रेनवॉश करते हैं और न सिर्फ आंखें बंद कर लेते हैं, बल्कि गाजा जैसे कट्टरपंथी मामलों में शामिल होते हैं। इज़राइल विरोधी बनते हैं और लंदन में हमास समर्थक नफरत मार्च होने देते हैं। पश्चिमी सभ्यता की यह आत्मघाती सहानुभूति खत्म होनी चाहिए।

















