लखनऊ । मदरसा शिक्षा परिषद ने आजमगढ़ के मुबारकपुर के 78 वर्ष पुराने मदरसे अशरफिया मिस्बाहुल उलूम की मान्यता को निलंबित कर दिया। जांच में पाया गया कि ब्रिटेन की नागरिकता लेने के बाद भी शमसुल हुदा ने इस मदरसे से वेतन आहरित किया था। इस मदरसे को बोर्ड ने 28 सितंबर 1948 को उच्च आलिया स्तर की स्थाई मान्यता।प्रदान किया था। कुछ समय पहले संतकबीर नगर स्थित मदरसा कुल्लियात बनातिर रजबिया की मान्यता निलंबित की गई थी।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 के नवबर माह में उत्तर प्रदेश के जनपद संतकबीर नगर जनपद में पुलिस ने ब्रिटिश नागरिक मौलाना शमशुल हुदा खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मौलाना के खिलाफ धोखाधड़ी और विदेशी मुद्रा अधिनियम के उल्लंघन का मामला पाया गया था। यूपी एटीएस मौलाना के खिलाफ काफी समय से जांच कर रही थी। यूपी एटीएस द्वारा संकलित साक्ष्य के आधार पर मौलाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
बताया जा रहा है कि मौलाना शमशुल हुदा खान ने वर्ष 2013 में ब्रिटेन की नागरिकता लिया था। विगत कई वर्षों से मौलाना शमशुल हुदा खान भारत में मजहबी कट्टरपंथ को फैला रहा था। यह भी आरोप है कि मौलाना शमशुल मदरसों के लिए विदेश से फंड एकत्र कर रहा था। इसके खिलाफ विदेशी मुद्रा व्यवस्था अधिनियम का उल्लंघन करने का भी आरोप है।
उल्लेखनीय है कि मौलाना शमशुल की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद और संत कबीर नगर जनपद में संचालित हो रहे उसके दोनों मदरसों की मान्यता को समाप्त कर दिया गया है। इन दोनों मदरसों को जिस रजा फाउंडेशन के आधार पर संचालित किया जा रहा था। उस एनजीओ का पंजीकरण भी निरस्त कर दिया गया है।
यूपी एटीएस की जांच में यह तथ्य भी प्रकाश में आया है कि मौलाना शमशुल मजहबी प्रचार के लिए कई बार पाकिस्तान की यात्रा भी कर चुका है। इस बात की भी आशंका है कि मौलाना शमशुल, पाकिस्तान के कुछ संदिग्ध लोगों के संपर्क में है। मौलाना शमशुल के जम्मू-कश्मीर के संदिग्धों लोगों से संपर्क की भी जांच की जा रही है।

















