जर्मनी में बर्लिन में चार दिनों तक ब्लैकआउट, लेफ्टविंग की शैतानी सोच से हिला जर्मनी
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जर्मनी में बर्लिन में चार दिनों तक ब्लैकआउट, लेफ्टविंग की शैतानी सोच से हिला जर्मनी

बर्लिन में माइनस 12 डिग्री ठंड के बीच 45 हजार घरों की बिजली गुल, अस्पताल, ट्रांसपोर्ट ठप, एक महिला की मौत और मेयर पर गंभीर सवाल- पूरी घटना ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया की चुप्पी पर बहस छेड़ दी।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Jan 8, 2026, 06:12 pm IST
in विश्व

जर्मनी में पिछले कई दिनों से बर्लिन में अंधेरा छाया रहा। अंधेरा भी किसी प्राकृतिक कारणों से नहीं है, अपितु यह अंधेरा मानव द्वारा निर्मित था। जहां तापमान इस समय -120 है, तो ऐसी चिलचिलाती ठंड में बर्लिन में चार दिनों तक बिजली नहीं रही। ऐसा क्यों हुआ, यह जानना और भी रोचक है और साथ ही यह भी जानना रोचक है कि इतने बड़े संकट की कोई भी खबर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में नहीं रही।

क्या हुआ था बर्लिन में.?

जर्मनी के बर्लिन में शनिवार को अचानक से ही लगभग 45000 घरों में अंधेरा छा गया। बिजली चली गई और इससे केवल घर और परिवार ही नहीं, बल्कि अस्पताल और व्यापारिक संस्थान तक प्रभावित हुए। दक्षिण – पश्चिम जर्मनी में सार्वजनिक यातायात का भी नेटवर्क रुक गया।

मगर ऐसा हुआ क्यों था और किसने किया था? दरअसल यह सब किया था लेफ्टविंग के अराजक चरमपंथियों ने, और उन्होनें इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। वाल्कैनो ग्रुप नामक एक वाम चरमपंथी समूह ने इतनी ठंड में इस कारण से ठंड में लोगों को ठिठुरने के लिए मजबूर कर दिया, क्योंकि वह “सत्ता में बैठे लोगों को अक्ल सिखाना चाहता था” और जर्मनी द्वारा जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता का विरोध करना चाहता था।

और इस कारण उसने सरकार को सबक सिखाने के लिए बर्लिन में बिजली संयंत्र पर हमला करके आग लगा दी और हजारों लोगों के लिए असुविधा खड़ी कर दी। मगर क्या यह केवल असुविधा थी? यह प्रश्न उठता ही है क्योंकि जिस समय वहाँ पर तापमान शून्य से 12 डिग्री नीचे है, तो ऐसे में बिजली के जाने से क्या होगा, यह सहज समझ जा सकता है।

इसके अतिरिक्त अस्पताल भी हैं, और अस्पताल में भी बिजली चली गई और लाइफ सपोर्ट सिस्टम आदि सब कुछ ठप्प हो गए। लोगों ने बहुत कठिनाई से दिन काटे। वहाँ पर पाइप में पानी जम गया और साथ ही हीट पम्पस के भी फटने का डर पैदा हो गया था; सीवेज का पानी घरों में भर गया था।

मेयर इस सूचना के बाद टेनिस खेलने चले गए : लोगों ने कहा इस्तीफा दो

फर्स्टपोस्ट के अनुसार बर्लिन के मेयर काई वेनगर के इस्तीफे की मांग की जा रही है। क्योंकि जिस समय शहर के हजारों परिवार अंधेरे में बैठे हुए थे और बिजली संयत्र पर हमला करके उसे जला दिया गया था, और सर्दियों में आम लोग ठिठुर रहे थे, ट उसे समय वेगनेर अपनी साथी कैथरीना के साथ टेनिस खेलने के लिए चले गए थे, जो बर्लिन की शीर्ष शिक्षा अधिकारी हैं।

इसे लेकर मेयर ने पहले कहा था कि वे टेनिस खेलने गए थे, मगर बाद में अपना बयान बदल दिया था। हालांकि इसे लेकर अब राजनीति भी तेज हो गई है। दक्षिण पंथी एएफडी ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि कोई भी संकट के समय में अपना आराम देखता है तो वह गलत स्थान पर है। वेगनेर, आप इस मैच से हाथ धो बैठे हैं।“

बुधवार को बिजली वापस आने से पहले एक महिला की मौत

बुधवार को हालांकि प्रभावित इलाके में बिजली आ गई, परंतु उससे पहले ही अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की कि प्रभावित क्षेत्र में एक महिला की मौत हो गई है। हालांकि इसे लेकर स्पष्ट नहीं है कि यह मौत किस कारण हुई थी।

सोशल मीडिया पर गुस्सा फूटा

इस पूरी घटना का सोशल मीडिया पर काफी विरोध हो रहा है। लोगों का कहना है कि बर्लिन में  हुए इतने बड़े हमले को लेकर मीडिया का रवैया दोहरा रहा है। चूंकि यह हमला वाम चरमपंथी ने किया था, इसलिए मीडिया ने इसे बहुत ही कम दिखाया, यदि दक्षिणपंथी दल ने कुछ भी किया होता तो उसे आतंकवाद का नाम दे दिया जाता, मगर इतनी बड़ी घटना के बाद भी वाम चरमपंथियों के इस आतंक को विस्तार से नहीं बताया गया। कितनी समस्याएं हुईं, और कितने लोग पीड़ित हुए, यह सब नहीं लिखा गया।

बिजली वापस आने के बाद आम लोगों का गुस्सा फुट पड़ा है। लोगों का कहना है कि आखिर ये कैसे हुआ कि पाँच दिनों तक बिजली चली जाए और सरकार को कुछ पता ही न चले।

गार्डीअन के अनुसार लोगों ने शिकायत की है कि आखिर इस शहर के साथ समस्या क्या है क्योंकि कई लोग इतने दिन काम नहीं कर पाए और जिसके कारण उन्हें पैसे भी नहीं मिल पाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले ही सिस्टम में खामियों के विषय में बताया जा चुका था। महत्वपूर्ण संरचनाओं पर काम करने वाले स्वतंत्र समूह एजी कृटिस के एक संस्थापक मानुएल अतुग ने कहा कि उनके संस्थान ने कई बार इस सिस्टम की कमियों के बारे में आगाह किया था। और यह कहा था कि बिजली, पानी या साइबर कुछ भी रहा हो, ये इतनी सक्षम नहीं है कि वे बड़े हमले झेल सकें, इसलिए इनकी रक्षा की योजना बनाई जानी चाहिए।

 

Topics: Left wing extremismBerlin BlackoutGermany Power CrisisBerlin Mayor ControversyEurope Energy SecurityBerlin power outageGermany blackout newsleft wing extremist attack BerlinBerlin electricity crisisGermany energy failure
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