नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम प्रहार की तैयारी जोरों पर है। इसके लिए केंद्र सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। दरअसल, देश को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य मार्च 2026 तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ही निर्धारित किया था।
अधिकारियों के मुताबिक, नक्सल प्रभावित इलाकों को पूरी तरह हिंसा से मुक्त करने की दिशा में आखिरी मैपिंग का काम तेजी से चल रहा है। गांव-गांव जाकर सघन अभियान चला रहे हैं ताकि कहीं भी कोई नक्सली बाकी न रहे। हथियारों की मौजूदगी की गहन जांच हो रही है। साथ ही, जिन इलाकों को पहले ही नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है, वहां आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की तलाशी ली जा रही है ताकि कोई खतरा न छूट जाए।
सुरक्षा बलों की रणनीति साफ है – जनवरी का महीना बहुत अहम है। जहां-जहां खुफिया जानकारी मिल रही है कि नक्सली मौजूद हैं, उनकी जल्द से जल्द मैपिंग पूरी की जा रही है। इसी महीने के अंदर उन इलाकों पर कार्रवाई पूरी करने का प्लान है। एक आला अधिकारी ने कहा, “हम नक्सल मुक्त भारत के बहुत करीब पहुंच चुके हैं।” जीरो इंसिडेंट का लक्ष्य पाने के लिए सभी संदिग्ध इलाकों को चिन्हित किया जा रहा है। वहां नक्सलियों की मौजूदगी, हथियार, आईईडी और उनका पूरा ढांचा – हर चीज की गहन पड़ताल हो रही है। जब तक पूरी तरह संतुष्ट न हो जाएं, तब तक किसी इलाके को पूरी तरह नक्सल मुक्त नहीं घोषित किया जाएगा।
पिछले कुछ समय में सुरक्षा बलों की कार्रवाई काफी तेज हुई है। लगातार सर्च ऑपरेशन, इलाके पर कब्जा, और खुफिया इनपुट के आधार पर एक्शन चल रहा है। नतीजा ये है कि नक्सली घटनाएं, आईईडी ब्लास्ट और आम नागरिकों की हत्या के मामले साफ तौर पर कम हो गए हैं। नक्सलियों का नेटवर्क बिखरता दिख रहा है। कई इलाकों में नक्सली या तो गिरफ्तार हो रहे हैं या सरेंडर कर रहे हैं।
हर हफ्ते केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी जा रही है। माना जा रहा है कि अमित शाह इसी महीने (जनवरी 2026) में फिर से छत्तीसगढ़ जा सकते हैं ताकि आखिरी चरण के अभियान की समीक्षा कर सकें। 2025 में अब तक के आंकड़े बताते हैं कि 317 नक्सलियों को मार गिराया गया है। 862 को गिरफ्तार किया गया है और 1,973 ने आत्मसमर्पण किया है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि दबाव कितना बढ़ चुका है और नक्सलवाद अब अपनी आखिरी सांसें ले रहा है।

















