जय सोमनाथ: 17 बार इस्लामी आक्रांताओं का आक्रमण सहने के बाद भी कैसे अडिग रहा सोमनाथ मंदिर?
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जय सोमनाथ: 17 बार इस्लामी आक्रांताओं का आक्रमण सहने के बाद भी कैसे अडिग रहा सोमनाथ मंदिर?

सोमनाथ मंदिर को हिंदू धर्म का पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है और यह भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहाँ हर साल हजारों श्रद्धालु आते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।

Written byMahak SinghMahak Singh
Jan 8, 2026, 05:20 pm IST
inभारत, गुजरात
सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर

भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात राज्य के जूनागढ़ जिले के प्रभास पाटण में स्थित सोमनाथ मंदिर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह मंदिर समुद्र के किनारे होने के कारण न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी बहुत महत्वपूर्ण है। सोमनाथ मंदिर को हिंदू धर्म का पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है और यह भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहाँ हर साल हजारों श्रद्धालु आते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।

सोमनाथ मंदिर: आस्था, संघर्ष का प्रतीक- सोमनाथ मंदिर का इतिहास बहुत पुराना और संघर्षपूर्ण रहा है। इसे कई बार लूट और आक्रमण का सामना करना पड़ा। इतिहास के अनुसार, इस मंदिर पर पहला आक्रमण 1026 ईस्वी में मोहम्मद गजनी ने किया था। उसके बाद कई अन्य हमलावरों ने भी इस मंदिर पर हमला किया। सबसे प्रमुख आक्रमण 1708 ईस्वी में औरंगजेब के अधीन गुजरात के मुगल सूबेदार मोहम्मद आजम ने किया। इसके बावजूद सोमनाथ मंदिर हमेशा हिंदू धर्म और संस्कृति का प्रतीक बना रहा। इतिहास में कई बार इस मंदिर को तोड़ा गया, लेकिन हिंदुओं की आस्था और श्रद्धा के कारण इसे हमेशा पुनः बनाया गया। सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, कला और स्थापत्य का भी प्रतीक है। इसकी वास्तुकला समुद्र के किनारे होने के कारण और भी आकर्षक दिखती है।

सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण- सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की कहानी भी बहुत प्रेरणादायक है। भारत के पहले गृहमंत्री, सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसे पुनः स्थापित करने का संकल्प लिया। उन्होंने सोमनाथ मंदिर को उसके मूल स्वरूप में पुनः बनाने की योजना बनाई। मंदिर के पुनर्निर्माण में लाखों श्रद्धालुओं और देशवासियों ने सहयोग किया। 11 मई 1951 को मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य समारोह हुआ। इस समारोह में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद स्वयं उपस्थित हुए और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। इस दिन सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा एक ऐतिहासिक घटना बन गया।

यह भी पढ़ें- जय सोमनाथ: क्या आप जानते हैं सोमनाथ मंदिर का नाम कैसे पड़ा? जानिए अद्भुत कथा

भव्य वास्तुकला और सांस्कृतिक प्रतीक- मंदिर का वास्तुकला बहुत ही आकर्षक और भव्य है। इसमें अनेक प्रमुख द्वार और मूर्तियां हैं। विशेष रूप से, मंदिर के प्रमुख द्वार जिसे दिग्विजय द्वार कहा जाता है, के सामने सरदार पटेल की ऊँची प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा उनके अदम्य साहस, योगदान और संघर्ष का प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है। यह भारत की संस्कृति, इतिहास और धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक भी है। समुद्र के किनारे होने के कारण इसका दृश्य बहुत ही मनमोहक है। यहाँ आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु दोनों ही मंदिर और इसके आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हैं।

यह भी पढ़ें- नाथों के नाथ सोमनाथ: 17 आक्रमण सह कर भी जीवंत रही आस्था

सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक- सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण और फिर उसका पुनर्निर्माण हमें यह सिखाता है कि धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए दृढ़ निश्चय और आस्था बहुत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर हर बार तबाह होने के बाद भी फिर से अपनी भव्यता के साथ खड़ा हुआ। यही इसे अटल और अडिग प्रतीक बनाता है। आज सोमनाथ मंदिर में न केवल भारत के श्रद्धालु आते हैं, बल्कि दुनिया भर से पर्यटक भी इसे देखने आते हैं। मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग अत्यंत पवित्र माना जाता है। श्रद्धालु यहाँ पूजा, भजन और ध्यान के लिए आते हैं।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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