भुवनेश्वर: विकसित भारत गारंटी फॉर एम्प्लॉयमेंट एंड लाइवलीहुड मिशन (ग्रामीण), जिसे लोकप्रिय रूप से ‘वीबी जी राम जी’ कानून कहा जा रहा है वह ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है । ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण भारत के कायाकल्प की दिशा में निर्णायक पहल बताया है।
भुवनेश्वर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून जवाबदेह, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त ग्रामीण रोजगार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस कानून का मूल उद्देश्य महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ ग्रामीण आजीविका के विचारों को व्यावहारिक रूप देना है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल ‘वीबी जी राम जी’ को लेकर जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं, जबकि इसका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण भारत को मजबूत कर विकसित भारत के संकल्प को साकार करना है।
‘विकसित भारत’ से रोजगार गारंटी का सीधा संबंध
मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि इस कानून का नाम ही इसके उद्देश्य को दर्शाता है। यह किसी महापुरुष के नाम का राजनीतिक उपयोग नहीं, बल्कि उनके विचारों को जमीन पर उतारने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक ग्रामीण परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी देकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाता है।
विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों—कि यह कानून किसान विरोधी या गरीब विरोधी है—को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें किसानों, श्रमिकों और ग्रामीण परिवारों के हितों की पूरी सुरक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष तथ्यहीन प्रचार कर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।
ग्रामीण रोजगार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री ने भारत में ग्रामीण रोजगार की लंबी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि 1876–78 के भयानक अकाल के बाद ब्रिटिश शासन ने 1880 में फेमिन बोर्ड का गठन किया था। हालांकि राहत के बदले काम अनिवार्य था, लेकिन लोगों को कोई कानूनी अधिकार नहीं मिला। स्वतंत्रता के बाद संविधान के अनुच्छेद 41 में रोजगार उपलब्ध कराने को राज्य का नैतिक दायित्व माना गया, लेकिन इसे लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों पर छोड़ दी गई। वर्ष 1960 और 1971 में शुरू की गई कई योजनाएं रोजगार की गारंटी देने में विफल रहीं और स्थायी आय सुनिश्चित नहीं कर सकीं।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि खराब योजना, प्रशासनिक विफलता, विकेंद्रीकरण की कमी और भ्रष्टाचार के कारण ये योजनाएं धराशायी हो गईं, जिसका सबसे अधिक नुकसान किसानों और ग्रामीण श्रमिकों को हुआ।
यूपीए शासन में मनरेगा की खामियां
मुख्यमंत्री माझी ने वर्ष 2005 में शुरू की गई और 2009 में नाम बदले गए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार इस योजना की बुनियादी संरचना में सुधार करने में विफल रही। उन्होंने दावा किया कि जहां योजना में 100 दिनों के रोजगार का वादा किया गया था, वहां वास्तव में लाभार्थियों को औसतन 50 दिन से भी कम काम मिला। मजदूरी बेहद कम रही, बेरोजगारी भत्ता लगभग निष्क्रिय रहा और भ्रष्टाचार व्यापक रूप से फैल गया।
मुख्यमंत्री ने बिहार में लगभग ₹6,000 करोड़ और उत्तर प्रदेश में ₹10,000 करोड़ के कथित घोटालों का हवाला दिया। ओडिशा में भी 2012 में संबलपुर से मजदूरी मृत व्यक्तियों, बीमारों और पेंशनधारकों के नाम पर निकाले जाने के मामले सामने आए। फर्जी मस्टर रोल, अधूरे कार्य और धन की हेराफेरी आम बात बन गई थी।
‘वीबी जी राम जी’: तकनीक आधारित सुधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि वीबी जी राम जी मिशन को इन्हीं संरचनात्मक कमजोरियों को दूर करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जीपीएस ट्रैकिंग और मोबाइल आधारित निगरानी जैसे आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता, जवाबदेही और वास्तविक समय में सत्यापन संभव होगा।
उन्होंने कहा कि यह नया ढांचा कृषि की मौसमी जरूरतों को भी ध्यान में रखता है, जिसे पहले नजरअंदाज किया गया था। किसानों के हितों की रक्षा के लिए बुवाई और कटाई के दौरान अधिकतम 60 दिनों तक रोजगार कार्य स्थगित रखे जाएंगे, ताकि कृषि क्षेत्र में श्रम संकट और कृत्रिम मजदूरी वृद्धि को रोका जा सके।
रोजगार के दिन बढ़े, केंद्र–राज्य समन्वय मजबूत
उन्होंने कहा कि नए कानून के तहत प्रति ग्रामीण परिवार रोजगार की गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है, जिससे रोजगार को कानूनी अधिकार का दर्जा मिलता है। इससे ग्रामीण उत्पादकता और पारिवारिक आय में वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। उन्होंने कहा कि वित्तीय ढांचे को भी सरल बनाया गया है। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए केंद्र–राज्य अनुपात 90:10, केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषण, और अन्य राज्यों के लिए 60:40 का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार इससे सभी स्तरों पर बेहतर समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
चार प्राथमिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
वीबी जी राम जी मिशन के तहत चार प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है । इसमें जल सुरक्षा एवं संबंधित कार्य, बुनियादी ग्रामीण अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, आजीविका परिसंपत्तियों का सृजन और विस्तार, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता और आपदा तैयारी शामिल है । उन्होंने कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा। इस प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल, पंचायती राज मंत्री रवि नारायण नायक, संसदीय कार्य मंत्री डॉ. मुकेश महालिंग, नित्यानंद गोंड, उप मुख्य सचेतक गोविंद दास, विधायक बाबू सिंह और आशृत पटनायक, तथा भाजपा प्रदेश महासचिव शारदा प्रसाद सतपथी सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
















