पंजाब में क्यो हो रहा सरकार और पंथक टकराव तेज? CM भगवंत मान अकाल तख्त पर तलब
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होम भारत पंजाब

पंजाब में क्यो हो रहा सरकार और पंथक टकराव तेज? CM भगवंत मान अकाल तख्त पर तलब

श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों से जुड़े गंभीर मामले को लेकर सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब पर 15 जनवरी को तख्तों के पांच सिंह साहिबान की अहम बैठक होने जा रही है।

Written byराकेश सैनराकेश सैन — edited by Lalit Fulara
Jan 5, 2026, 05:27 pm IST
in पंजाब

चंडीगढ़: सिख पंथ की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया है। सीएम मान को 15 जनवरी को श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों से जुड़े गंभीर मामले को लेकर सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब पर 15 जनवरी को तख्तों के पांच सिंह साहिबान की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में पावन स्वरूप प्रकरण पर एक बार फिर विस्तार से विचार किया जाएगा और पंजाब सरकार की कथित दखलअंदाजी पर कड़ा रुख अपनाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध अकाल तख्त के समक्ष पेश
पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध सोमवार को अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होने के लिए अमृतसर पहुंचे। मंत्री नंगे पांव ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप करते हुए हेरिटेज स्ट्रीट से श्री अकाल तख्त साहिब तक पहुंचे और माथा टेका। तस्वीर विवाद को लेकर पांच सिंह साहिबानों द्वारा स्पष्टीकरण देने के लिए उन्हें अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में तलब किया गया था। पेशी के बाद तरुणप्रीत सिंह सोंध ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब का हर आदेश उन्हें सिर-माथे स्वीकार है। उन्होंने कहा कि गुरु घर के समक्ष उनका सिर हमेशा झुका है और वे सिख मर्यादा का पूर्ण सम्मान करते हैं।

चीफ खालसा दीवान प्रधान को भी बुलावा
इसी दिन चीफ खालसा दीवान के प्रधान डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर को भी सिंह साहिबान के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। उनसे संगठन के अमृतधारी और गैर-अमृतधारी सदस्यों की सूची सौंपने को कहा गया है।

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क्यों हो रहा है सरकार और तख्त के बीच टकराव?
गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूपों के गुम होने का मामला एक दशक बीत जाने के बाद भी किसी पहेली से कम नहीं है। सिख समुदाय की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील प्रकरण ने अब एक बार फिर पंजाब की राजनीति और धार्मिक संस्थाओं के बीच टकराव को हवा दे दी है। पंजाब सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल की सक्रियता और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व ऑडिटर सतिंदर सिंह कोहली की गिरफ्तारी के बाद यह मामला पूरी तरह से सुर्खियों में आ गया है।

एसजीपीसी ने बताया पंथक मामलों में सरकारी दखलंदाजी
एक ओर जहां एसजीपीसी इसे धार्मिक संस्था के आंतरिक प्रशासन से जुड़ा मामला बताते हुए सरकारी हस्तक्षेप करार दे रही है, वहीं पंजाब सरकार का कहना है कि यह धार्मिक अपमान और गंभीर आपराधिक लापरवाही का विषय है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। इस टकराव ने आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब की राजनीति को भी गरमा दिया है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब सिख धर्म का सर्वोच्च और पवित्र ग्रंथ है। इसके प्रत्येक स्वरूप को जीवित गुरु का दर्जा प्राप्त है। इन स्वरूपों का प्रकाशन, संरक्षण और वितरण शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की जिम्मेदारी है जिसे सिखों की सर्वोच्च धार्मिक-प्रबंधक संस्था माना जाता है। ऐसे में सैकड़ों स्वरूपों के गुम होने का आरोप केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है।

2016 में हुआ था पहला खुलासा
स्वरूपों के गुम होने का मामला पहली बार वर्ष 2016 में सामने आया। एसजीपीसी के प्रकाशन विभाग में रिकॉर्ड और लेखा-जोखा की आंतरिक जांच के दौरान पाया गया कि कई स्वरूपों का कोई लेखाजोखा मौजूद नहीं है। शुरुआती जांच में 267 स्वरूपों के गायब होने की बात सामने आई। इसके बाद श्री अकाल तख्त साहिब के तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के निर्देश पर पूरे मामले की विस्तृत जांच करवाई गई। इस जांच का नेतृत्व एडवोकेट डॉ. इशर सिंह ने किया। जांच पूरी होने पर यह संख्या बढक़र 328 स्वरूपों तक पहुंच गई।

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कहां से और कैसे गायब हुए स्वरूप?
जांच रिपोर्ट के अनुसार ये सभी स्वरूप अमृतसर स्थित एसजीपीसी के प्रकाशन हाउस से गायब पाए गए। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि कम से कम 186 स्वरूप बिना किसी आधिकारिक अनुमति के प्रकाशित किए गए और बिक्री या वितरण में लाए गए। इन स्वरूपों का न तो वैध रिकॉर्ड था और न ही विधिवत बिल या अनुमति। सबसे अहम बात यह रही कि 2016-17 में मामला सामने आने के बावजूद तत्कालीन अकाली दल और बाद में कांग्रेस सरकार के दौरान न तो एफआईआर दर्ज करवाई गई और न ही किसी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की गई। एसजीपीसी ने भी इसे आंतरिक जांच तक सीमित रखा।

विरोध और आंदोलनों की गूंज
इस मुद्दे को लेकर सिख सद्भावना दल, गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कमेटी, संयुक्त किसान मोर्चा समेत कई सिख और पंथक संगठनों ने तीखा विरोध दर्ज कराया। 2020 के आसपास एसजीपीसी मुख्यालय और श्री हरिमंदिर साहिब परिसर के बाहर लंबे समय तक धरने और प्रदर्शन हुए। भाई बलदेव सिंह वडाला की अगुआई में हेरिटेज स्ट्रीट पर चार वर्षों तक आंदोलन चला। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। श्रद्धालुओं का आरोप था कि एसजीपीसी ने मामले को दबाने का प्रयास किया।

अकाल तख्त की 1000 पेज की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
श्री अकाल तख्त की ओर से गठित एडवोकेट इशर सिंह जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा कि प्रकाशन विभाग में रिकॉर्ड के साथ गंभीर छेड़छाड़ हुई है। रिपोर्ट के अनुसार कई स्वरूप बिना किसी अनुमति और बिल के बेचे गए। सिख सद्भावना दल ने इस रिपोर्ट को आधार बनाकर लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई की मांग की और एसजीपीसी पर प्रभावशाली लोगों को बचाने का आरोप लगाया।
पिछले महीने दर्ज हुई एफआईआर

लगभग एक दशक बाद 7 दिसंबर, 2025 को पंजाब सरकार के आदेश पर अमृतसर के थाना सी डिवीजन में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में एसजीपीसी के 16 वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों को नामजद किया गया है। इन पर धार्मिक भावनाएं आहत करने, विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया गया। नामजद आरोपियों में एसजीपीसी के पूर्व मुख्य सचिव रूप सिंह, धर्म प्रचार कमेटी के पूर्व अधिकारी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। इसके साथ ही सरकार ने मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।

एसआईटी की कार्रवाई तेज
एसआईटी में अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम ने कई स्थानों पर छापे मार कर दस्तावेज बरामद किए हैं। अब तक एसजीपीसी के पूर्व ऑडिटर सतिंदर सिंह कोहली और एक सहायक कर्मचारी को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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क्या कहना है एसजीपीसी का?
एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी का कहना है कि संस्था ने 2016 से 2020 के बीच आंतरिक जांच कर दोषियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की थी। नियमों के अनुसार दंड भी दिया गया। धामी का आरोप है कि पंजाब सरकार धार्मिक संस्था के कामकाज में दखल दे रही है। उनके अनुसार अकाल तख्त द्वारा करवाई गई जांच पर्याप्त थी और एफआईआर व एसआईटी की जरूरत नहीं थी। एसजीपीसी का कहना है कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है।

सरकार का स्टैंड और आंदोलनकारी संगठनों की उम्मीद
पंजाब सरकार के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने कहा कि सैकड़ों पावन स्वरूपों का गुम होना बेहद गंभीर मामला है। सरकार का कर्तव्य है कि दोषियों को सामने लाया जाए। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी समय रहते सख्त कदम उठाने में विफल रही, इसलिए एफआईआर और एसआईटी जरूरी हो गई। जो भी दोषी होगा, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

सिख सद्भावना दल के मुखी बलदेव सिंह वडाला का कहना है कि एसजीपीसी ने वर्षों तक इस मामले को दबाए रखा। जांच रिपोर्ट होने के बावजूद पुलिस में मामला दर्ज नहीं करवाया गया। वडाला का कहना है कि अब एफआईआर और एसआईटी से उन्हें उम्मीद है कि सच्चाई सामने आएगी और सिख समुदाय की भावनाओं के साथ हुए खिलवाड़ का न्याय मिलेगा।

2027 के चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा
पावन स्वरूपों का यह मामला अब केवल धार्मिक या कानूनी नहीं रह गया है। यह 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अकाली दल और सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पंथक राजनीति, धार्मिक आस्था और सरकारी दखल—इन तीनों के संगम ने इस मुद्दे को बेहद संवेदनशील और विस्फोटक बना दिया है। अब सबकी नजर एसआईटी की अगली कार्रवाई और आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि यह पहेली कब और कैसे सुलझेगी।

Topics: punjabAkal TakhtChief Minister Bhagwant Manngovernment and religious conflictreligious institution Sri Akal TakhtBhagwant Mann to appear the Akal Takht
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