गत 26 दिसंबर, 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनूठे कार्य करने वाले 20 बालक-बालिकाओं को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले बच्चों में एक है बहादुर बालिका व्योमा प्रिया। मात्र नौ साल की व्योमा कोयंबतूर, तमिलनाडु की रहने वाली है। व्योमा ने अपने घर के पास पार्क में बिजली के करंट से छह साल के जियांश रेड्डी की जान तो बचा ली, मगर इस हादसे में उसने खुद की जान गंवा दी। पार्क की जमीन के अंदर बिजली का एक मोटा तार गया हुआ था। इस कारण वहां नई बनाई धातु की सीढ़ियों में करंट आ रहा था। नन्हा जियांश उसकी चपेट में आ गया। यह देखकर व्योमा उसे बचाने के लिए दौड़ी मगर पार्क की जमीन बेहद गीली थी। नतीजा यह हुआ कि जियांश को बचाते हुए व्योमा स्वयं उस करंट का शिकार हो गई। व्योमा को वीरता के क्षेत्र में अपना सर्वोच्च बलिदान देने के लिए मरणोपरांत प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार दिया गया।
दूसरा वीर बालक था बिहार के कैमूर जिले में रहने वाला कमलेश कुमार। कमलेश और अन्य दो बच्चे अपने गांव जयपुर के पास बहने वाली नदी दुर्गावती में नहा रहे थे। अचानक उनमें से एक बच्चा अपना संतुलन खो बैठा और बहने लगा। उसे बचाने के लिए कमलेश नदी की लहरों में आगे बढ़ गया। मगर नदी की धारा ने उसे भी अपने साथ बहा लिया। बीस घंटे की खोजबीन के बाद कमलेश का शव लगभग पंद्रह किलोमीटर दूर अकोढ़ी मेले के पास मिला। कमलेश ने दूसरे को बचाने के लिए अपनी जान की कुर्बानी दे दी। इस सर्वोच्च बलिदान के लिए कमलेश को मरणोपरांत इस पुरस्कार के लिए चुना गया।

केरल के पलक्कड जिले के 11 वर्षीय मुहम्मद सिदान ने भी ऐसी ही वीरता दिखाई है। उसके एक मित्र ने गलती से बिजली के उस खंबे को छू लिया, जिसमें करंट आ रहा था। उसे बचाने के लिए गया उसका दोस्त भी उसी करंट का शिकार हो गया। यह देखकर सिदान ने लकड़ी के डंडे से उन दोनों को बिजली की पकड़ से दूर कर दिया। इस तरह दोनों बच्चों की जिंदगी बच गई।
आगरा के नौ साल के अजय राज की बहादुरी गजब की है। वह अपने पिता के साथ एक नदी के किनारे खड़ा था, तभी नदी से निकलकर एक मगरमच्छ ने उसके पिता के पैर को अपने जबड़ों में जकड़ लिया और उन्हें नदी के अंदर खींचने लगा। अजय राज ने बजाय डरने के मगरमच्छ के मुंह पर तब तक वार किए जब तक कि उसने उसके पिता को छोड़ नहीं दिया।
इस कड़ी में अगला नाम मिजोरम के लुंगलेई की नौ वर्ष की गायिका एस्थर लालदुहोमि हनामटे का है। उसने अपने भावपूर्ण देशभक्ति गीतों से देश भर के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उनके गीतों को यू टयूब पर 2 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है। उसके चैनल के 1.13 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। उसने प्रधानमंत्री की उपस्थिति में दिसंबर, 2024 में दिल्ली में आयोजित अष्टलक्ष्मी महोत्सव के उद्घाटन समारोह में अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी थी। इसके लिए उसे यह सम्मान मिला है।

पश्चिम बंगाल में नादिया जिले के 16 साल के सुमन सरकार तबला वादक हैं। जब वे केवल तीन साल के थे तब से ही तबला बजा रहे हैं। उन्होंने 62 से अधिक तबला वादन की प्रस्तुतियां दी हैं। उनके पास विभिन्न प्रतियोगिताओं में जीते 22 प्रथम पुरस्कारों सहित 43 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र हैं। कला और संस्कृति के क्षेत्र में इतनी सारी उपलब्धियों के लिए उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के एक गांव में रहने वाली 17 वर्षीया पूजा ने विज्ञान के क्षेत्र में अपनी सूझबूझ से अभिनव प्रयोग किया है। उन्होंने गेहूं कटाई मशीन से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए भूसे की धूल को अलग करने की मशीन विकसित की है। उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न नवाचारी कार्यक्रमों में भागीदारी करने का अवसर मिला। उन्हें पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए पुरस्कृत किया गया।
पंजाब में फिरोजपुर के चक तारन के रहने वाला श्रवण सिंह मात्र दस वर्ष का है। उसने मई, 2025 में आपरेशन सिंदूर के दौरान असाधारण साहस का परिचय दिया। दुश्मन के ड्रोन हमलों के बीच उसने अपने परिवार और समुदाय के लोगों को सेना का सहयोग करने के लिए प्रेरित किया। इस सामाजिक सेवा के लिए श्रवण को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किया गया।
चंडीगढ़ के 17 वर्षीय वंश तायल ने 2020 में माता और पिता दोनों को खो दिया था। वे चंडीगढ़ के मालोया स्थित स्नेहालय बाल गृह में रहते हैं। बाल कल्याण समिति की सिफारिश पर उन्हें संस्थागत देखभाल के लिए रखा गया। उन्होंने एक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे के लिए रोगी देखभाल सहायक के रूप में स्वेच्छा से अपनी सहमति दी और उसे भोजन से लेकर फिजिरोथिरेपी तक में सहायता की और भावनात्मक सहारा प्रदान किया। वंश को समाज सेवा की दिशा में अपने इस अपूर्व योगदान के लिए इस वर्ष प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
असम के जोरहाट की रहने वाली 14 साल की आयशी प्रिशा बोरा ने प्राकृतिक खेती, अखबार की खाद बनाने और अखबार केे कचरे से पेंसिल बनाने की मशीन विकसित करने जैसी परियोजनाओं पर काम किया। उसने राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी सहित देश के अनेक प्रमुख वैज्ञानिक मंचों पर सफलतापूर्वक भागीदारी की। विज्ञान और प्रौद्यागिकी के क्षेत्र में उनकी इन उपलब्धियों के लिए उन्हें बाल पुरस्कार प्रदान किया गया।
औरंगाबाद महाराष्ट्र के 17 वर्षीय अर्नव अनुप्रिया महर्षि दिव्यांग हैं। 2022 में एक सड़क दुर्घटना में उनका दाहिना हाथ लकवाग्रस्त हो गया। मगर उन्होंने इन विपरीत परिस्थितियों में हार न मानते हुए ‘फेयर चांस’ विकसित किया, जो एआई आधारित हाथ के लकवे को ठीक करने का उपकरण है। इन उपलब्धियों के लिए अर्नव को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किया गया।
आंध्र प्रदेश के अन्नमय्या की रहने वाली 17 वर्षीया शिवानी होसुरू उप्पारा दिव्यांग पैरा एथलीट हैं। उन्होंने शाॅटपुट और भाला फेंक में अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय राज्य और जिला स्तर पर आठ से भी अधिक पुरस्कार जीते हैं। खेल के क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के फलस्वरूप उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार पर अधिकार जमाया।
समस्तीपुर, बिहार के 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने क्रिकेट में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। उन्होंने 2025 में सबसे कम उम्र में आईपीएल के इतिहास में सबसे तेज शतक बनाने का रिकार्ड स्थापित किया। वे रणजी क्रिकेट में दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं और टी-20 व लिस्ट ए क्रिकेट खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी भी हैं। खेल के क्षेत्र में इन असाधारण उपलब्धियों के लिए उन्हें राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव की 14 साल की योगिता मण्डावी जूडो खिलाड़ी हैं। इन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर खेलो इंडिया खिलाड़ी के रूप में अपनी एक पहचान बनाई है। इन्होंने जूड़ो खेल में अनेक पदक जीते हैं। योगिता कम उम्र में ही अनाथ हो गई थीं मगर आज वे अपनी योग्यता और लगन के बल पर एक नक्सल प्रभावित क्षेत्र से निकलकर भारतीय जूडो की सबसे प्रेरणादायक प्रतिभा के रूप में उभरी हैं।
सूरत की रहने वाली मात्र सात साल की वाका लक्ष्मी प्राज्ञिका ने शतरंज में अनेक उपलब्धियां अर्जित की हैं। उसने सर्बिया में आयोजित 2025 में फिडे विश्व विद्यालय शतरंज चैंपियनशिप में अंडर-7 बालिका वर्ग में 9/9 के पूर्ण स्कोर के साथ विश्व चैंपियन का खिताब जीता। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के नाम को चार चांद लगाने वाली वाका लक्ष्मी को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
हरियाणा के सिरसा निवासी 17 साल की ज्योति ने अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट खेलों में शाॅटपुट और भाला फेंक में पंद्रह से अधिक पदक जीते हैं। इन्होंने थाईलैंड में आयोजित विश्व एबिलिटी स्पोर्ट्स 2023 में दो रजत पदक और एक कास्य पदक जीता। खेलों में अपनी विशेष उपलब्धियों के लिए ज्योति को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किया गया।
रांची की 14 साल की अनुष्का कुमारी एक फुटबाॅलर हैं। उनका चयन भारत की अंडर-17 फुटबाल टीम में हुआ है। वे इस राज्य की उन पांच बालिकाओं में से एक हैं, जिन्होंने यह उपलब्धि अर्जित की है। खेल के क्षेत्र में उनकी इन बेमिसाल उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय बाल पुरस्कार दिया गया।
बेेंगलुरु की 15 वर्षीया धिनिधि देसिंगु बहुत अच्छी तैराक हैं। वे 2024 पेरिस ओलंपिक में भाग लेने वाली दूसरी सबसे कम उम्र की भारतीय तैराक हैं। इन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में 42 से अधिक पदक जीते हैं। खेलो इंडिया की सहायता से इन्होंने राष्ट्रीय खेलों में ग्यारह पदक जीते और तीन रिकार्ड भी तोड़े।
ओडिशा में गजपति की रहने वालीं 16 साल की ज्योशना सबर युवा भारोत्तोलक हैं। उन्होंने युवा एशियायी भारोत्तोलन चैंपियनशिप में 40 किलोग्राम वर्ग में कुल 135 किलोग्राम भार उठाकर युवा एशियायी रिकार्ड बनाया। इन्होंने राष्ट्रमंडल भारोत्तोलन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ विश्व युवा एवं कनिष्ठ चैंपियनशिप में रजत और कांस्य पदक अर्जित किए।
खेल के क्षेत्र में इन उपलब्धियों के लिए उन्हें राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किया गया।
तेलंगाना के मेडचल-मलकजगिरी में रहने वाले 16 वर्ष के विश्वनाथ कार्तिकेय पदाकांति पर्वतारोही हैं। उन्होंने 2025 में दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। इनके नाम चार विश्व रिकार्ड हैं। इन्होंने छह महाद्वीपों में बीस से अधिक चोटियों पर चढ़कर भारत और एशिया की रिकार्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराया है।

















