3 जनवरी को अमेरिका ने वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर सैन्य हमले किए और राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को पकड़ लिया। मदुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी जहाज पर सवार करके न्यूयॉर्क लाया जाया गया। प्रशासन इसे ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म से जुड़े अपराधों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई बता रहा है, लेकिन इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।
ऑपरेशन की वैधता पर सवाल
अमेरिका के इस हमले और मदुरो को पकड़ने से काफी बहस छिड़ गई है कि क्या ये काम घरेलू कानून और अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक ठीक है। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने इसे मुख्य रूप से “कानून लागू करने वाला ऑपरेशन” बताया, न कि ऐसा सैन्य हमला जिस पर कांग्रेस का ज्यादा नियंत्रण हो। उनका कहना है कि ये अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर किया गया।
लेकिन आलोचक कहते हैं कि किसी दूसरे देश की जमीन पर सशस्त्र घुसपैठ करना आसान नहीं है। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज पर कहा कि जो डेमोक्रेट्स इसकी आलोचना कर रहे हैं, उन्हें “बहुत अच्छा काम” कहना चाहिए, बजाय संवैधानिक सवाल उठाने के। हाउस इंटेलिजेंस कमिटी के टॉप डेमोक्रेट जिम हाइम्स ने मांग की कि प्रशासन को कांग्रेस को तुरंत ब्रिफ करना चाहिए—इस बारे में कि वो इलाके में स्थिरता कैसे बनाएंगे और इस फैसले का कानूनी आधार क्या है।
क्या कहता है कानून
कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ये कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करती है। 1945 में बने इस चार्टर का आर्टिकल 2(4) साफ कहता है कि कोई देश दूसरे देश की संप्रभुता या क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल का इस्तेमाल नहीं कर सकता। ये नियम द्वितीय विश्व युद्ध जैसी तबाही रोकने के लिए बनाया गया था।
जियोफ्री रॉबर्टसन केसी, जो सिएरा लियोन में यूएन वॉर क्राइम्स कोर्ट के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं, ने इसे आर्टिकल 2(4) के खिलाफ बताया और “आक्रामकता का अपराध” कहा—जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून में सबसे बड़ा अपराध माना जाता है। किंग्सटन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एल्विरा डोमिंगुएज-रेडोंडो ने इसे “आक्रामकता का अपराध और दूसरे देश के खिलाफ गैरकानूनी बल प्रयोग” बताया। इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड लीगल स्टडीज की प्रोफेसर सुजान ब्रेउ का कहना है कि ऐसी कार्रवाई तभी जायज हो सकती है, अगर यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की मंजूरी हो या सेल्फ-डिफेंस में किया गया हो—दोनों में से कोई भी यहां नहीं दिखता।
अमेरिका शायद ये दावा करे कि मदुरो की “नार्को-टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन” से अमेरिका को खतरा था, इसलिए सेल्फ-डिफेंस। लेकिन रॉबर्टसन कहते हैं कि ऐसा कोई तरीका नहीं है कि अमेरिका ये साबित कर सके—क्योंकि किसी ने नहीं कहा कि वेनेजुएला की सेना अमेरिका पर हमला करने वाली थी। ब्रेउ ने भी कहा कि मदुरो को ड्रग तस्करी से सीधे जोड़ने का कोई पुख्ता सबूत नहीं है जो अमेरिका की संप्रभुता को खतरे में डालता हो।

















