पाकिस्तान के आजादी की मांग से उबल रहे बलूचिस्तान के प्रमुख नेता मीर यार बलूच जिन्ना के देश के नेताओं की करतूतों की कलई खोलते रहे हैं। ‘बलूचों की हत्यारी’ पाकिस्तान सरकार और फौज के विरोध में वे आवाज उठाते रहे हैं। अब उन्होंने जिन्ना के देश और चीन की नजदीकियों पर चिंता जाहिर करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक चिट्ठी लिखी है जिसे उन्होंने एक्स पर साझा किया है।

बलूच नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच बीजिंग-इस्लामाबाद गठजोड़ को बहुत करीब से देखते आ रहे हैं और इसीलिए अपनी चिट्ठी के माध्यम से उन्होंने इस साजिशी गठजोड़ के गहराने को लकर अपनी चिंता व्यक्त की है। मीर यार का दावा है कि चीन अगले कुछ महीनों में पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में अपने फौजियों को तैनात कर सकता है। भारत के विदेश मंत्री जयशंकर के सामने यही बात रेखांकित करते हुए उन्होंने अपनी यह चिट्ठी सार्वजनिक सोशल मीडिया मंच के जरिए प्रेषित की है।
इस चिट्ठी में मीर यार बलूच कहते हैं ने कहा कि बलूचिस्तान अनेक दशकों से पाकिस्तान के हाथों अत्याचार सहता आ रहा है। उन्होंने इस संदर्भ में राज्य-प्रायोजित हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन का भी जिक्र किया है।
उल्लेखनीय है कि बलूच नेताओं ने मई 2025 में एक दस्तावेज जारी करके अपने प्रांत की जिन्ना के देश के चंगुल से ‘आजादी’ की घोषणा की थी। अब मीर यार बलूच ने घोषणा की है कि ‘बलूचिस्तान गणराज्य’ 2026 के पहले सप्ताह में “2026 बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमेटिक वीक” मनाएगा। यह कदम बलूचिस्तान को दुनिया भर के देशों के साथ सीधे जोड़ने के लिए उठाया जाएगा।
बलूच नेता अपने जयशंकर को संबोधित अपनी चिट्ठी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सरकार द्वारा 2025 में किए गए ऑपरेशन सिंदूर जैसे साहसिक और दृढ़ कदमों की सराहना की है। यह आपरेशन 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के ठिकानों को खत्म करने के लिए किया गया था। मीर यार ने इसे भारत के अनुकरणीय साहस और क्षेत्रीय सुरक्षा और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रदर्शन बताया।
मीर यार की चिट्ठी में लिखा है कि, ‘बलूचिस्तान गणराज्य के छह करोड़ देशभक्त नागरिकों की ओर से, हम भारत के एक सौ चालीस करोड़ लोगों, संसद के दोनों सदनों, मीडिया, नागरिक समाज और सभी सम्मानित व्यक्तियों को नए साल 2026 की हार्दिक और सच्ची शुभकामनाएं देते हैं। यह शुभ अवसर उन गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वाणिज्यिक, आर्थिक, राजनयिक, रक्षा और बहुआयामी संबंधों पर विचार करने और उनका गौरव गान करने का अवसर प्रदान करता है, जिन्होंने सदियों से भारत और बलूचिस्तान को साथ रखा है।’
वे आगे लिखते हैं, ”ये स्थायी संबंध हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) जैसे पवित्र स्थलों से स्पष्ट दिखते हैं, जो हमारी साझा विरासत और आध्यात्मिक संबंधों का एक कालातीत प्रतीक है।”
https://twitter.com/miryar_baloch/status/2006759716190564661?s=20
भारत को समर्थन
इस मानवाधिकार कार्यकर्ता ने ‘दोस्ती, विश्वास और आपसी हितों को बढ़ावा देने में भारत और उसकी सरकार के लिए अटूट समर्थन की भी बात की है। इसमें शांति, समृद्धि, विकास, व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, भविष्य की ऊर्जा चुनौतियां और छिपे खतरों को कम करना शामिल है।’
वे लिखते हैं, ‘बलूचिस्तान के लोगों ने पिछले उनहत्तर साल से पाकिस्तान के राज्य पर कब्जे, राज्य प्रायोजित आतंकवाद और घोर मानवाधिकार अत्याचारों को सहा है। अब समय आ गया है कि इस नासूर को जड़ से ही खत्म किया जाए, ताकि हमारे राष्ट्र के लिए स्थायी शांति और संप्रभुता सुनिश्चित हो सके।’
चीन को लेकर चिंता
मीर यार बलूच ने जोर देकर कहा कि बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक गठबंधन को बहुत खतरनाक मानते हैं। बीजिंग ने इस्लामाबाद के सहयोग से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को अपने अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। उन्होंने आगे लिखा, ”अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता बलों की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया, और अगर उन्हें लंबे समय से चले आ रहे चलन के अनुसार नजरअंदाज किया जाता रहा, तो यह संभव है कि चीन कुछ ही महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर दे। 6 करोड़ बलूच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तानी धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए सोच परे खतरा और चुनौती होगी।”
उनका दावा है कि अगर बलूच प्रतिरोध और रक्षा बलों को मजबूत नहीं किया जाता और उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता, तो यह क्षेत्र जल्दी ही सीधे चीनी सैन्य उपस्थिति देख सकता है। चिट्ठी में कहा गया है, ”अगर बलूचिस्तान की रक्षा और आजादी की ताकतों की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया तो चीन यहां अपनी फौज तैनात करके रहेगा।”

















