केरल में ईसाई संगठनों ने कोच्चि-मुजिरिस बिएनाले प्रदर्शनी में लगाई गई एक पेटिंग का विरोध किया, जिसके बाद उसे अस्थायी रूप से बंद किया गया है। ईसाई संगठनों का आरोप है कि यह कलाकृति उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। उन्होंने लियोनार्डो द विंची की बनाई मशहूर पेंटिंग ‘द लास्ट सपर’ (The Last Supper) को गलत तरीके से दिखाए जाने की निंदा की। सिरो-मालाबार चर्च ने बुधवार (31 दिसंबर) को कलाकृति की कड़ी आलोचना करते हुए एक बयान भी जारी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पेंटिंग में ‘लास्ट सपर’ (ईसा मसीह के अंतिम भोज) के दृश्य को गलत तरीके से दिखाया गया है। चर्च ने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्हें संदेह है कि ईसाई समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए इसे जानबूझकर प्रदर्शनी में लगाया गया। दरअसल, लियोनार्डो द विंची की असली पेंटिंग ‘द लास्ट सपर’ में ईसा मसीह और उनके शिष्यों के उस आखिरी भोजन को दिखाया गया है, जो उन्होंने सूली पर चढ़ने से पहले किया था।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद केरल के कलाकार टॉम वट्टाकुजी की एक पेंटिंग को लेकर है, जो बाजार रोड के गार्डन कन्वेंशन सेंटर में ‘एडम’ प्रदर्शनी का हिस्सा है, जिसमें 36 कलाकारों के काम दिखाए गए हैं। टॉम वट्टाकुजी ने कहा कि उनका इरादा किसी की आस्था या भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था। टॉम ने कहा, “मैं खुद एक ईसाई परिवार में पैदा हुआ हूं। मेरी ज्यादातर कलाकृतियां ईसाई धर्म की इंसानियत वाली सीख से प्रेरित रही हैं। यह पेंटिंग भी उसी सोच का हिस्सा है, न कि ‘द लास्ट सपर’ का बिगड़ा हुआ रूप, जैसा कि इसका विरोध करने वाले लोग आरोप लगा रहे हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कलाकृति मशहूर लेखक सी गोपन के नाटक मृधावंगियुडे दुर्मृत्यु (Mridhavangiyude Durmruthyu) से प्रेरित है, न कि ‘लास्ट सपर’ पर आधारित है। इसकी कहानी वायलोप्पिल्ली (Vyloppilli) मलयालम साहित्य के प्रमुख कवि की लिखी एक पुरानी कविता से प्रेरित है।
क्यूरेटरों ने क्या कहा?
प्रदर्शनी के अन्य क्यूरेटरों, जिनमें के.एम. मधुसूदनन और ऐश्वर्या सुरेश भी शामिल थे, उन्होंने बताया कि कलाकृति में माता हरि को दिखाया गया है, जो पहले विश्व युद्ध में जर्मनी की एक जासूस थीं। माता हरि एक मशहूर डांसर भी थीं। पेंटिंग में उन्हें फ्रेंच सेना द्वारा फांसी दिए जाने से ठीक पहले के पलों में दिखाया गया है। इसका ईसा मसीह से कोई संबंध नहीं है। वट्टाकुजी की पेंटिंग कलात्मक और साहित्यिक व्याख्या की एक लंबे समय से चली आ रही श्रृंखला का हिस्सा है, जो पुरानी कविताओं और कहानियों से प्रेरित होती है।
बिएनाले के अधिकारियों ने क्या कहा?
बिएनाले के अधिकारियों ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के बाद और नए साल के जश्न के दौरान कानून-व्यवस्था न बिगड़े इसके लिए उन्होंने 30 दिसंबर से प्रदर्शनी को बंद कर दिया था, लेकिन 2 जनवरी से इसे फिर से खोल दिया जाएगा।
पहले भी हो चुका है विवाद
गौरतलब है कि कलाकार वट्टाकुजी द्वारा बनाई गई इस पेंटिंग पर पहले भी विवाद हो चुका है। साल 2016 में जब यह एक पत्रिका में छपी थी, तब भी ईसाइयों के भारी विरोध के बाद इसे हटाना पड़ा था।
















