बांग्लादेश सरकार की बेशर्म हरकतों और बयानों ने भारत के साथ उसके संबंधों को और तनावपूर्ण बना दिया है। अपने यहां हिन्दुओं को सुरक्षा देने में नाकाम रही यूनुस सरकार पाकिस्तान के कथित इशारों पर चलते हुए उलटे भारत को ही नसीहत देने की जुर्रत कर रही है। भारत ने इस परिस्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए ढाका से कहा है कि वहां हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा फैला रहे तत्वों को शीघ्र पकड़ा जाए। इस बीच ताजा खबर यह है कि बांग्लादेश ने नई दिल्ली से अपने उच्चायुक्त एम. रियाज हमिदुल्लाह को ‘अत्यावश्यक कारणों’ से ढाका बुलाया है। ढाका के सूत्रों द्वारा बताया तो यह गया है कि रियाज को दोनों देशों के बीच संबंधों की मौजूदा स्थिति पर बात करने के लिए बुलाया गया है, लेकिन मामला इससे कहीं अधिक आगे का लग रहा है।
पता चला है कि बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमिदुल्लाह को कल देर रात अपने देश के विदेश मंत्रालय से फोन अया था और रियाज भी देर रात ही विमान पकड़कर ढाका जा पहुंचे हैं। बांग्लादेश के मशहूर बांग्ला दैनिक ‘प्रोथोम आलो’ के अनुसार, भारत के साथ तनावपूर्ण संबंधों के मद्देनजर रियाज को ‘परामर्श’ के लिए ढाका तलब किया गया है।
इस बीच बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और अपने यहां भारत विरोधी कट्टरपंथी तत्वों को शह देने वाली खालिदा जिया के निधन का भी समाचार आया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सबसे वरिष्ठ नेता के निधन के बाद राजनीतिक जानकार इस कयास में जुटे हैं कि जल्दी ही चुनाव में उतरने जा रहे उस देश में अब क्या नए समीकरण बनेंगे।

मोदी ने जताया अफसोस
खालिदा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया है और भारत-बांग्लादेश संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका को याद किया है। बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन के निधन पर शोक जताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वह उनके निधन से ‘बहुत आहत’ हैं।
आज सुबह एक्स पर अपनी पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, “ढाका में पूर्व प्रधानमंत्री और BNP चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के निधन के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ। उनके परिवार और बांग्लादेश के सभी लोगों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं। ईश्वर उनके परिवार को इस दुखद नुकसान को सहने की शक्ति दें।”
https://tweet.com/narendramodi/status/2005855695787507912?s=20
2015 की भेंट को याद किया
प्रधानमंत्री मोदी ने 2015 में ढाका में खालिदा जिया से हुई अपनी भेंट को भी याद किया, जो उनके पद संभालने के एक साल बाद हुई थी। उन्होंने लिखा, “मुझे 2015 में ढाका में उनसे हुई अपनी गर्मजोशी भरी मुलाकात याद है। हमें उम्मीद है कि उनकी सोच और विरासत हमारी साझेदारी को आगे भी राह दिखाती रहेगी। उनकी आत्मा को शांति मिले।”

















