बांग्लादेश में भारत विरोधी उस्मान हादी की हत्या के बाद पूरे देश में हिन्दुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा हो रही है। इसी क्रम में इंकलाब मंच ने भारत के खिलाफ जहर उगला है। मंच के कट्टरपंथी सचिव अब्दुल्लाह अल जब्बार ने अंतरिम सरकार से बांग्लादेश में काम करने वाले भारतीयों के वर्क परमिट रद्द करने की मांग की है। इसके लिए मोहम्मद यूनुस की सरकार को सीधे चुनौती देते हुए 24 दिनों का अल्टीमेटम दे दिया है।
कौन था उस्मान हादी?
शरीफ उस्मान बिन हादी (या उस्मान हादी) इंकलाब मंच का संस्थापक और प्रवक्ता था। ये पिछले साल जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा था, जिसने शेख हसीना की सरकार को गिरा दिया था। हादी काफी विवादास्पद नेता था। उसकी राजनीति भारत विरोध पर टिकी हुई थी। इसके साथ ही हादी ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का मुखर समर्थक था। वह अक्सर इसका नक्शा शेयर करते थे, जिसमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बांग्लादेश में शामिल दिखाया जाता था।
12 दिसंबर 2025 को ढाका के बिजॉयनगर इलाके में रिक्शा में बैठे हादी पर अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। उसे बेहद गंभीर हालत में 15 दिसंबर को सिंगापुर ले जाया गया, लेकिन 18 दिसंबर को उसकी मौत हो गई। मौत के बाद ढाका में उसका जनाजा निकला, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए। यूनुस सरकार ने भी शोक दिवस घोषित किया था।
हत्या के बाद क्या हुआ?
हादी की मौत के बाद इंकलाब मंच के समर्थकों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। ढाका के शाहबाग, शहीद मीनार जैसे जगहों पर रैलियां और ब्लॉकेड हुए। संगठन ने हत्या को राजनीतिक साजिश बताया और सरकार पर आरोप लगाया कि वो जांच में गंभीर नहीं है। पुलिस ने अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी फैसल करीम और कुछ अन्य फरार बताए जा रहे हैं। बांग्लादेश पुलिस का दावा था कि कुछ संदिग्ध हलुआघाट सीमा से मेघालय (भारत) में घुस गए, लेकिन भारत की तरफ से बीएसएफ और मेघालय पुलिस ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। बीएसएफ के IG ओ.पी. उपाध्याय ने कहा कि ऐसा कोई सबूत या रिपोर्ट नहीं है। मेघालय पुलिस ने भी कहा कि गारो हिल्स में संदिग्धों की कोई जानकारी नहीं मिली।
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इंकलाब मंच का अल्टीमेटम
28 दिसंबर 2025 को ढाका के शाहबाग में इंकलाब मंच के सचिव अब्दुल्लाह अल जब्बार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उसने सरकार को 24 दिनों का समय दिया कि हत्या के सभी आरोपी—मास्टरमाइंड, हमलावर, मदद करने वाले और पनाह देने वाले का ट्रायल पूरा हो जाए। उन्होंने कहा, “हत्यारे, मास्टरमाइंड, सहयोगी, भागने में मदद करने वाले और पनाह देने वाले समेत पूरे स्क्वॉड का ट्रायल अगले 24 दिनों में पूरा हो जाना चाहिए।”
मंच की तीन मुख्य मांगें हैं
- हत्या केस में स्पीड ट्रायल ट्रिब्यूनल बनाया जाए।
- बांग्लादेश में काम करने वाले भारतीयों के वर्क परमिट रद्द किए जाएं, ताकि “संप्रभुता” बची रहे।
- अगर भारत फरार दोषियों को वापस नहीं करता, तो अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारत के खिलाफ केस किया जाए।
जब्बार ने आगे कहा कि सिविल और मिलिट्री इंटेलिजेंस में “फासीवादी सहयोगियों” की पहचान होनी चाहिए। अगर ये मांगें नहीं मानी गईं, तो बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। संगठन ने पहले भी 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठा, इसलिए अब समय बढ़ाकर 24 दिन कर दिया। अभी तक अंतरिम सरकार की तरफ से इन मांगों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। कानून सलाहकार आसिफ नजरुल ने कहा था कि केस स्पीड ट्रायल ट्रिब्यूनल में जाएगा, जहां 90 दिनों में सुनवाई पूरी हो सकती है। लेकिन इंकलाब मंच इसे काफी नहीं मान रहा।

















