बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस के राज में हिंदुओं पर हमले जारी हैं। यहां के गंभीर हालात पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) की ओर से जनवरी 2026 की शुरुआत में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, मुहम्मद यूनुस के राज में पिछले छह महीनों में अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं की टारगेट करके हत्याएं की गईं।
6 जून, 2025 से 5 जनवरी, 2026 के बीच बांग्लादेश के सभी 8 डिवीजनों और 45 जिलों में 116 अल्पसंख्यक लोगों की हत्या कर दी गई, जिनमें से अधिकतर हिंदू समुदाय के थे। वहीं कुछ लोग बौद्ध और ईसाई समुदाय के भी थे।
अल्पसंख्यकों को टारगेट करके की हत्याएं गईं : रिपोर्ट
रिपोर्ट बताती है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की हत्या के 116 मामलों में 12 मामले मॉब लिंचिंग के थे। इसमें देश के अंदर हिंदुओं के साथ अन्य अल्पसंख्यकों को टारगेट करके हत्याएं की गईं। इसके अलावा हिरासत में या संदिग्ध हालात में मौतें और झूठे आरोपों (जैसे ईशनिंदा के आरोप) के बाद की गई हत्याएं भी शामिल हैं।
मानवाधिकार संगठन के अनुसार ये घटनाएं अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में टारगेटेड हमलों का एक पैटर्न है। कुछ जिलों में बार-बार ऐसी घटनाओं का होना दर्शाता है कि वहां के हालात कितने ज्यादा खतरनाक हैं। बताया जा रहा है कि सरकार, पुलिस और प्रशासन की तरफ से यहां बड़ी लापरवाही हो रही है। कई मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं होती। पीड़ित परिवारों को डराया-धमकाया जाता है और आरोपियों पर कार्रवाई न के बराबर होती है। इससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।
दिसंबर 2025 में सबसे अधिक 51 हिंसक घटनाएं हुईं
बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई यूनिटी काउंसिल ने बताया कि यहां दिसंबर 2025 में सबसे अधिक 51 हिंसक घटनाएं हुईं। इनमें हत्याएं, हमले, चोरी, लूटपाट, आगजनी, घरों, व्यवसायों, मंदिरों, जमीन पर अवैध कब्जे के अलावा झूठे धार्मिक आरोपों में हिरासत और बलात्कार के मामले शामिल हैं। रिपोर्ट में चेताया गया है कि अगर समय रहते इस हिंसा को नहीं रोका गया तो बांग्लादेश की स्थिरता, देश की अपनी और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार जिम्मेदारियों पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
‘अल्पसंख्यक समुदाय डर के माहौल में जी रहे’
ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज ने बांग्लादेश में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा पर गहरी चिंता जताते हुए इस बात पर जोर दिया कि अल्पसंख्यक समुदाय डर और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं। उन्होंने उनकी सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सरकार से दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने मांग की।
तख्तापलट होने के बाद से हिंदुओं पर लगातार हो रहे हमले
गौरतलब है कि बांग्लादेश में तख्तापलट होने के बाद से अल्पसंख्यक डर के साये में जीने को मजबूर हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद से यहां आए दिन सबसे अधिक हिंदुओं को टारगेट किया जा रहा है। 18 दिसंबर को मैमनसिंह में दीपू चंद्र दास को सरेआम जलाना और पीट-पीटकर मार डालना, कमजोर अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लगातार हो रहे अत्याचार का एक और उदाहरण है।
इसके बाद से लगातार हिंदुओं पर हमले और उनकी हत्याएं हो रही हैं। 60 साल के जाने-माने हिंदू गायक और शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के हिंदू नेता प्रोलॉय चाकी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई, जबकि 28 साल के समीर (समीर) कुमार दास को भीड़ ने पीट-पीटकर और चाकू मारकर मार डाला। मृतक प्रोलॉय चाकी के परिवार ने आरोप लगाया कि जेल अधिकारी ने उन्हें पर्याप्त चिकित्सा देखभाल नहीं दी जिससे उनकी मौत हो गई।
















