भुवनेश्वर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद स्वतंत्रता के बाद भारत में व्यक्तित्व निर्माण का सबसे बड़ा “मुक्त विश्वविद्यालय” बनकर उभरी है। वर्ष 1949 से विद्यार्थी परिषद ने वैचारिक स्पष्टता के साथ सशक्त नेतृत्व तैयार किया है और एक व्यापक युवा आंदोलन का निर्माण किया है। राउरकेला में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, ओडिशा (पश्चिम) के 50वें राज्य अधिवेशन के उदघाटन के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि विद्यार्थी परिषद के गठन के 76 वर्ष पूरे हो चुके हैं और इस संगठन ने ओडिशा के सामाजिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है।
उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि 34 वर्ष पूर्व वे राउरकेला के एक प्रांतीय अधिवेशन में एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में शामिल हुए थे और आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में उसी मंच पर उपस्थित होना उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है। वर्ष 1983 से 2025 तक की यह यात्रा केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति और वैचारिक प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि स्वामी विवेकानंद, शहीद भगत सिंह, बिरसा मुंडा, बक्सी जगबंधु, वीर सुरेन्द्र साय और वीर बाजी राउत जैसे महापुरुष युवा पीढ़ी के प्रेरणास्रोत हैं, जिन्होंने भौतिक सुखों का त्याग कर देश और समाज के लिए अपने जीवन को समर्पित किया। विद्यार्थी परिषद का विचार कोई नया विचार नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और शिक्षा परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है।

उन्होंने राउरकेला को ‘लघु भारत’ बताते हुए कहा कि सुंदरगढ़ और पश्चिम ओडिशा में विद्यार्थी परिषद का कार्य पिछले 40–45 वर्षों से निरंतर चल रहा है। राउरकेला के सरस्वती शिशु मंदिर से प्रारंभ हुई ‘शिशु वाटिका’ की अवधारणा आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत केवल अंग्रेजी शासन के दौरान ही पराधीन नहीं रहा, बल्कि दसवीं से उन्नीसवीं शताब्दी तक लंबे समय तक विदेशी आक्रमणों का सामना किया, बावजूद इसके भारतीय अस्मिता जीवित रही। केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले 50 वर्षों का नेतृत्व देश की युवा पीढ़ी के हाथों में होगा। उन्होंने कहा कि 1949 से विद्यार्थी परिषद युवाओं के भीतर राष्ट्रभक्ति की ज्योति को निरंतर प्रज्ज्वलित करती आ रही है।
राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के इस आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक वटवृक्ष की तरह है, जिसकी एक सशक्त शाखा के रूप में विद्यार्थी परिषद कार्य कर रही है। विकसित ओडिशा और विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को सात प्रमुख दायित्व निभाने का आह्वान किया। इनमें 2036 में ओडिशा गठन के शताब्दी वर्ष तक समृद्ध ओडिशा का संकल्प, मातृभाषा में शिक्षा को प्रोत्साहन, कुपोषण-मुक्त ओडिशा, कार्यशील जनसंख्या को 75 प्रतिशत तक बढ़ाना, नौकरी खोजने के बजाय रोजगार सृजन की मानसिकता विकसित करना, वैश्विक समस्याओं के समाधान में अग्रणी भूमिका निभाना तथा पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देना शामिल है। इस कार्यक्रम में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो आशुतोष मांडावी, प्रदेश अध्यक्ष डा संजीव कुमार नायक, प्रदेश मंत्री श्वेतांशु शेखर बाराई व अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

















