कांग्रेस गठबंधन फिर एक्सपोज: इन तीन घटनाओं से समझें देश के खिलाफ हो रही साजिश
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कांग्रेस गठबंधन फिर एक्सपोज: इन तीन घटनाओं से समझें देश के खिलाफ हो रही साजिश

राहुल गांधी की जर्मनी में मैन्युफैक्चरिंग आलोचना, पृथ्वीराज चव्हाण के ऑपरेशन सिंदूर पर यू-टर्न और संजय राउत के 'भूकंप' दावे – क्या कांग्रेस गठबंधन भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को कमजोर करने की साजिश रच रहा है? तथ्यों से एक्सपोज।

Written byआशीष कुमार 'अंशु'आशीष कुमार 'अंशु' — edited by कुलदीप सिंह
Dec 19, 2025, 12:31 pm IST
in विश्लेषण
Congress Allaince anti India Act

प्रतीकात्मक तस्वीर

हाल के दिनों में तीन महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान और घटनाएं सामने आई हैं, जो भारत की रक्षा क्षमता, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई प्रतीत होती हैं। ये घटनाएं कांग्रेस और उसके गठबंधन सहयोगियों से जुड़ी हैं, और इनमें एक पैटर्न नजर आता है जो विदेशी हितों को लाभ पहुंचाने और घरेलू रक्षा उद्योग को कमजोर करने की दिशा में इशारा करता है।

1.  राहुल गांधी की जर्मनी यात्रा और भारतीय मैन्युफैक्चरिंग की आलोचना:

दिसंबर 2025 में जर्मनी के म्यूनिख में बीएमडब्ल्यू प्लांट की यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर गिरावट पर है और देश को उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने जर्मन मैन्युफैक्चरिंग की प्रशंसा की, जबकि भारतीय प्रयासों को कमतर बताया। यह बयान विदेशी धरती पर दिया गया, जब संसद सत्र चल रहा था।

2.  पृथ्वीराज चव्हाण के ऑपरेशन सिंदूर पर बदलते बयान:

पूर्व महाराष्ट्र मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर (पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत की सैन्य कार्रवाई) के दौरान पहले भारतीय सफलता की सराहना की थी। लेकिन दिसंबर 2025 में उन्होंने दावा किया कि पहले दिन भारत “पूरी तरह हार गया” था, भारतीय विमान मार गिराए गए, और भारतीय वायुसेना “डरकर दुबक गई” तथा पूरी तरह ग्राउंडेड हो गई। उन्होंने माफी मांगने से इनकार कर दिया और जांच की मांग की।

3.  संजय राउत का 19 दिसंबर को ‘बड़ा घटना’ का दावा:

शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) नेता संजय राउत ने दावा किया कि 19 दिसंबर 2025 को दिल्ली में “राजनीतिक भूकंप” आएगा, जिससे नरेंद्र मोदी सरकार गिर सकती है। उन्होंने इसका केंद्र अमेरिका बताया और बीजेपी नेताओं को दिल्ली न छोड़ने की सलाह का
हवाला दिया।

ये तीनों घटनाएं अलग-अलग लगती हैं, लेकिन इन्हें जोड़कर देखें तो एक संभावित पैटर्न उभरता है और वह भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को कमजोर दिखाने का प्रयास, विदेशी हथियार विक्रेताओं (जर्मनी, अमेरिका) के हितों को बढ़ावा, और राष्ट्रीय सुरक्षा पर संदेह पैदा करना।

कांग्रेस गठबंधन की मंशा का एक्सपोज

कांग्रेस और उसके गठबंधन सहयोगी (जैसे शिवसेना: उद्धव बालासाहेब ठाकरे) इन बयानों के जरिए एक सुनियोजित नैरेटिव बना रहे हैं, जिसका उद्देश्य भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को चुनौती देना और विदेशी आयात को बढ़ावा देना प्रतीत होता है।

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि:

मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले (26 नागरिक मारे गए) के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। भारत ने 9 आतंकी ठिकानों पर प्रिसिजन स्ट्राइक की, मुख्य रूप से स्वदेशी और रूसी/फ्रेंच/इजरायली उपकरणों से। पाकिस्तान के जवाबी हमलों में चीनी हथियार (जे-10सी, एचक्यू-09, पीएल -15ई जेट्स) बड़े पैमाने पर फेल हुए – कई रिपोर्ट्स (ऑस्ट्रेलियन नेशनल सिक्योरिटी कॉलेज, एयरफोर्सेस मंथली) में कहा गया कि चीनी एयर डिफेंस सिस्टम भारतीय मिसाइलों को रोकने में असफल रहे। भारत ने पाकिस्तानी एयरबेस और कमांड सेंटर्स को नुकसान पहुंचाया, जबकि पाकिस्तानी ड्रोन्स और मिसाइलें ज्यादातर असफल रहीं। संघर्ष 10 मई को सीजफायर से खत्म हुआ, और इसे भारत की रणनीतिक सफलता माना गया।

चव्हाण के बयानों का विरोधाभास

मई में चव्हाण ने भारतीय कार्रवाई को पराक्रम बताया, लेकिन दिसंबर में इसे ‘पहले दिन हार’ करार दिया। यह बदलाव संदिग्ध है, क्योंकि आधिकारिक रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण (कार्नेगी एंडाउमेंट, स्टिमसन सेंटर) में भारत की शुरुआती चुनौतियों के बावजूद समग्र सफलता स्वीकारी गई। चव्हाण का दावा कि वायुसेना ‘डरकर दुबकी’ – सेना का अपमान है, जिसे बीजेपी ने ‘पाकिस्तानी नैरेटिव’ करार दिया।

राहुल की विदेशी आलोचना

जर्मनी (बीएमडब्ल्यू प्लांट) में मैन्युफैक्चरिंग की गिरावट का बयान – जबकि डेटा (आईआईपी ग्रोथ 5.4% 2025 में) विपरीत दिखाता है। विशेष रूप से डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस, जब जर्मनी लंबे समय से भारत को हथियार बेचने की कोशिश कर रहा है (लेकिन भारत रूस, फ्रांस, इजरायल से खरीद रहा)।

राउत की टाइमिंग

19 दिसंबर का दावा – ठीक राहुल की जर्मनी यात्रा और चव्हाण के बयान के बाद। संकेत ‘क्लासिफाइड फाइल्स’ या अमेरिकी एंगल से कुछ ‘बड़ा’ आने का, जो मोदी सरकार को अस्थिर करे।

तथ्यात्मक आधार पर मंशा

जर्मनी और अमेरिका भारत को फाइटर जेट्स/हथियार बेचने के लिए दबाव बनाते रहे हैं, लेकिन भारत की आत्मनिर्भर भारत नीति (मेक इन इंडिया) से स्वदेशी/रूसी/फ्रेंच खरीद बढ़ी। यदि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय उपकरण “कमतर” साबित होते, तो विदेशी आयात का दबाव बढ़ता। लेकिन तथ्य उलटे: चीनी सिस्टम फेल हुए, जो पाकिस्तान को दिए गए थे। कांग्रेस इकोसिस्टम (यूट्यूब, सोशल मीडिया) ऐसे नैरेटिव को बढ़ा सकता है, आधी सच्चाई-अधी झूठ मिलाकर। यदि ‘क्लासिफाइड फाइल्स’ (अमेरिकी/यूरोपीय) आतीं, तो मीडिया शोर मचाता। इसका फायदा चीन को फायदा (अपने हथियारों की असफलता छिपाने में) होता, और भारत पर आयात का दबाव बढ़ता।

विदेशी एजेंट की तरह काम कर रहा विपक्ष

विपक्ष का यह प्रयास सेना का मनोबल गिराने और विदेशी मोहरे बनने जैसा लगता है। यह पैटर्न राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सफलता (चीनी हथियारों की असफलता सहित) ने स्वदेशी रक्षा को मजबूत किया, लेकिन ये बयान उसे कमजोर दिखाने की कोशिश करते हैं।

साजिश की संभावना

ये घटनाएं मिलकर एक माहौल बना रही हैं जहां विदेश से ‘लीक’ या प्रोपगैंडा के जरिए भारत की रक्षा को भ्रष्टाचार/असफलता से जोड़ा जाए। लेकिन तथ्य मजबूत हैं: भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में रणनीतिक जीत हासिल की, चीनी सिस्टम फ्लॉप हुए, और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ जारी है। कांग्रेस गठबंधन की ऐसी कोई योजना (विदेशी हितों के लिए प्रोपगैंडा) पहले की तरह नाकाम रहेगी, क्योंकि राष्ट्रहित और तथ्य इससे ऊपर हैं। भारत की आत्मनिर्भरता मजबूत हो रही है, और ऐसे प्रयास केवल विपक्ष की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाएंगे।

Topics: राहुल गांधी की जर्मनीमैन्युफैक्चरिंग आलोचनापृथ्वीराज चव्हाण ऑपरेशन सिंदूरकांग्रेस गठबंधन विदेशी साजिशRahul Gandhi's visit to Germanyसंजय राउतcriticism of manufacturingSanjay RautPrithviraj Chavanऑपरेशन सिंदूरforeign conspiracyCongress alliance
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार अंशु पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों तक मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान STEP से जुड़े रहे हैं। [Read more]
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