रूस-यूक्रेन युद्ध के फरवरी 2026 में 4 साल पूरे हो जाएंगे, लेकिन अभी तक ये युद्ध लगातार चल रहा है। इसे रोकने के लिए लिए 15 दिसंबर 2025 को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में यूक्रेन को लेकर एक अहम बैठक हुई। इसमें अमेरिकी शांति प्रस्ताव पर यूरोपीय देशों ने कहा है कि वो यूक्रेन में ‘मल्टीनेशनल फोर्स’ का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। एक बयान में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत 8 देशों की फोर्स ‘कोएलिशन ऑफ विलिंग’ के तहत यूक्रेन की सेनाओं को ट्रेनिंग देगी।
बैठक में कौन-कौन शामिल था
बैठक में यूक्रेन के ज़ेलेंस्की के अलावा जर्मनी के मर्ज़, ब्रिटेन के स्टार्मर, फ्रांस के मैक्रों, इटली की जॉर्जिया मेलोनी, पोलैंड के डोनाल्ड टस्क, फिनलैंड के अलेक्जेंडर स्टब, डेनमार्क, नीदरलैंड्स, नॉर्वे और स्वीडन के प्रधानमंत्री भी थे। यूरोपीय यूनियन की ओर से यूरोपीय कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला फॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने हिस्सा लिया। अमेरिकी डेलिगेशन का नेतृत्व विटकॉफ और कुश्नर कर रहे थे। ये लोग दो दिनों तक बातचीत करते रहे, जिसमें रविवार को ज़ेलेंस्की और अमेरिकी प्रतिनिधियों की लंबी मीटिंग हुई।
अमेरिका का पीस प्लान क्या है
अमेरिका ने एक नया पैकेज पेश किया, जिसमें यूक्रेन को मजबूत सिक्योरिटी गारंटी देने की बात है। इन गारंटी को नाटो के आर्टिकल 5 जैसा बताया गया, यानी अगर भविष्य में रूस फिर हमला करे तो यूरोपीय देश कानूनी रूप से बाध्य होंगे कि यूक्रेन की मदद करें। यूरोप एक मल्टीनेशनल फोर्स का नेतृत्व करेगा, जो यूक्रेन के अंदर काम करेगी – जैसे यूक्रेन की आर्मी को ट्रेन करना, हवा की सुरक्षा और समुद्र की सेफ्टी। अमेरिका सीजफायर की मॉनिटरिंग करेगा, लेकिन अपने सैनिक यूक्रेन में नहीं भेजेगा। यूक्रेन अपनी आर्मी को 8 लाख सैनिकों तक रख सकेगा। कब्जे वाले इलाकों को इकोनॉमिक फ्री जोन बनाने और ज़ापोरिज्जिया न्यूक्लियर प्लांट की बिजली को 50-50 बांटने जैसे आइडिया भी चर्चा में आए।
सिक्योरिटी गारंटी पर क्या सहमति बनी
यूरोपीय नेताओं ने कहा कि वो भविष्य में रूस के हमले के खिलाफ यूक्रेन को सैन्य, इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स, आर्थिक और डिप्लोमैटिक मदद देंगे। ये गारंटी कानूनी रूप से बाइंडिंग होंगी, लेकिन हर देश की अपनी संसद से अप्रूवल लेना पड़ेगा। ज़ेलेंस्की ने इसे “रियल प्रोग्रेस” बताया, हालांकि इलाकों पर अभी भी मतभेद हैं। स्टार्मर ने कहा कि बिना मजबूत गारंटी के कोई डील काम नहीं करेगी, क्योंकि पुतिन फिर मौका देखकर वापस आएंगे। मर्ज़ ने अमेरिकी प्रस्ताव को “काफी बड़ा” बताया और कहा कि 2022 के रूसी इन्वेजन के बाद पहली बार असली पीस प्रोसेस की उम्मीद दिख रही है।
इसे भी पढ़ें: ट्रंप ने BBC पर ठोंका 5 अरब डॉलर का मानहानि मुकदमा: क्या है पूरा मामला?
इलाकों और अन्य मुद्दों पर स्थिति
सबसे बड़ा झगड़ा कब्जे वाले इलाकों, खासकर पूर्वी डोनबास पर है। ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन को कुछ इलाके रूस को देने पड़ सकते हैं, क्योंकि वो पहले ही खो चुके हैं। ज़ेलेंस्की ने माना कि इलाकों पर बात हुई, लेकिन पोजिशन अलग-अलग हैं। वो फ्रंटलाइन को फ्रीज करने के पक्ष में हैं, पूरा डोनबास छोड़ने के नहीं। यूरोपीय नेताओं ने कहा कि इलाकों पर फैसला यूक्रेन के लोग करेंगे, जब मजबूत गारंटी मिल जाएंगी – शायद रेफरेंडम से। फाइनेंशियल मदद के लिए रूस के फ्रोझन एसेट्स का इस्तेमाल और यूक्रेन की EU में एक्सेशन को सपोर्ट करने की बात भी हुई।
नेताओं के बयान क्या थे
ज़ेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका से बातें मुश्किल थीं, लेकिन सिक्योरिटी गारंटी पर असली तरक्की हुई। विटकॉफ ने मीटिंग के बाद कहा कि “काफी प्रोग्रेस हुई”। ट्रंप ने पुतिन और ज़ेलेंस्की से बातें बताईं और कहा कि हम पहले से ज्यादा करीब हैं। मर्ज़ ने चेतावनी दी कि अगर यूक्रेन गिरा तो पुतिन नहीं रुकेगा। यूरोपीय लीडर्स ने जॉइंट स्टेटमेंट में ट्रंप के प्रयासों की तारीफ की और कहा कि कुछ भी फाइनल नहीं, सब कुछ एक साथ तय होगा। बैठक में कुल मिलाकर पॉजिटिव माहौल रहा, लेकिन बड़े फैसले अभी बाकी हैं।











