गोवा अपने सुंदर समुद्री तटों, प्राकृतिक सौंदर्य और विशिष्ट स्थापत्य कला के कारण पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यह भारत का सबसे छोटा राज्य है, किंतु इसका इतिहास अत्यंत संघर्षपूर्ण और गौरवशाली रहा है। लगभग 450 वर्षों तक गोवा पर पुर्तगालियों का शासन रहा। 19 दिसंबर को हर वर्ष गोवा मुक्ति दिवस मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन गोवा को पुर्तगाली शासन से स्वतंत्रता मिली।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका
भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिल गई थी, लेकिन गोवा, दादरा नगर हवेली, दीव और दमन जैसे कई क्षेत्र अभी भी विदेशी शासन में थे। अंग्रेजों के जाने के बाद फ्रांस ने समझौते के तहत पुडुचेरी जैसे क्षेत्रों को भारत को सौंप दिया, परंतु पुर्तगालियों ने अपने अधीन क्षेत्रों को छोड़ने से इंकार कर दिया। इन क्षेत्रों की स्वतंत्रता के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया ने सत्याग्रह का आरंभ किया। पुर्तगाल सरकार ने इस आंदोलन को दबाने के लिए कठोर कदम उठाए और भारी संख्या में सैनिक तैनात कर दिए। इससे गोवा, दादर नगर हवेली और अन्य क्षेत्रों में आजादी का संघर्ष और कठिन हो गया। ऐसे समय में कुछ साहसी युवाओं ने आजाद गोमांतक दल की स्थापना की। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महाराष्ट्र प्रांत के कार्यकर्ता बाबाराव भिड़े और विनायकराव आप्टे से संपर्क किया। इसके बाद संघ के नेतृत्व में दादर नगर हवेली को मुक्त कराने की योजना बनी। इस अभियान के लिए धन जुटाने का कार्य सुधीर फड़के ने किया।
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गोवा मुक्ति आंदोलन- स्वयंसेवकों के त्याग से स्वतंत्रता
31 जुलाई 1954 को लगभग 200 युवकों का एक जत्था सिलवासा के लिए रवाना हुआ। रास्ते में कई और युवक इस दल से जुड़ते गए। देशभक्ति से ओतप्रोत यह समूह 2 अगस्त 1954 को सिलवासा पहुंचा और वहां भारत का तिरंगा फहराया। इस प्रकार दादरा नगर हवेली को स्वतंत्र कर भारत सरकार को सौंप दिया गया। हालांकि, गोवा के लिए भारत सरकार ने प्रारंभ में सेना भेजने से मना कर दिया। इसके बाद 1955 से संघ के स्वयंसेवक गोवा मुक्ति आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हो गए। कर्नाटक से जगन्नाथराव जोशी के नेतृत्व में लगभग 3000 स्वयंसेवक गोवा पहुंचे, जिनमें महिलाएं भी थीं। कई स्वयंसेवकों को 10 वर्षों तक की कठोर सजा दी गई। देशभर में आंदोलन तेज होने के बाद अंततः भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय प्रारंभ किया। 18 दिसंबर 1961 को शुरू हुआ यह अभियान केवल 36 घंटे चला। 19 दिसंबर 1961 को गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्ति मिल गई। इस प्रकार स्वयंसेवकों के त्याग, जनआंदोलन और भारतीय सेना के पराक्रम से गोवा भारत का अभिन्न अंग बना।
















