दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को आत्मघाती विस्फोट करने वाले डॉक्टर आतंकी उमर उन-नबी के अवशेष एक महीने से अधिक समय से लोक नायक अस्पताल की मोर्चरी में अनक्लेम्ड पड़े हैं। राजधानी दिल्ली के लोक नायक अस्पताल की मोर्चरी में एक महीने से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन आत्मघाती हमलावर उमर उन-नबी के अवशेष आज भी अनक्लेम्ड पड़े हैं। इसमें उसके एक पैर का टुकड़ा और कुछ मांस के टुकड़े शामिल हैं, जिन्हें कोई लेने नहीं आया। अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि परिवार ने इन्हें लेने से इनकार कर दिया है।
MBBS डॉक्टर से आत्मघाती आतंकी बनने तक का सफर
कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला उमर उन-नबी कोई साधारण व्यक्ति नहीं था। 2017 में श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पूरा करने वाला यह शख्स अनमैरिड था और फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहा था। पिछले कुछ सालों में उसने श्रीनगर, अनंतनाग और फरीदाबाद के अस्पतालों में नौकरी की। लेकिन उसके दिमाग में एक खतरनाक साजिश थी।
दिल्ली पहुंचकर तीन घंटे की तैयारी और फिर धमाका
10 नवंबर को सुबह करीब 8 बजे दिल्ली में दाखिल होने वाला उमर अपनी हुंडई i20 कार में अकेला था। पूर्वी, मध्य और दक्षिणी दिल्ली घूमने के बाद दोपहर में वह सुनहरी मस्जिद की पार्किंग में पहुंचा। वहां करीब तीन घंटे कार में बैठा रहा। शायद आखिरी तैयारी कर रहा था। शाम साढ़े छह बजे पार्किंग से निकला और कुछ ही मिनटों बाद विस्फोट हो गया। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखता है कि वह अकेला था।
DNA टेस्ट से हुई पहचान
विस्फोट के बाद कार के टुकड़ों से जुड़ा एक पैर का हिस्सा मिला। शक उमर पर गया, तो पुलवामा से उसकी मां और भाई को दिल्ली बुलाया गया। डीएनए टेस्ट से कन्फर्म हो गया कि ये अवशेष उमर के ही थे। पुलिस ने सैकड़ों सीसीटीवी कैमरे खंगाले, फरीदाबाद से दिल्ली तक के रूट ट्रेस किए। सब कुछ इशारा करता था कि उमर एक बड़े टेरर मॉड्यूल का हिस्सा था, जिसे जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहले ही ध्वस्त करना शुरू कर दिया था।
2800 किलो आरडीएक्स केस से भी कनेक्शन
उमर डॉक्टर मुजम्मिल शकील और अदील राथर का करीबी था, जिन्हें अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 2800 किलो आरडीएक्स के साथ गिरफ्तार किया। यह मामला अब एनआईए के हाथ में है।
यूएपीए समेत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
यूएपीए, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत केस दर्ज हो चुका है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अभी भी जांच में सहयोग कर रही है।

















