लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने न सिर्फ राष्ट्रगीत पर सवाल खड़े किए, बल्कि उसके रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को लेकर भी अपशब्द कहे। ओवैसी ने बंकिम चंद्र की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा, “वह बीए की परीक्षा में सात नंबर से फेल हो गए थे, इसलिए उन्हें साहित्यिक दिग्गज कहना गलत है।”
अब सोशल मीडिया पर एआईएमआईएम नेता द्वारा की गई अपमानजनक टिप्पणी का वीडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रहा है। यूजर्स उनकी संकीर्ण मानसिकता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर डिग्री ही योग्यता का सही पैमाना है तो इस तरह मौलाना आजाद ने तो औपचारिक रूप से हाई स्कूल भी पूरा नहीं किया था, लेकिन नेहरू ने उन्हें आजाद भारत का पहला शिक्षा मंत्री बनाया। दुनिया के सबसे मशहूर शायरों में से एक मिर्जा गालिब की भी कोई औपचारिक स्कूली शिक्षा नहीं हुई थी।
ओवैसी डिग्री की बात कर बंकिम चंद्र की प्रतिभा को नजरअंदाज कर रहे
हितेश सतावत नाम के यूजर्स ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “असदुद्दीन ओवैसी डिग्री की बात कर बंकिम चंद्र की प्रतिभा को नजरअंदाज कर रहे हैं। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् ने भारत की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि आदि गुरु शंकराचार्य के पास भी कोई डिग्री नहीं थी, लेकिन जिस उम्र में ओवैसी ने बोलना सीखा, उस उम्र तक उन्होंने सैकड़ों ग्रंथ लिख दिए थे। वह सात जन्मों में भी यह नहीं समझ पाएंगे।
The author of Vande Matram, Bankim Chandra failed BA exam by 7 marks so calling him literary giant is wrong – Owaisi
If the degree is criteria, let's have a look at the degrees of top 2 Islamic icons
-Maulana Azad: Not even a school pass out
-Mirza Ghalib: No formal Schooling… pic.twitter.com/7slDQpvHma— Mr Sinha (@Mrsinha) December 11, 2025
देबा प्रतीम ने औवेसी के वीडियो पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अच्छी क्लासिकल और मॉडर्न शिक्षा हासिल की। उन्होंने हुगली मोहसिन कॉलेज और फिर कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से साल 1857 में बीए की डिग्री प्राप्त की। वह कलकत्ता यूनिवर्सिटी के पहले ग्रेजुएट में से एक थे।
बंकिम चंद्र चटर्जी भारत के पहले ग्रेजुएट थे
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपनी स्कूली शिक्षा मिदनापुर के सरकारी स्कूल से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने हुगली मोहसिन कॉलेज से आगे की पढ़ाई। फिर कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से उन्होंने साल 1857 में बीए की डिग्री हासिल की। उन्हें भारत का पहला ग्रेजुएट और उनके बैच को देश का पहला ग्रेजुएशन बैच भी कहा जाता है। बताया जाता है कि अंग्रेजों ने देश में ग्रेजुएशन सिस्टम की शुरुआत कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से की थी। यही नहीं बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने साहित्य के क्षेत्र में भी अमूल्य योगदान दिया है। उनकी पहली अंग्रेजी रचना राजमोहन की वाइफ थी। इसके बाद उन्होंने 1865 में बंगला भाषा में पहला उपन्यास दुर्गेशनंदिनी लिखा। फिर कपालकुंडला, विषवृक्ष, कृष्णकांत का वसीयतनामा, आनंदमठ और सीताराम जैसे उपन्यासों ने उन्हें इतिहास के पन्नों में अमर बना दिया।
सबसे प्रसिद्ध रचना आनंदमठ
आनंदमठ बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की सबसे प्रसिद्ध रचना मानी जाती है। इसी उपन्यास में उन्होंने पहली बार वंदे मातरम् गीत की रचना की थी, जिसे 1937 में भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया

















