भुवनेश्वर में गत मई में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक आयोजित हुई। इसमें पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, दिल्ली, पूर्वोत्तर, तमिलनाडु सहित देशभर से कुल 400 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में ‘शैक्षिक सुधारों को परिणामकारी बनाने एवं धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक’, ‘सशस्त्र माओवाद के समाप्तिकाल में शहरी माओवाद एक गंभीर चुनौती’, ‘संगठित आपराधिक एवं जिहादी मानसिकता से महिलाओं के शोषण तथा मतांतरण पर लगे लगाम’ एवं ‘वैश्विक अनिश्चितता के दौर में संयम एवं सजगता का सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प समय की मांग’ विषयक चार प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया गया।
इसके साथ ही राष्ट्रीय परिदृश्य, शिक्षा व्यवस्था, युवाओं की भूमिका, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक-आर्थिक विषयों तथा समसामयिक चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। अखिल भारतीय विचार बैठक एवं संगठनात्मक विचार बैठक के निर्णयों की समीक्षा, अभियानात्मक, कार्यक्रमात्मक एवं संगठनात्मक कार्यों का मूल्यांकन तथा आगामी वर्ष की विस्तृत कार्ययोजना का भी निर्धारण किया गया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि अन्तर्राज्यीय छात्र जीवन दर्शन (पूर्वोत्तर के छात्रों को देश के अलग-अलग हिस्सों में लाकर उनके जीवन को बताने का प्रयास किया जाता है) की गौरवपूर्ण राष्ट्रीय एकात्मकता यात्रा के 60 वर्ष पूर्ण होने पर संपूर्ण भारत में कार्यक्रम आयोजित किए जाएगे। इसके अतिरिक्त ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’, ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’, आपातकाल निषेध के 50 वर्ष, श्री गुरु तेगबहादुर बलिदान दिवस के 350 वर्ष तथा संत रविदास जी के 650वें प्राकट्योत्सव जैसे विभिन्न उपलक्ष्यों पर वर्षभर देशव्यापी अभियान चलाए जाएंगे।
राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक के पूर्व 27 मई को आयोजित केंद्रीय कार्यसमिति बैठक में ‘लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना हेतु पश्चिम बंग के जनमानस का अभिनंदन’ विषयक प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा त्रि-भाषा नीति को सराहते हुए इसके पूर्ण क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। अभाविप ने इसे भारतीय भाषाओं के संवर्धन, राष्ट्रीय एकात्मता तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा कराने हेतु मांग भी की गई।
यह नीति विद्यार्थियों को बहुभाषी दक्षता प्रदान करने के साथ-साथ देश की भाषाई विविधता के संरक्षण और सुदृढ़ीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अभाविप ने बैठक के माध्यम से भारतीय उद्योग जगत से अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया, जिससे विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने की दिशा में गति प्राप्त होगी।
राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक की पूर्व संध्या पर भव्य ‘नागरिक अभिनंदन समारोह’ का आयोजन किया गया, जिसमें अभाविप के पूर्व कार्यकर्ता, व्यवसायी तथा भुवनेश्वर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस आयोजन को अपने विद्यार्थी जीवन के संघर्षों की स्मृतियों को पुनर्जीवित करने वाला बताया। साथ ही अभाविप को चरित्रवान नागरिकों एवं राष्ट्रनिष्ठ युवा नेतृत्व का निर्माण करने वाला संगठन बताया। ‘महाराज खारवेल प्रदर्शनी’ नामक एक भव्य प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें ओडिशा के स्वर्णिम इतिहास, लोक परंपराओं तथा अभाविप द्वारा वर्षभर किए गए कार्यों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी के उद्घाटन ओडिशा सरकार के आवास एवं शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्र ने किया।
कार्यक्रम के बाद अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक में पारित प्रस्ताव केवल वर्तमान चुनौतियों पर अभाविप की प्रतिक्रिया नहीं हैं, बल्कि विकसित, सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु हमारी व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि तथा दीर्घकालिक चिंतन को भी प्रतिबिंबित करते हैं।
शिक्षा व्यवस्था को अधिक परिणामकारी, छात्र-केंद्रित एवं रोजगारोन्मुख बनाने, राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष उपस्थित शहरी माओवाद जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान करने, महिलाओं के विरुद्ध संगठित अपराध, शोषण एवं कन्वर्जन के षड्यंत्रों पर अंकुश लगाने तथा वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सजग एवं उत्तरदायी नागरिक चेतना का निर्माण करने का सामूहिक संकल्प इस बैठक के माध्यम से व्यक्त हुआ है। भारत को वैश्विक नवाचार, अनुसंधान एवं ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का नेतृत्वकर्ता बनाने के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

















