उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद में पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और महाराष्ट्र के ग्राम पंचायत अधिकारियों की लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर फर्जी मगर ‘ओरिजिनल’ दिखने वाले जन्म प्रमाणपत्र बना रहा था। पुलिस ने अब तक 500 से अधिक ऐसे प्रमाणपत्र बरामद कर लिए हैं, जिन्हें संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारियों को पत्र लिखकर रद्द कराया जाएगा।
पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य पंचायत अधिकारियों की लॉगिन आईडी एक दिन के लिए 20 से 25 हजार रुपये में किराए पर लेते थे। इसके बाद महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में बैठे अपने एजेंटों के लिए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र तैयार करते थे। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर आगे आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज आसानी से बन जाते थे। पुलिस इसे देशव्यापी बड़ा रैकेट बता रही है, जो डेढ़ साल से अधिक समय से सक्रिय था।
मामला उस समय खुला जब जलालपुर निवासी रतन कुमार ने अपनी बेटी का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए विजय यादव को दिया। विजय यादव ने फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर दिया। जब रतन कुमार ने इसे जौनपुर सीएमओ कार्यालय में जमा किया तो वहां इसे फर्जी पाया गया। इसके बाद पुलिस ने छानबीन शुरू की और पूरा गिरोह बेनकाब हो गया।
पुलिस ने अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें अंकित यादव , गौतम , राज कुमार उर्फ विक्की, राशिद , अभिषेक गुप्ता के अलावा राम भारत मौर्य आदि शामिल हैं। आरोपियों के पास से 9 एंड्रॉयड मोबाइल फोन और 4 लैपटॉप बरामद हुए हैं।
जौनपुर के पुलिस अधीक्षक ने बताया, “यह गिरोह डेढ़ साल से सक्रिय था। हजारों फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए गए। हमने 500 से ज्यादा बरामद कर लिए हैं। ये प्रमाणपत्र जिस ग्राम पंचायत से जारी दिखाए गए हैं, वहां के अधिकारियों को पत्र लिखकर इन्हें रद्द कराया जाएगा।”
पुलिस द्वारा दिखाए गए एक नमूने में पश्चिम बंगाल की एक मुस्लिम महिला के माता-पिता का पता दर्ज था, लेकिन जन्म प्रमाणपत्र महाराष्ट्र की ग्राम पंचायत समलेश्वरी से जारी दिखाया गया था। ऐसे प्रमाणपत्र के आधार पर आधार कार्ड बन जाता था और फिर कोई भी सरकारी दस्तावेज हासिल किया जा सकता था।
गिरोह का सरगना ग्राम पंचायत अधिकारियों की लॉगिन आईडी एकत्र करता था और उन्हें 20-25 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से किराए पर देता था। फिर उसके एजेंट 600-700 रुपये में एक प्रमाणपत्र तैयार कर ग्राहकों को बेचते थे।
पुलिस का कहना है कि यह रैकेट राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा था, क्योंकि इसके जरिए कोई भी व्यक्ति फर्जी पहचान के साथ देश में कहीं भी दस्तावेज बना सकता था। मामले की जांच जारी है और और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

















