चक्रवाती तूफान दित्वाह ने दक्षिण एशिया के श्रीलंका, इंडोनेशिया और थाईलैंड में जमकर तबाही मचाई है। भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 900 से अधिक लोगों की मौतों की पुष्टि की जा चुकी है। कहा जा रहा है कि मरने वालों का वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है। जैसे-जैसे रेस्क्यू अभियान आगे बढ़ेगा, हताहतों की संख्या भी बढ़ने की आशंका है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा के कारण अब तक 48,000 से अधिक लोगों को विस्थापित किया गया है।
जानकारों का कहना है कि ये जलवायु संकट का ताजा उदाहरण है, जो तूफानों के पैटर्न और चरम मौसम को प्रभावित कर रहा है। हाल के दिनों में मॉनसून की भारी बारिश और एक उष्णकटिबंधीय तूफान ने दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों को पानी-पानी कर दिया है। अगर जलवायु संकट से नहीं निपटा गया तो हालात और भी बुरे हो सकते हैं।
श्रीलंका की बाढ़
श्रीलंका में चक्रवाती तूफान दित्वाह से हुई बाढ़ और भूस्खलन की मौतों का आंकड़ा रविवार को तेजी से 334 तक पहुंच गया, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं और राजधानी कोलंबो के निचले इलाके पानी में डूबे हुए हैं। ये द्वीप पर दो दशकों की सबसे बुरी प्राकृतिक आपदा है, 2004 के विनाशकारी सुनामी में वहां करीब 31,000 लोग मारे गए थे और 10 लाख से ज्यादा बेघर हो गए थे। उसके बाद ये सबसे बड़ी आपदा है। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा डिस्सनायके ने आपातकाल घोषित कर दिया है। उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, “हम अपनी इतिहास की सबसे बड़ी और चुनौतीपूर्ण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे हैं। निश्चित रूप से, हम इससे पहले मौजूद राष्ट्र से बेहतर राष्ट्र बनाएंगे।”
करीब 1 लाख 48,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं और अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं। अफसरों का कहना है कि सबसे ज्यादा प्रभावित मध्य क्षेत्र में नुकसान का पूरा पता अभी लग रहा है, क्योंकि राहत कार्यकर्ता गिरे पेड़ों और कीचड़ से भरी सड़कों को साफ कर रहे हैं। श्रीलंका की राजधानी में रविवार को निचले इलाके बाढ़ में डूब गए हैं। पूरे द्वीप पर भूस्खलन शुरू हो गया है। इसके कारण सैकड़ों मौतें हुई हैं और कई लापता हैं। कोलंबो के 155 मील उत्तर-पूर्व में मनम्पितिया कस्बे में घटते पानी के स्तर ने भारी तबाही दिखाई। एक स्थानीय व्यक्ति 72 साल के रहने वाले एस सिवनंदन ने लोकल न्यूज सेंटर पोर्टल को बताया, “मनम्पितिया बाढ़ प्रभावित कस्बा है, लेकिन इतना पानी कभी नहीं देखा।” उन्होंने कहा कि दुकानें और संपत्ति को भारी नुकसान हुआ। उनकी दुकान के सामने एक कार उल्टी पड़ी हुई थी।
मध्य वेल्लावाया की एक महिला ने बताया कि उन्हें तेज आवाज सुनाई दी और बाहर निकलकर देखा तो पहाड़ी से बोल्डर लुढ़क रहे थे, जो उनके घर के पास रुक गए। उन्होंने कहा, “मैंने पेड़ गिरते और बोल्डरों के साथ बहते देखा। हम घर लौटने से डर रहे हैं।”
इंडोनेशिया की बाढ़
इंडोनेशिया में अधिकारियों के अनुसार, 442 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 402 लापता हैं, जबकि वो सुमात्रा द्वीप के सबसे प्रभावित इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जहां हजारों लोग जरूरी सामान के बिना फंसे हैं। रविवार को सुमात्रा के कम से कम दो इलाके अभी भी पहुंच से बाहर थे, और अफसरों ने जकार्ता से दो युद्धपोत तैनात किए हैं सहायता पहुंचाने के लिए। एसोसिएटेड प्रेस ने रिपोर्ट किया कि कुछ लोग भारी बारिश से भूस्खलन, क्षतिग्रस्त सड़कों और कटी कम्युनिकेशन लाइनों के बाद खाना और पानी जुटाने में जूझ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो दिखे जहां लोग टूटे बैरिकेड्स, बाढ़ग्रस्त सड़कों और टूटे कांच से गुजरते हुए खाना, दवा और गैस हासिल करने के लिए भिड़ रहे थे। कुछ कमर तक पानी में चलकर क्षतिग्रस्त कन्वीनियंस स्टोर्स तक पहुंचे। पुलिस के प्रवक्ता फेरी वालिंटुकन ने एपी को बताया कि शनिवार शाम को दुकानों में घुसपैठ की खबरें आईं और क्षेत्रीय पुलिस तैनात की गई। वालिंटुकन ने कहा, “लूट सहायता पहुंचने से पहले हुई।” देश का सबसे प्रभावित सिबोलगा शहर और नॉर्थ सुमात्रा के सेंट्रल तपानुली जिले में सहायता धीमी पहुंच रही।
थाईलैंड की बाढ़
थाईलैंड में, जहां एक दशक की सबसे बुरी बाढ़ से कम से कम 162 लोग मारे गए, अफसर सहायता पहुंचाने और नुकसान साफ करने का काम जारी रखे हुए हैं। थाई सरकार की राहत उपायों में परिवार खोने वालों के घरों को मुआवजा शामिल है। लेकिन बाढ़ प्रतिक्रिया पर जनता की आलोचना बढ़ रही है, और दो लोकल अफसरों को कथित नाकामियों पर सस्पेंड कर दिया गया। जून से सितंबर के बीच आने वाला सालाना मॉनसून सीजन अक्सर भारी बारिश लाता है, जो भूस्खलन और फ्लैश फ्लड्स का कारण बनता। इस साल एक उष्णकटिबंधीय तूफान ने हालात बिगाड़ दिए, और इंडोनेशिया व थाईलैंड में मौतों का आंकड़ा हाल के वर्षों की सबसे ऊंचा है।
















