ब्राजील में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चल रहे कॉप30 सम्मेलन में दुनिया ने जैविक (फॉसिल) ईंधन के युग को खत्म करने की दिशा में थोड़ा-सा आगे बढ़ने का फैसला लिया है। हालांकि, इस पर वैज्ञानिकों का कहना है, इससे जलवायु संकट को रोकना मुश्किल हो जाएगा। 194 देशों ने (अमेरिका को छोड़कर) 12 घंटे की अतिरिक्त बहस के बाद एक स्वैच्छिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें फॉसिल ईंधन को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के लिए एक रोडमैप पर चर्चा शुरू करने का वादा है। कॉप अध्यक्ष आंद्रे कोरेया दो लागो ने दोपहर 1:35 बजे इसे अंतिम रूप दिया। अमेजन नदी के मुहाने पर बसे इस ‘रेनफॉरेस्ट कॉप’ में संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन चीफ साइमन स्टील भी मौजूद थे।
जमकर हुई बहसबाजी
सम्मेलन की शुरुआत 10 नवंबर को हुई थी, जब ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के नेतृत्व में 50 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि मिले। लेकिन बातचीत जल्द ही उलझ गई। एक तरफ 80 से ज्यादा विकसित और विकासशील देश फॉसिल ईंधन चरणबद्ध समाप्ति के रोडमैप के पक्ष में थे। दूसरी तरफ सऊदी अरब, उसके सहयोगी और रूस जैसे तेल उत्पादक देश इसे रोक रहे थे। शुक्रवार शाम को तो लग रहा था कि सब टूट जाएगा। मंत्रियों ने रात भर खाली हॉलों में बहस की। गुरुवार दोपहर एक आग लगने से प्रतिनिधि कार्यालय खाली कराने पड़े, लेकिन किसी को चोट नहीं आई। रात-रात भर की थकान के बावजूद, शनिवार सुबह समझौता हो गया।
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फॉसिल ईंधन से विदा?
समझौते का सबसे बड़ा हिस्सा फॉसिल ईंधन को अलविदा कहने का है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बिना इसके 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान सीमा लांघ जाएगी। दुबई के कॉप28 में ‘ट्रांजिशन अवे फ्रॉम फॉसिल फ्यूल्स’ पर सहमति बनी थी, लेकिन यहां वो बाध्यकारी नहीं, सिर्फ चर्चा का वादा है। 80 से ज्यादा देश इसे कानूनी रूप देना चाहते थे, लेकिन अरब समूह ने रोक दिया। मजदूरों के लिए ‘जस्ट ट्रांजिशन’ का जिक्र है, यानी साफ ऊर्जा पर शिफ्ट करते हुए उनकी नौकरियां बचाना। लेकिन क्रिटिकल मिनरल्स के खनन पर मानवाधिकारों की चिंता को चीन और रूस ने ब्लॉक कर दिया। देशों ने अपनी नेशनल प्लान्स (एनडीसी) में उत्सर्जन कटौती के नए लक्ष्य पेश नहीं किए। इसके लिए एक ‘एक्सेलरेटर’ प्रोग्राम बनेगा, जो अगले साल तुर्की के कॉप में रिपोर्ट देगा। टेक्स्ट कहता है, एनडीसी को पूरी तरह लागू करें और कोशिश करें बेहतर करने की।
जंगल कटाई का रोडमैप गायब
रेनफॉरेस्ट कॉप होने के बावजूद, जंगलों को बचाने का रोडमैप समझौते से बाहर हो गया है। कोलंबिया जैसे कई देशों ने शिकायत की कि ब्राजील के ‘ट्रुथ कॉप’ वादे के बावजूद उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला। सेशन रुका भी, लेकिन फैसला हो गया।

















