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होम भारत

बच्चों का लापता होना गंभीर मुद्दा, हर 8 मिनट में एक बच्चा हो जाता है गायब

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी एक समाचार रिपोर्ट का जिक्र करते हुए की, जिसमें दावा किया गया था कि देश में हर आठ मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है।

Written byसुनीता मिश्रासुनीता मिश्रा
Nov 21, 2025, 05:12 pm IST
inभारत

बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भारत में बच्चों के लापता होने के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे गंभीर मुद्दा बताया। अदालत ने कहा कि देश में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया बेहद जटिल है, इसलिए इसका उल्लंघन होना स्वाभाविक है। लोग बच्चों को पाने के लिए अवैध साधनों का सहारा लेते हैं। शीर्ष न्यायालय ने यह टिप्पणी एक समाचार रिपोर्ट का जिक्र करते हुए की, जिसमें दावा किया गया था कि देश में हर आठ मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है।

उन्होंने केंद्र सरकार से इस प्रणाली को सरल बनाने का आग्रह किया और 9 दिसंबर तक लापता बच्चों के मामलों को संभालने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा। हालांकि, कोर्ट ने इससे पहले भी केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को लापता बच्चों के मामलों को संभालने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने लिए कहे और बच्चों के नाम व संपर्क विवरण मिशन वात्सल्य पोर्टल पर प्रकाशित करें, जो महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के चौंकाने वाले आंकड़े

दरअसल, देश में हर साल हजारों बच्चे लापता हो रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2022 में 83,350 बच्चे लापता हुए थे, जिसमें सबसे अधिक 62,946 लड़कियां, 20,380 लड़के और 24 ट्रांसजेंडर शामिल थे। वहीं एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 की तुलना में 2023 में बच्चों के खिलाफ अपराधों में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2023 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1.77 लाख मामले दर्ज हुए। इनमें आधे से ज्यादा मामले अपहरण के हैं, जबकि पाक्सो एक्ट से जुड़े मामले 38.2 प्रतिशत हैं।

लापता बच्चे तस्करी, बाल श्रम का शिकार होते हैं

किसी भी परिवार के लिए अपने बच्चे से दूर होने से बड़ी पीड़ा और कोई नहीं हो सकती। जब कोई बच्चा लापता हो जाता है, तो उसके माता-पिता पर क्या बीतती होगी, उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। लापता हुए कई बच्चों को दुर्भाग्यवश तस्करी, बाल श्रम, देह व्यापार या अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ता है। इन्हें बंधक बनाकर इनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। भीख मंगवाई जाती है। शरीर से अंग तक निकालकर बेच दिए जाते हैं। ऐसे बच्चों के परिजनों को कई बार पुलिस की लापरवाही और कानूनी प्रक्रिया में देरी का सामना भी करना पड़ता है, जिससे उन्हें हताशा होती है।

भारत में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए

यह सच है कि भारत में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया जटिल और लंबी है, जिससे कई इच्छुक माता-पिता हतोत्साहित हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाना चाहिए। इससे न केवल कागजी कार्रवाई, समय की बचत होगी, बल्कि लापता बच्चों को ट्रेस करने और ऐसे मामलों की जल्द से जल्द जांच की जा सकेगी। अनावश्यक दस्तावेजों की संख्या कम करने और सत्यापन प्रक्रिया को गति देकर भी इस प्रणाली को सुव्यवस्थित बनाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त वर्तमान कानूनों की समीक्षा और उनमें आवश्यक संशोधन करके भी प्रक्रिया को अधिक सरल बनाया जा सकता है। इसके माध्यम से अधिक से अधिक बच्चों को अपनों का प्यार, घर मिल सकेगा और इच्छुक माता-पिता के लिए यह तनावपूर्ण नहीं होगा।

सरकार के साथ समाज की भी जिम्मेदारी

बच्चे के लापता होने से परिवार पर सामाजिक और आर्थिक दबाव पड़ता है, जिससे उनकी पीड़ा और जटिल हो जाती है। सरकार के साथ-साथ यह समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह लापता बच्चों के मामलों को रोकने और प्रभावित परिवारों की मदद करने के लिए आगे आए। अपने आस-पड़ोस के बच्चों का ध्यान रखें। आस-पास संदिग्ध गतिविधियों, अपरिचित वाहनों और घूमते अजनबियों को पहचानें और तुरंत उनकी सूचना पुलिस को दें। बच्चों को अजनबियों से बात न करने और सुरक्षित रहने के तरीके सिखाएं। जागरूकता अभियानों में हिस्सा लें और स्थानीय पुलिस व प्रशासन के साथ मिलकर काम करें। लापता बच्चों के परिवारों को अकेला महसूस न होने दें। इस बात को ध्यान में रखना होगा कि जब सरकार और समाज मिलकर काम करते हैं, तो वे एक मजबूत सुरक्षा जाल बनाते हैं, जो बच्चों को सुरक्षित रखने में मदद करता है और प्रभावित परिवारों को इस मुश्किल समय से उबरने में सहायता करता है।

Topics: पाञ्चजन्य विशेषलापता बच्चेCases of Missing ChildrenNational Crime Records Bureauलापता बच्चे सुप्रीम कोर्टNCRB के आंकड़ेबच्चों के अपहरण के मामलेलापता बच्चे तस्करी बाल श्रमबाल अपहरणSupreme Courtसुप्रीम कोर्ट
सुनीता मिश्रा
सुनीता मिश्रा
हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री। इग्नू दिल्ली से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर डिग्री। पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव। [Read more]
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