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‘मणिपुर में शांति हेतु समाज और समुदाय स्तर पर प्रयास जारी’

सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत पूर्वोत्तर भारत के प्रवास के दौरान 19 नवंबर को गुवाहाटी में और 20 नवंबर को इंफाल में थे। गुवाहाटी में उन्होंने युवा सम्मेलन को और इंफाल में विशिष्ट नागरिकों को संबोधित किया

Written byPanchjanyaPanchjanya
Nov 21, 2025, 04:39 pm IST
inमणिपुर
गुवाहाटी में युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत। साथ में हैं संघ के स्थानीय अधिकारी

गुवाहाटी में युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत। साथ में हैं संघ के स्थानीय अधिकारी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत पूर्वोत्तर भारत के प्रवास के दौरान 19 नवंबर को गुवाहाटी में और 20 नवंबर को इंफाल में थे। गुवाहाटी में उन्होंने युवा सम्मेलन को और इंफाल में विशिष्ट नागरिकों को संबोधित किया।

गुवाहाटी में उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे संघ के बारे में किसी प्रकार की पूर्वाग्रही धारणाओं या प्रायोजित प्रचार के आधार पर राय न बनाएं। युवा पीढ़ी को संघ को नजदीक से देखना और समझना चाहिए। आज संघ एक व्यापक सार्वजनिक चर्चा का विषय बन चुका है, लेकिन चर्चाएं तथ्यों पर आधारित हों। उन्होंने यह स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों और कई डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध संघ संबंधी जानकारी का 50 प्रतिशत हिस्सा या तो गलत होता है या अधूरा।

श्री भागवत ने संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार की दृष्टि का उल्लेख करते हुए बताया कि संघ का मूल उद्देश्य भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाना है। राष्ट्र तभी उठता है जब समाज उठता है, और एक प्रगतिशील भारत के लिए संगठित, गुणवान और गुणवत्तापूर्ण समाज का निर्माण आवश्यक है। उन्होंने विकसित देशों के इतिहास का अध्ययन करने की आवश्यकता बताई और कहा कि उन देशों ने अपनी पहली 100 वर्ष की यात्रा में समाज को एकजुट और मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया।

भारतीय समाज को भी इसी प्रकार विकसित होना होगा। उन्होंने कहा कि भाषा, क्षेत्र और विचारों की विविधताओं का सम्मान करना भारत की प्राचीन परंपरा है। भारत की परंपरा कहती है, ‘मेरा मार्ग सही है, लेकिन तुम्हारी परिस्थिति में तुम्हारा मार्ग भी सही हो सकता है।’ उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो लोग भारत से अलग हुए, उनकी विविधताएं समाप्त होती गईं, जैसे पाकिस्तान में पंजाबी और सिंधी समाज अब उर्दू अपनाने पर विवश हैं। विविधता का सम्मान करने वाला समाज ही हिंदू समाज है और ऐसा समाज निर्मित करना ही संघ का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि विविधता एकता का उत्सव है।

इंफाल में विशिष्ट नागरिकों को संबोधित करते हुए श्री भागवत ने सामाजिक सद्भाव, सभ्यतागत एकता और मणिपुर में दीर्घकालिक शांति पर बल दिया। संघ कार्य को अतुलनीय बताते हुए उन्होंने कहा कि समुद्र, आकाश और सागर की कोई तुलना नहीं होती, उसी प्रकार संघ का भी कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने बताया कि संघ के विरुद्ध दुष्प्रचार 1932–33 के आसपास ही प्रारंभ हो गया था, विशेषकर उन बाहरी स्रोतों से, जो भारत और उसकी सभ्यतागत आत्मा को समझने में असमर्थ थे।

उन्होंने आग्रह किया कि संघ को धारणा नहीं, तथ्य के आधार पर समझा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘हिंदू’ शब्द किसी धार्मिक पहचान का नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और सभ्यतागत विशेषण का द्योतक है। एक सबल राष्ट्र के लिए गुणवत्ता और एकता अनिवार्य हैं। राष्ट्र की प्रगति केवल नेताओं पर नहीं, बल्कि संगठित समाज पर निर्भर करती है।

भारत की प्राचीन राष्ट्रभावना पर उन्होंने कहा कि हमारा राष्ट्र पाश्चात्य राज्य व्यवस्था से नहीं, बल्कि ऋ षियों की तपस्या, त्याग और विश्व कल्याण की दृष्टि से उदित हुआ है। अपनत्व का विस्तार करने पर बल देते हुए श्री भागवत ने कहा, “समाज की शक्ति बढ़ती है तो दुनिया सुनती है। दुर्बल की बात कोई नहीं सुनता। संघ का उद्देश्य सक्षम, सजग और संगठित हिंदू समाज का निर्माण है।” उन्होंने कहा कि संघ अपने यश या महिमा के लिए कार्य नहीं करता। ‘तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें।’ ऐसे समर्पित कार्यकर्ता ही हमारे गुरुओं द्वारा कल्पित ‘नायक’ हैं। उन्होंने मणिपुर की सांस्कृतिक परंपराओं, विशेष अवसरों पर पारंपरिक वेशभूषा और स्थानीय भाषाओं के प्रयोग की सराहना की और इन्हें और सुदृढ़ करने का आह्वान किया।

मणिपुर की वर्तमान परिस्थितियों पर उन्होंने कहा कि स्थिरता बहाल करने के लिए समाज और समुदाय स्तर पर प्रयास जारी हैं। विनाश में मिनट लगते हैं, लेकिन रचना में वर्षों; विशेषकर तब जब उसे समावेशी ढंग से और बिना किसी को हानि पहुंचाए करना हो। शांति-स्थापना में धैर्य, सामूहिक प्रयास और सामाजिक अनुशासन की आवश्यकता होती है। कार्यक्रम के अंत में सरसंघचालक ने प्रतिभागियों से कौशल विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद भी किया।

Topics: सक्षमविश्व कल्याणराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघइंफालसरसंघचालकसामाजिक सद्भावहिंदू समाजसंगठित समाजएकता का उत्सवमोहनराव भागवतऋ षियों की तपस्याडॉ. हेडगेवारसजगगुवाहाटीपूर्वोत्तर भारतविश्वगुरु
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