कर्नाटक की राजनीति में फिर से हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के 2.5 साल के कार्यकाल के खत्म होते ही डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है। 2023 के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस ने दोनों नेताओं के बीच सीएम पद की रोटेशन फॉर्मूला तय किया था, लेकिन अब सिद्धारमैया इस पर अमल करने को तैयार नहीं दिख रहे। इससे राज्य में एक बार फिर ‘ड्रामा’ की आशंका बढ़ गई है। शिवकुमार अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए हाईकमान से मिलने पहुंचे हैं, जबकि सिद्धारमैया खुलकर कह चुके हैं कि वे पद नहीं छोड़ेंगे।
2023 का वादा, सिरदर्द नया
2023 में जब कांग्रेस ने कर्नाटक की सत्ता हासिल की, तो पार्टी ने सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच संतुलन बनाने के लिए एक फॉर्मूला बनाया। इसमें तय हुआ कि सिद्धारमैया पहले 2.5 साल सीएम रहेंगे, फिर बारी शिवकुमार की। ये फैसला दोनों गुटों की नाराजगी को शांत करने के लिए था। सिद्धारमैया ने जून 2023 में पद संभाला और अब नवंबर 2025 में उनका टर्म पूरा हो गया। लेकिन रोटेशन का समय आते ही चीजें उलझ गईं। शिवकुमार का खेमा कहता है कि वादा लिखित था और हाईकमान ने इसे मंजूर किया था। उधर, सिद्धारमैया सीएम की कुर्सी से चिपके हुए हैं।
शिवकुमार का दिल्ली डेरा
डीके शिवकुमार गुरुवार को दिल्ली पहुंचे, उनके साथ वफादार नेता भी हैं। मंत्री एन चेलुवरायास्वामी, विधायक इकबाल हुसैन, एचसी बालकृष्णा और एसआर श्रीनिवास उनके साथ हैं। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को 12 और विधायक दिल्ली आ सकते हैं। इससे पहले करीब दर्जन भर एमएलसी दिल्ली में ठहरे थे और कांग्रेस के महासचिवों से मिले थे। शिवकुमार ने कहा, “मैं स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली आया हूं। सिद्धारमैया के बयान पर खुशी हुई। किसी ने ना नहीं कहा। पार्टी ने उन्हें सीएम बनाया, हम सब साथ काम कर रहे हैं।” उनके भाई डीके सुरेश ने भी कहा कि सिद्धारमैया वादों से मुकरते नहीं, लेकिन ये मामला अब राहुल गांधी और हाईकमान पर है। शिवकुमार का ये कदम साफ तौर पर दबाव बनाने का है, ताकि रोटेशन हो सके।
सिद्धारमैया का साफ इंकार
सिद्धारमैया ने चामराजनगर की एक रैली में रोटेशन की अफवाहों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जब पहली बार वित्त मंत्री बना, तो एक अखबार ने लिखा – ये सिद्धारमैया 100 भेड़ें भी गिन नहीं सकता, कर्नाटक का वित्त कैसे संभालेगा? मैंने इसे चुनौती माना। 16 बजट पेश किए, 17वां भी मैं ही पेश करूंगा।” ये बयान साफ बता रहा है कि वे पद नहीं छोड़ेंगे। सिद्धारमैया का मानना है कि शुरुआत से ही उनकी स्थिति मजबूत रही। उनके गुट में भी कई विधायक दिल्ली जाने को तैयार हैं, लेकिन अभी चुप्पी साधे हैं।
हाईकमान करेगा फैसला?
अब सारी नजरें कांग्रेस हाईकमान पर हैं। शिवकुमार ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जानकारी दे दी है। सुरेश ने कहा कि सिद्धारमैया वचन के पक्के हैं, लेकिन रोटेशन होगा या नहीं, ये एआईसीसी अध्यक्ष और राहुल गांधी तय करेंगे।

















