Red Fort Blast: सुरक्षा एजेंसियां इन दिनों फरीदाबाद में जब्त विस्फोटकों और दिल्ली धमाके की जांच में जुटी हुई हैं। इसी सिलसिले में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है – तब्लीगी जमात के जरिए जकात के नाम पर आतंकी डॉक्टर शाहीन को टेरर फंडिंग मिली। इन पैसों का इस्तेमाल आतंकी सामान जुटाने में किया गया। खास बात ये है कि वैसे तो इसे गरीबों के लिए दान के तौर पर दिया जाता था, लेकिन इसका असल इस्तेमाल देश को दहलाने में किया जाता था।
इंटेलिजेंस टीमों ने खुलासा किया है कि ये फंडिंग शाहीन और उसके साथियों को मिली, जिन्होंने इससे यात्राएं कीं, सामान जुटाया और आतंकी नेटवर्क को मजबूत बनाया। जांच में कई बैंक खाते, मोबाइल नंबर और लोग फंस चुके हैं। ये मामला उत्तर प्रदेश के कई जिलों से जुड़ा है, जहां जकात इकट्ठा करने की मीटिंग्स होती रहीं।
फंडिंग के केंद्र में शाहीन
रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकी डॉक्टर शाहीन इस पूरे खेल की मुख्य खिलाड़ी लग रही है। जांच के मुताबिक, उसे तब्लीगी जमात से जकात के नाम पर पैसे मिले, जो मुजम्मिल, डॉक्टर परवेज और आरिफ जैसे साथियों के साथ मिलकर इस्तेमाल हुए। ये लोग व्हाइट-कॉलर टेररिस्ट ग्रुप का हिस्सा हैं। शाहीन ने इन पैसों से विस्फोटक सामग्री खरीदी, यात्राओं का इंतजाम किया और आतंकी प्लानिंग में जुटे रहे। मुजम्मिल और परवेज जैसे नाम दिल्ली धमाके और फरीदाबाद कांड से जुड़े हैं। आरिफ भी इसी चक्र में फंसा हुआ है। एजेंसियां इन सबके बैंक खातों को खंगाल रही हैं – करीब 15 खाते अभी स्कैन के दायरे में हैं। मुस्लिम देशों की संस्थाओं से भी फंडिंग के सुराग मिले हैं, जिनकी डिटेल्स जांच का हिस्सा हैं।
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जकात का गलत इस्तेमाल
जकात इस्लाम में एक नेक काम है। इसके अनुसार अपनी कमाई का 2.5 फीसदी हिस्सा गरीबों, जरूरतमंदों या जेल से रिहा युवाओं के परिवारों को देना होता है। लेकिन यहां ये पैसे आतंकी कामों में लगे। तब्लीगी जमात के सदस्यों ने मीटिंग्स बुलाईं, जहां जकात इकट्ठा की गई। ये मीटिंग्स पश्चिमी यूपी के बिजनौर, सहारनपुर, हापुड़ और मुरादाबाद में हुईं। दिल्ली, श्रीनगर, जम्मू तो ठीक, लेकिन दुबई और ओमान में भी गुप्त सभाएं रहीं। इन पैसों से न सिर्फ घरेलू-विदेशी यात्राएं हुईं, बल्कि आतंकी ‘नर्सरी’ तैयार करने जैसे प्लान बने। एजेंसियों ने 25-30 संदिग्ध मोबाइल नंबर बरामद किए हैं, जो अब बंद हैं। इनके आईएमईआई डेटा से और नंबर ट्रेस हो रहे हैं। दिल्ली धमाके के बाद ये नंबर एक्टिवेट ही नहीं हुए हैं।
फाउंडेशन पर लगी लगाम
ये कोई नई बात नहीं है। 2022 में केंद्र सरकार ने रिहैब इंडिया फाउंडेशन पर पांच साल की पाबंदी लगा दी थी। ये फाउंडेशन जकात के नाम पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को फंडिंग दे रहा था। उसके अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। फाउंडेशन तो धार्मिक कामों का दिखावा करता था, लेकिन अंदर से आतंकी गतिविधियों को सपोर्ट कर रहा था। अब इस केस में भी वैसी ही पैटर्न दिख रही है – जकात का कवर लेकर पैसे का फ्लो। एजेंसियां इन लिंक्स को जोड़ रही हैं, ताकि पूरा नेटवर्क उजागर हो।
नंबर, खाते और सुराग
इंटेलिजेंस टीमें अब हर एंगल को छान रही हैं। संदिग्ध मोबाइल नंबरों के आईएमईआई से नए कनेक्शन निकल रहे हैं। बैंक खातों की डिटेल्स जमा हो चुकी हैं, और मुस्लिम देशों की संस्थाओं के ट्रांसफर पर नजर है। फरीदाबाद और दिल्ली के विस्फोट इन जांचों को तेज कर रहे हैं। शाहीन ग्रुप के लोग यात्राओं के बहाने दुबई-ओमान जाते रहे, वहां मीटिंग्स होतीं। ये सब जकात के नाम पर। एजेंसियां मान रही हैं कि इससे और बड़े खुलासे होंगे।

















